Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 45

चुनौतियाँ चलना सिखलाती है

56 सूत्र

युवकों को अपने जोश का उपयोग करना चाहिए पर होश के साथ।
विवेक
किसी भी कार्य को योजना बनाकर करने वाला व्यक्ति सफल होता है।
पुरुषार्थ
मेहनत से मत कतराइये क्योंकि विकास के शिखरों तक पहुँचने का रास्ता मेहनत ही है।
पुरुषार्थ
अपना रास्ता स्वयं बनाकर चलने वाला शेर के समान शक्तिशाली होता है।
पुरुषार्थ
शिखर की ओर जाने वाले रास्ते पर बहुत अधिक भीड़ नहीं रहती है।
पुरुषार्थ
लक्ष्य पाना है तो पूरी ताकत से काम करो।
पुरुषार्थ
अनुकूलता हो या प्रतिकूलता महापुरुष लक्ष्य की धुन में बढ़ते जाते हैं, यही कारण है कि सफलता पग-पग पर उनके कदम चूमती है।
पुरुषार्थ
अपने लक्ष्य को न भूलो, अन्यथा जो कुछ भी मिलेगा उसी में संतोष करने लगोगे।
पुरुषार्थ
भूतकाल से प्रेरणा लेकर वर्तमान में उज्ज्वल भविष्य की तैयारी करनी चाहिए।
समय
महानता की आकांक्षा करने से हमारी आत्मा की सर्वोत्कृष्ट शक्तियों का विकास होता है।
पुरुषार्थ
कोई भी कार्य प्रारम्भ करने से पहले उसके अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं पर विचार कर लेना चाहिए।
विवेक
सबसे शानदार विजय है–अपने पर विजय प्राप्त करना और शर्मनाक बात है–अपने से परास्त हो जाना।
संयम
व्यक्ति सद्भावनाओं के द्वारा अपने भाग्य को भी बदल सकता है।
कर्म
विचारवान व्यक्तियों का मुट्ठी भर समूह ही सारी दुनिया को उलट-पुलट कर सकता है।
ज्ञान
वीरता मारने में नहीं, मरने में है। किसी की प्रतिष्ठा बचाने में है, प्रतिष्ठा गँवाने में नहीं।
अहिंसा
मानव की महिमा इस बात में नहीं है कि वह कभी गिरे नहीं, बल्कि इस बात में है कि हर बार गिरने पर उठ खड़ा हो।
पुरुषार्थ
मनुष्य कहीं भी जन्म ले, वह अपने कर्मों से श्रेष्ठ अथवा निकृष्ट बनता है।
कर्म
आत्मविश्वास को ही अपना सच्चा और अच्छा मित्र बनाइये।
पुरुषार्थ
हर मंजिल के रास्ते होते हैं और हर रास्ते पर मुश्किलें होती हैं, पर मन में यदि उमंग-उत्साह-आत्मविश्वास हो तो जीत निश्चित होती है।
पुरुषार्थ
अवकाश के दिन पुण्य कार्य कीजिए, ताकी बीते दिनों के पाप धुल सकें और आने वाले दिनों को नई दिशा व ऊर्जा मिल सके।
धर्म
किसी सत्यकार्य को करने के लिए जो यह कहते हैं कि हमारे पास समय नहीं है, वे वास्तव में आलसी हैं, समय हर मनुष्य के पास है पर उसका उपयोग करने के लिए हमें आलस्य त्यागना होगा।
पुरुषार्थ
समय निकल जाने के उपरांत किया गया श्रेष्ठ कर्तव्य भी निष्फल ही होता है।
समय
चुनौतियाँ मनुष्य को अपनी अज्ञात, अपरिमित शक्तियों के प्रति जागरुक बनाती हैं।
पुरुषार्थ
दृढ़ इच्छाशक्ति वाले व्यक्ति आधा कार्य तो शुरू होने से पहले ही कर लिया करते हैं।
पुरुषार्थ
जो अपनी जरूरत के समय पर मदद माँगने में नहीं हिचके वास्तव में वही सबसे मजबूत है।
विनम्रता
लड़ने से ज्यादा लड़ाई से बचने के लिए बहादुरी की जरूरत होती है।
अहिंसा
संकटों से कभी घबराना नहीं चाहिए क्योंकि काँटों में फूल खिलते हैं।
पुरुषार्थ
यदि आपके कार्य की नींव आपका आत्मविश्वास है तो आपके लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है।
पुरुषार्थ
अनिश्चित मन वाला पुरुष भी जब मन को एकाग्र करके सामना करने के लिए खड़ा होता है तो आपत्तियों का लहराता हुआ समुद्र भी शांत होकर बैठ जाता है।
पुरुषार्थ
शरीर और वैभव अनित्य है और मृत्यु निकट है अतः सिर्फ धर्म का ही संग्रह करना चाहिए।
धर्म
संसार में सबसे बड़ा वही शस्त्र है जो वक्त पर काम आवे।
समय
आप अपनी सफलता का अनुमान इस बात से भी लगा सकते हैं कि अन्य व्यक्ति आपका कितना विश्वास करते हैं और आपको निर्बल अथवा भीरु तो नहीं समझते हैं।
समृद्धि
आपके परिवार में कब, कौन, किस पीढ़ी में सन्त बना यह महत्त्वपूर्ण नहीं, महत्त्वपूर्ण तो यह है कि आप कब सन्त बनेंगे।
धर्म
सफलता साहस से मिलती है, फिर भले ही वह बुद्धिहीन हो या बुद्धिमान धर्मात्मा हो या अधर्मात्मा।
समृद्धि
विश्वास कार्य सिद्धि का पिता (जनक) है, इससे योग्यता को बल मिलता है जिससे शक्ति दुगुनी हो जाती है, मानसिक शक्तियों को सहारा मिलता है, वे पुष्ट हो जाती हैं जिससे कार्य में सफलता मिलती है।
पुरुषार्थ
'जीत' उपेक्षा, उलाहना और संघर्ष की सीढ़ियाँ चढ़ने के बाद ही हासिल होती है।
पुरुषार्थ
कठिनाइयाँ सफलता की पूर्व प्रवेश परीक्षा होती है।
पुरुषार्थ
सवाल करना मानव की तरक्की को जाहिर करता है।
ज्ञान
असफलताओं से न घबराकर लगातार प्रयास करने वाले लोगों की गोद में सफलता खुद आ जाती है।
पुरुषार्थ
अच्छे अवसर को खो देना सफलता को खो देना है।
पुरुषार्थ
निर्बल होने पर भी अपना आत्मबल नहीं खोना चाहिए, आत्मबली अपने आत्मबल से सफलता प्राप्त कर लेता है।
पुरुषार्थ
सभ्यता की एकमात्र कसौटी है–सहनशीलता।
संयम
सफलता के कदम पर चलने के लिए उन कदमों द्वारा मत चलिए जिन्हें दूसरे शब्दों में गुस्सा, बेईमानी और अनादर कहते हैं।
चरित्र
ब्रह्ममुहूर्त में उठने का संकल्प लेना जीवन सफलता के लिए उपयोगी एवं आवश्यक मंत्र है।
पुरुषार्थ
सफलता उन्हीं के चरण चूमती है जो किसी भी समस्या या कार्य के दोनों पक्षों को देखते हैं और जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं करते हैं।
विवेक
सफलता के लिए जो त्यागना है उसे त्यागें और जिसे अपनाना है उसे अपनाएँ, तभी आपकी सफलता निश्चित है।
समृद्धि
तीन और तीन छह तो सभी करते हैं, पर आप कुछ ऐसा कीजिये जिससे वह तैंतीस बन सकें।
पुरुषार्थ
मजदूर का पसीना सूखे, उससे पहले उसे उसका मेहनताना दे दीजिए।
चरित्र
यदि आप समझदार हैं तो अपनी गलतियों को मत दुहराइये।
ज्ञान
खोये का रोना क्या? जो पाया नहीं है उसका सोचना क्या? जो है उसे कर्म की व्यवस्था मानकर सुख शान्ति से जिएं।
संतोष
समय का उल्लंघन करने से सरलता से किया जाने वाला कार्य भी अत्यन्त कठिन हो जाता है।
समय
''मुझे किसी के सहयोग की अपेक्षा नहीं,'' यह दावा करना उतना ही असंगत है जितनी कि अमावस की काली निशा में सूरज उगने की बात है अर्थात् सहयोग की सभी को आवश्यकता पड़ती है।
विनम्रता
साहस दो प्रकार का होता है–एक तोप के सामने अड़ जाना और दूसरा आध्यात्मिक विश्वासों पर डँटे रहना।
पुरुषार्थ
संसार में आधे से अधिक लोग तो इसलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि समय पर उनमें साहस का संचार नहीं हो पाता और वे भयभीत हो जाते हैं।
पुरुषार्थ
जितनी जरूरत हो उतना रखो, जितनी शक्ति हो उतना करो, यही सुखी होने का उपाय है।
संतोष
हर किसी को खुश रखने की कोशिश विफलता का रास्ता है।
विवेक