पूर्व जन्म में स्वयं के द्वारा किए हुये शुभ-अशुभ कर्मों का फल ही जीव भोगता है, अगर दूसरे के द्वारा दिए हुये कर्मों का फल जीव भोगे तो उसके किए हुये कर्मों का फल व्यर्थ हो जाएगा। कर्म 0 – भेजें
कर्म से पीड़ित मुझको कोई मेरे दोषों की चिकित्सा करके मुझे स्वस्थ करता है वह मेरा सच्चा मित्र है, उससे शत्रुता कैसी ? क्षमा 0 – भेजें
अपने पुण्य को नष्ट करके अगर कोई मेरे दोषों को नष्ट करता है उस पर भी मैं अगर क्रोध करूँ तो मेरे से अधम और कौन होगा ? क्षमा 0 – भेजें
किसान का प्रतिशोध- किसान अपनी पत्नि को पीटना चाहता था, लेकिन वह बहुत चतुर थी, उसने अपने जीवन में ऐसा काम नहीं किया जिससे उसको कोई पीट सके, किसान ने एक दिन उसको पीटने के उद्देश्य से खेत में हल चलाते समय पत्नि को आते देख कर हल में बैल उल्टे नह दिये, उसने सोचा ऐसा देखकर पत्नि कुछ कहेगी तभी मैं उसको पीट दूँगा, लेकिन पत्नि ने चुप-चाप नास्ता दिया और घर की ओर चली गई, पूँछने पर बोली कि चाहे आप उल्टा नहो या सीधा खेत जोतना आपको है मेरा काम नास्ता देना है, पति देखता रह गया। क्षमा 0 – भेजें
दुकानदार की क्षमा- शैतान लड़के ने दुकानदार से साड़ी की कीमत पूँछी, सौ रुपए बताया, साड़ी को बीच में से फाड़ दिया और पूछा आधी साड़ी कितने की ? दुकानदार ने कहा पचास रुपये की, इस प्रकार साड़ी के टुकड़े-टुकड़े कर कहा यह साड़ी हमारे काम की नहीं है और साड़ी की कीमत दिये विना जाने लगा तो दुकानदार ने कहा साड़ी तो पुनः बन सकती है, किन्तु जीवन बिगड़ गया तो फिर नहीं बनेगा तो उसने चरणों में गिरकर क्षमा मांगी। क्षमा 0 – भेजें
चिरोञ्जाबाई का क्रोध- चिरोञ्जाबाई की ननद से कोई गलती हो गई, यह देखकर बाईजी को बहुत गुस्सा आया, उन्होंने उनका शिर पकड़ कर दीवाल से दे मारा लेकिन पीछे हाथ लगा लिया कहीं शिर में चोट न लग जाए। क्षमा 0 – भेजें