Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 161

लात का जबाब लात से।

5 सूत्र

क्रोध आता है तो दरवाजे को भी लात मार देते हैं, क्षमा माँगते समय कहते है वह तो अजीव है उससे क्या क्षमा मांगना।
क्षमा
क्षमा तीन प्रकार की होती है स्वार्थ वश, मजबूरी वश और वास्तविक। स्वार्थ वश क्षमा- ग्राहक अनेक चीजों को देखने के बाद भी नहीं खरीदता है तो भी दुकानदार उसे क्षमा कर देता है ऐसा मानकर कि आज न सही फिर कभी खरीदने आयेगा। मजबूरी वश क्षमा- घमण्डी पहलवान रोड से जा रहा था, छत से दूसरे पहलवान ने ईंट फेक कर मारी, वह सोचता है आज किसकी मौत मण्डरा रही है, हाथ में ईंट लेकर ऊपर जाता है देखता है, वहाँ तो कोई महा पहलवान अभ्यास कर रहा है, उसे देखकर पैरों के नीचे से जमीन खिसक गयी, कहा ! भाई साहब आपकी ईंट वापस करने आया हूँ। वास्तविक क्षमा- दुष्टों ने नाव में बैठकर साधु को परेशान किया लोगों ने कहा आपके पास शक्ति है आप नाव को पलट दो, साधु ने कहा हम नाव पलटने की जगह बुद्धि पलटते हैं।
क्षमा
श्रावक बनूँ या श्रमण-दर्शक ने पूँछा था गृहस्थ बनूं या साधु? जब तक साधु बनने की क्षमता नहीं है तब तक पति पत्नि में समन्वय करने की कला होनी चाहिए, एक व्यक्ति ने पत्नि से कहा लालटेन जला लाओ, पत्नि दिन में बारह बजे लालटेन जलाकर आंगन में ले आयी, उसने नहीं पूँछा कि दिन में लालटेन की क्या आवश्यकता है? भोजन करने बैठे, भोजन में नमक नहीं था शान्ति से भोजन करके आ गये, गृहस्थी में इस तरह रहो और बाद में साधू बनकर समता की साधना करो, प्रश्न का उत्तर मिल गया।
क्षमा
गजकुमार मुनि-कौन जल रहा था ? गजकुमार मुनि के उपसर्ग की वार्ता सुनकर एक सज्जन बोल उठे, कैसी बिडम्बना है, गजकुमार मुनि का शिर जल रहा था और उनका ससुर हँस रहा था, देखो संसार की दशा, तब एक ने कहा भाई ! मुनिराज तो समता रुपी अमृत का पान कर रहे थे, अपूर्व आनन्दप्राप्त कर रहे थे, अरे ! कषाय की भट्टी में तो उनका ससुर जल रहा था, मुनि का शरीर जल रहा था आत्मा हँस रही थी, ससुर की आत्मा जल रही थी, शरीर हँस रहा था, देखो यह स्वभाव दृष्टि का बल है।
क्षमा
लात का जबाव लात से-लात का जबाव लात से गधा ही देता है, आप गधे तो नहीं है न ? भौंकने का जबाव भौंककर कुत्ता ही देता है, आप कुत्ते तो नहीं है न ? क्रोध का जबाव क्रोध से क्रोधी ही देता है, आप क्रोधी तो नहीं है न ? घृणा का जबाव प्रेम से सन्त ही देता है, आप सन्त के अनुयायी है न ? तो फिर गुस्सा क्यों करते हैं ? सामने वाला गुस्सा करे तो आप चुप रहें, क्रोधी वक्ता बने तो आप श्रोता बनें, थोड़ी देर में अपने आप शान्त हो जायेगा, दरअसल क्रोध तात्कालिक पागलपन है, बच्चा गलती करता है तो आप उसे क्षमा कर देते हैं, क्योंकि नादान है अरे भाई ! क्रोध करने वाले भी तो नादान हैं अतः उन्हे भी क्षमा कर देना चाहिए।
क्षमा