डॉक्टर या डाकू- माँ बेटे को डाकू भी और डॉक्टर भी बना सकती है, घड़ा जब तक कच्चा है, तब तक चोट सहता है, पकने के बाद नहीं, एक बच्चे ने स्कूल से पेन चुरा लिया, घर आया तो माँ ने मुस्करा दिया, माँ की मुस्कराहट से वह आगे चलकर डाकू बन गया, फाँसी की सजा हुयी, अन्तिम इच्छा माँ के दर्शन की प्रकट की, माँ जैसे ही पास में आयी लड़के ने उसकी नाक काट दी, पूँछा ऐसा क्यों किया? उसने कहा मुझे माँ ने डाकू बनाया है, इसलिये फाँसी मेरी नही इनको होना चाहिए, जिस दिन मैं पेन चुराकर लाया था, तब माँ ने डाँटा नहीं मुस्कराया था, अगर उसी दिन डांटा होता तो मैं दुबारा चोरी करने का साहस नहीं कर सकता था। परिवार 0 – भेजें
दस लाख पाठक जो संस्कार डालते हैं, उतने संस्कार एक पिता डाल सकता है, एक लाख पिता जो शिक्षा देते हैं वे एक माता दे सकती है। परिवार 0 – भेजें
घुड़साल का तोता- राजा ने दो तोते पलवाये एक घुड़साल में, एक रनवास में रखा, राजा एक दिन घुड़साल गया तो तोता बोला! रे बदमास पीछे हट जा, राजा को सुनकर क्रोध आया मेरा नमक खाकर मेरा अपमान करता है, इसको मरवा दो, राजा रनवास गया वहाँ का तोता राजा को देखकर दूर से ही मीठे नम्र स्वर में बोला, हे महाराज साहब स्वागत है, पधारिये, आसन ग्रहण कीजिये हे रानी, राजा साहब पधार रहें है, स्वागत करों, इसका व्यवहार देखकर राजा आश्चर्य में पड़ गया, एक माँ के दो बच्चे, एक भद्र दूसरा अभद्र ऐसा क्यों, मन्त्री जी ने जवाब दिया राजन्! ये सङ्गति व संस्कार का फल है, अपने आचरण से लोग आचरण सीखते है, गाँधी जी ने पहले अवगुण छोड़े फिर दूसरों से छुड़वाये। संगति 0 – भेजें