जहाँ पर कषाय और विषय के साथ आहार का त्याग किया जाता है, उसे उपवास जानना चाहिए, शेष को भूखा रहना समझना चाहिए। आहार 0 – भेजें
जीव ने अज्ञान पूर्वक जो दुःखदायी कर्म बाँधे हैं, जैसे अग्नि ईंधन को जला देती है, उसी तरह उपवास उन सब पापों को जला देता है। कर्म 0 – भेजें
जल से उत्पन्न हुआ कीचड़ जल से ही शुद्ध होता है और मन से उत्पन्न हुआ पाप मन से पश्चाताप करने से ही शुद्ध हो जाता है और शरीर से किया हुआ पाप शरीर से तप करने पर ही शुद्ध होता है। कर्म 0 – भेजें
दो पथ पन्थी चले न पन्था, दो मुख सुई सिले न कन्था। दोऊ काम नहीं होय सयाने, विषय भोग अरु मोक्ष हु जाने॥ अनासक्ति 0 – भेजें