Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 20

धैर्य

95 सूत्र · पृष्ठ 1 / 2

आपत्ति, दुःख और चिंताएँ इसलिए आती हैं कि परमात्मा को याद करने का समय निकाल सकें, आत्मदर्शन कर सकें तथा दूसरों के दुःखों का अनुभव कर सकें।
समाधि
इस असार एवं दुःख पूर्ण संसार में अनन्त अवसर्पिणी-उत्सर्पिणी काल व्यतीत हो गए, उन समस्त कालों में यही मन्त्रराज महत्त्वपूर्ण रहा है अर्थात् अतीत काल में जिन भव्य प्राणियों ने मुक्ति पाई है, विदेहादिक से वर्तमान काल में पा रहे हैं, पाँच भरत और पाँच ऐरावत क्षेत्र से भविष्यत् काल में मुक्ति पायेंगे, यह सब मन्त्रराज का ही प्रभाव जानना चाहिए।
णमोकार
यदि कोई तराजू के एक पलड़े पर णमोकारमन्त्र को स्थापित करे तथा दूसरे पलड़े पर त्रिलोक की सम्पत्ति को स्थापित करें तो प्रथम पलड़ा ही भारी होगा, ऐसे महान् गौरवशाली णमोकारमन्त्र को ''मैं त्रियोग की शुद्धिपूर्वक नमस्कार करता हूँ''।
णमोकार
जो व्यक्ति स्वभाव से धैर्यवान है, वह महान् विपत्ति के समय भी अधीर नहीं होता, संकट के समय धैर्य धारण करना मानो आधी लड़ाई जीत लेना है, अपने धैर्य के बिना और कोई संकट से मनुष्य का उद्धार नहीं कर सकता, सज्जनों का धन तो धैर्य ही है जिसके पास धैर्य है, वह जो भी इच्छा करता है उसे प्राप्त कर सकता है।
चरित्र
जब तालाब भरता है तो मछलियाँ चींटियों को खाती हैं और जब तालाब खाली होता है तो चींटियाँ मछलियों को खाती हैं। मौका सबको मिलता है बस अपनी बारी का इंतजार करो।
समय
विपत्ति में धैर्य, अभ्युदय में क्षमा, सभा में वाक्पटुता, युद्ध में विक्रम, यश में अभिरुचि और ज्ञान का व्यसन; ये महापुरुषों के स्वाभाविक गुण हैं।
चरित्र
जीवन में कोई विपत्ति आये तो कोई आपत्ति मत कीजिए, उसका धैर्यपूर्वक सामना कीजिए, दूध फटने पर वे ही लोग उदास होते हैं, जिन्हें रसगुल्ले बनाने नहीं आते हैं।
चरित्र
दुःख में कभी घबराओ मत और सुख में कभी इतराओ मत।
चरित्र
अज्ञानी दुःखों से डरता है, ज्ञानी दुःख में धैर्य धारण करता है।
चरित्र
रोग पीड़ित व्यक्ति के लिए धैर्य को छोड़कर दूसरी कोई उत्तम औषधि नहीं है।
स्वास्थ्य
बिना सोचे-विचारे जल्दी से लिया गया निर्णय विनाशकारी होता है।
विवेक
दुःख सभी को होता है, पर दुःख को दुःख मानकर भी जो उसे सहने की शक्ति रखते हैं, उनके लिए दुःख भी सुख हो जाता है।
चरित्र
महात्मा पुरुष सब कुछ नष्ट हो जाने पर भी खिन्न नहीं होते हैं।
चरित्र
कष्ट और विपत्ति मनुष्य को शिक्षा देने वाले श्रेष्ठ कारक हैं।
चरित्र
सत्य समझो, सहिष्णु व शीतल बनो, संक्लेश से बच जाओगे।
संयम
धर्म के साथ सहनशीलता सबसे ऊँची तपस्या है।
धर्म
धैर्य और धर्म की परीक्षा संकट में होती है।
चरित्र
धर्मात्मा जीव वही है जो कष्ट में भी धर्म को न छोड़ें।
धर्म
जिसमें धीरज है और जो मेहनत से नहीं घबराता कामयाबी उसकी दासी है।
पुरुषार्थ
धैर्यहीन मनुष्य तेलरहित दीपक के समान निन्दनीय है।
चरित्र
धैर्य और शान्ति कठिनाइयों के बादलों को बिखेर देती है।
चरित्र
बदला लेने में साहस नहीं, बल्कि उसे सहन करने में साहस है।
क्षमा
सम्पूर्ण बल मिलकर एक धैर्य की बराबरी नहीं कर सकते हैं।
चरित्र
मुसीबतें टूट पड़ें, हाल बेहाल हो जाए, तो भी जो लोग निश्चय से डिगते नहीं और धीरज रखकर चलते हैं वे ही सच्चे धैर्यशाली हैं।
चरित्र
धैर्य और संतोष जीवन-नौका के वे पतवार हैं जो नौका को मंजिल तक ले जाते हैं।
चरित्र
धैर्य व साहस संसार की हर आपत्ति का उपचार हैं।
चरित्र
निराशा धैर्य को समाप्त कर देती है।
चरित्र
आत्मा जिस कार्य से सहमत न हो, उस कार्य के करने में शीघ्रता न करो।
विवेक
धीरज से कमजोर आदमी को भी बल मिलता है बेसब्री से शक्ति बर्बाद होती है।
चरित्र
बिना निराश हुए पराजय को सहन कर लेना, इस धरा पर साहस की सबसे बड़ी परीक्षा है।
चरित्र
निर्भय का लोहा शत्रु भी मानता है।
चरित्र
परिवर्तन प्रकृति का नियम है, जब अच्छे दिन नहीं रहे तो बुरे दिन भी नहीं रहेंगे।
समय
बुद्धि की स्थिरता के बिना भी आदर्श पूरा नहीं होता है।
चरित्र
बुद्धिमान वही है, जो पूरे संकल्प से कार्य को निपटाना जानता है।
पुरुषार्थ
संसार में आधे से अधिक सक्षम लोग तो इसलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि समय पर उनमें साहस का संचार नहीं हो पाता और वे भयभीत हो उठते हैं।
चरित्र
बाधाओं और विरोधों से भयभीत न हो।
चरित्र
जिसके पास मनोबल नहीं उसके पास कुछ नहीं, यहाँ तक कि मनुष्यता भी नहीं है।
चरित्र
उत्तम पुरुष वही है, जो अपने मन को वश में रखकर विपरीत स्थिति में धैर्य रखकर उन परिस्थितियों को अपने अनुकूल बना लें।
संयम
विपदाओं के समूह बाढ़ की लहरों के समान आया करते हैं, धीर पुरुष उन्हें चट्टान की तरह सहता रहे, तो वह धीरे-धीरे आप ही चले जाते हैं।
चरित्र
हमारी जितनी मानसिक और शारीरिक शक्तियाँ हैं आत्मविश्वास उन सबका सरदार है।
चरित्र
जब सामने आई परिस्थिति का सामना करना तय है तो क्यों न धैर्य एवं साहस से सामना किया जाए।
चरित्र
जगत् में कुछ मानव ऐसे भी होते हैं, जो पेड़-पौधों की तरह सब कुछ सहन कर पाते हैं।
चरित्र
कोई भी साधना जल्दी परिणाम नहीं दिखाती, साधना सब्र माँगती है।
पुरुषार्थ
साहस गया कि आधी समझदारी भी उसके साथ चली जाती है।
चरित्र
मन में विकार उत्पन्न करने वाली वस्तुओं के पास होने पर भी जिनके मन में पाप नहीं आता, वे ही धीर पुरुष माने जाते हैं।
संयम
शीघ्रता में आकर जो तुमने सुना और माना है उसे कहने मत लगो।
वाणी
शान्ति की परीक्षा क्रोध का निमित्त मिलने पर होती है प्रिय विषय साधन मिल जाने पर तो सभी शांत बन जाते हैं।
क्षमा
धीरज की चाल धीमी पर फल मीठा होता है।
चरित्र
किसी से भी सब खुश नहीं हो सकते अतः अपने संतोष से सन्तुष्ट रहना बुद्धिमत्ता है।
संतोष
ऊपरी शान्ति से भी क्रोध की पुष्टि होती है।
क्षमा
सफलता के शिखर पर समर्थक कम और विरोधी ज्यादा मिलेंगे उन विरोधियों को सकारात्मक ऊर्जा से शांत करना और संतुलन बनाये रखना आवश्यक है।
समृद्धि
खुद पर भरोसा करना कोई परिंदों से सीखे क्योंकि जब वो शाम को वापस घोंसलों में जाते हैं तो उनकी चोंच में कल के लिए कोई दाना नहीं होता है।
चरित्र
हमारी सोच पर निर्भर करता है कि हम कमियों को नजर अंदाज कर उस व्यक्ति की अच्छाइयों को कितना उजागर करते हैं?
चरित्र
पूछे गये हर प्रश्न का उत्तर मिले, जरूरी नहीं।
चरित्र
निर्णय पर दवाब या प्रभाव हावी नहीं होना चाहिए।
विवेक
सब कुछ खोने से बुरा क्या है? वो उम्मीद खोना जिसके भरोसे सब कुछ वापस पा सकते हैं। दुर्घटना को भी अवसर बनाना सीखना है, गिरो तो कुछ उठाकर ही उठना है।
चरित्र
अगर हमारा मन कमजोर है तो हमें एक राई बराबर घटना पहाड़ जैसी लगने लगती है, अगर हमारा मन मजबूत है तो पहाड़ जैसी घटना भी राई बराबर नजर आती है।
मन
फैसला फासले से बेहतर होता है।
चरित्र
दुनिया विरोध करे तुम डरो नहीं क्योंकि लोग फल-फूल से लदे वृक्ष को ही पत्थर मारते हैं।
चरित्र
जो परिस्थितियों से सामंजस्य करना जानता है, प्रसन्नता परछाई की तरह उसका साथ देती है।
चरित्र