Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 75

संघे शक्तिः, कलौ युगे

40 सूत्र

प्रशंसा की ठण्डी आग वज्र को भी पिघला देती है।
वाणी
प्रशंसा का ठण्डा जल महाक्रोध की आग को भी बुझा देता है।
वाणी
प्रशंसा का भूखा व्यक्ति कभी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा सकता है, अकारण प्रशंसा उसे कमजोर बना देती है।
विनम्रता
प्रोत्साहित करना मृत में भी जीवन का संचार करना है, हतोत्साहित करना मरे को भी मारना है।
वाणी
भोगभूमि से कर्मभूमि के आने पर जीवों को षट्कर्म का उपदेश देकर कर्मयुग का प्रवर्तन कर विचलित प्राणियों को स्थिरता देने के कारण आदिनाथ प्रथम वंदनीय हैं।
भक्ति
सुखार्थी का प्राण भक्ति है, प्रार्थना करें प्रभो कलुषता से बचाओ।
भक्ति
प्रभु का स्मरण मोह सागर में डूबते हुए को सफल जहाज है।
भक्ति
भगवान् के गुणों में अनुराग करो, व्यवहार के काम तुम्हें शान्ति नहीं पहुँचायेंगे।
भक्ति
हे प्रभो! आप देना चाहते हैं तो मुझे कोई चाह उत्पन्न न हो क्योंकि स्वरूप से बढ़कर कुछ नहीं है।
भक्ति
जिसकी कुण्डली में मंगल हो, वह हमेशा नमः सिद्धेभ्यः का जाप करें।
णमोकार
जिनेन्द्र भगवान् के स्मरण मात्र से शोक, क्लेश, भय, शाकिनी, दरिद्रता, रोगादि नष्ट हो जाते हैं।
भक्ति
जो जीव णमोकार का पाठ प्रतिक्षण करता रहता है, उसका नियम से समाधिमरण होता है।
णमोकार
जो जन्म-मरण का भाजन न होने दे वह है भजन।
भक्ति
जैसे थोड़ी सी भी औषधि भयंकर रोग को शांत कर देती है और जैसे थोड़ा सा अमृत भी मृत्यु के भय को दूर कर देता है वैसे ही थोड़ी सी भी ईश्वर की स्तुति बहुत से पापों को शीघ्र ही नष्ट कर देती है।
भक्ति
उसकी जय कभी नहीं हो सकती जिसका दिल पवित्र नहीं है।
भक्ति
अनुशासन मात्र अपने जीवन को नहीं अपितु परिवार, समाज, देश व सम्पूर्ण विश्व को उज्ज्वल करता है।
संयम
अनुशासन के बिना न तो परिवार चल सकता है, न संस्था, न राष्ट्र, वास्तव में अनुशासन ही संगठन की कुंजी है और प्रगति की सीढ़ी है।
संयम
एकता से हमारा अस्तित्व कायम रहता है और विभाजन से हमारा पतन होता है।
संगति
आपको यदि संसार में सुखी रहना है तो समझौता करना सीख लो।
संगति
एकता रहित समाज बिना शक्कर की चाय के समान है।
संगति
शरीर-इन्द्रियाँ-मन-बुद्धि से अपना सम्बन्ध न रखना ही सच्चा एकान्त है।
अनासक्ति
दुनिया परिकल्पनाओं और विचारों से नहीं अपितु जनमत से चलती है।
विविध
जलती हुई लकड़ियाँ अलग होने पर धुँआ फेंकती हैं और एक साथ रहने पर प्रज्वलित हो उठती हैं ठीक इसी प्रकार जातिबंधु से फूट होने पर दुःख और एकता रहने पर सुख प्राप्त होता है।
संगति
यदि नौकर के साथ अच्छा व्यवहार किया जाए तो बदले में वे भी मालिक को आत्मीय प्यार दे सकते हैं।
संगति
अपने विचारों को अपना कारावास मत बनाओ।
मन
शान्ति को डंडे के बल पर स्थिर नहीं किया जा सकता, वह तो केवल पारस्परिक समझौते से ही लाई जा सकती है।
संगति
संगठन आधुनिक युग का एक कारगर हथियार है।
संगति
संगठन के द्वारा छोटे-से-छोटे लोग भी बड़े से बड़ों को मात दे सकते हैं।
संगति
निर्बलों को बलवान बनाना हो तो संगठन का मन्त्र फूँक दो।
संगति
यद्यपि शहद की मक्खियाँ कमजोर होती हैं, फिर भी वे सब मिलकर मधु निकालने वाले का प्राण तक ले लेती है, वैसे ही निर्बल पुरुष भी इकट्ठे होकर बलवान् शत्रु का नाश कर सकते हैं।
संगति
यदि कोई हजार रुपये का नोट दे तो सभी लेने को तैयार हो जाते हैं किन्तु यदि वह उस नोट के टुकड़े-टुकड़े कर दे और फिर दे तो कोई लेने को तैयार नहीं होता इसका अर्थ अखंड की कीमत है, अखंड में शक्ति है, अतः हम सभी को एक होकर रहना चाहिए।
संगति
तख्त पर नहीं, वक्त पर एकता की और संगठन की सक्त जरूरत होती है।
संगति
संगठन में शक्ति है, अतः अपने सच्चे साथी बनाइये।
संगति
संगठन, एकता वह शक्ति है, जिसके माध्यम से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
संगति
इस युग में संघ में ही शक्ति निहित है और संघ-निर्माण संस्थाओं को बनाकर ही किया जा सकता है।
संगति
दिल से दिल न मिले पर हाथ से हाथ मिलाते रहे तो समर्पण का मार्ग खुल सकता है।
संगति
उस जाति की स्थिति कितनी दयनीय है जो परस्पर वैमनस्य के कारण कई सम्प्रदायों में बँट चुकी है और हर सम्प्रदाय स्वयं को एक जाति मानने लगा है।
संगति
सम्प्रदाय और संगठन स्वयं को स्वयं से बाहर कर देते हैं।
संगति
सम्प्रदाय को मानने वाला कोई अपनी मान्यता नहीं बदलता है।
संगति
सामंजस्य कीजिए इसी से सुखों का स्वर्ग बनेगा।
संगति