Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 125

ताऊ ने तराशा- वेश्या के।

13 सूत्र

वात्सल्य से सफेद खून- माँ का बच्चे के प्रति इतना वात्सल्य होता है, कि उसके स्तन में दूध आ जाता है और तीर्थंङ्कर का तीनों लोकों के जीवों के प्रति वात्सल्य होता है इसलिये उनके पूरे शरीर में रक्त दूध जैसा होता है।
परिवार
भरत जी ने रामचन्द्र जी की खड़ाऊ सिंहासन पर रखकर राज्य किया था, किन्तु आज एक अङ्गुल जमीन के लिए भाई अपने ही भाई को हथकड़ी डलवा देता है।
परिवार
मत ठुकराओ गले लगाओ धर्म सिखाओ।
संगति
वही मनुष्य जगत का उपकार कर सकता है, जो अन्दर से निर्मल है।
चरित्र
विदेश में पशु सम्मेलन हुआ, सब जगह के पशु-पक्षी आये उनकी विशेषता बतलाई, बाद में भारतीय पशु-पक्षी को बताया, पिटारे में दो केंकड़े थे जो बाहर निकलना चाहते थे, लेकिन एक दूसरे की टाँग खींच कर गिरा देते थे, इसी तरह भारत के लोग किसी की भी उन्नति को देखकर उसे गिराना चाहते हैं।
चरित्र
अत्यन्त दुःखी को मधुर वाणी और वात्सल्य की जरूरत होती है।
वाणी
वात्सल्य से कठोर हृदय व्यक्ति भी मोम की तरह कोमल बन जाता है।
संगति
बराबरी वाला निन्दा या प्रशंसा करे तो ध्यान देना चाहिए।
विवेक
दुनिया कुछ अच्छी दिख रही है तो इसका श्रेय पढ़े लिखे लोगों को नहीं प्रसन्न लोगों को जाता है।
संतोष
स्नेह न मिलने पर मित्र खल बन जाते हैं जैसे सरसों से तैल निकल जाने पर खली बन जाती है।
संगति
प्रेम पूर्ण व्यवहार अमृत के समान एवं द्वेष पूर्ण व्यवहार विष के समान होता है।
संगति
जिस प्रकार उत्तम सेवक स्वामी के कार्य में सदा दासभाव रखता है उसी प्रकार सिद्ध प्रतिमा, जिनबिम्ब, जिनमन्दिर, शास्त्र और चतुर्विध सङ्घ में दासभाव अर्थात् किसी प्रकार की बाधा या आवश्यकता होने पर उसे दूर करना, ज्ञान से पर के दुःख दूर करना पर वात्सल्य है परीषह उपसर्ग से पीड़ित होकर शुभाचार ज्ञान-ध्यान में शिथिलता न लाना स्व वात्सल्य है।
भक्ति
फलटण में रहने वाले प्रतिमाधारी श्रावक के परिवार का लड़का दस साल से वेश्या के यहाँ रहता था, शादी के समय ताऊजी ने बुलाने का निर्णय किया, परिवार वालों ने आना-कानी की, फिर भी भाई पत्र देकर आया और बोला शादी में आना हो तो आ जाना, उसको गुस्सा आया तो मना कर दिया, अन्त में ताऊजी स्वयं वहाँ गये, नीचे खड़े होकर आवाज दी, लड़के की नींद खुली वहीं से झाँक कर देखा अरे! ताऊजी आये हैं, वह नीचे आया चरणों में माथा रखा, ताऊजी ने कहा! चलो बेटा घर में शादी है, उसने कहा ताऊजी! घर में सभी लोग तिरस्कार करेंगे, ताऊजी ने कहा बेटा! तुम्हारे विना शादी नहीं होगी और उसे घर ले आये, मन्दिर ले गए तिलक लगाया साथ में बैठकर भोजन कराया, शादी के बाद ताऊजी ने कहा! अब तुम जा सकते हो, तो वह चरणों में गिरकर रोने लगा, कि मैंने कुल को कलङ्कित किया, सबको कष्ट दिया, अब मुझे माफ़ करें, प्रायश्चित दें, उसने धीरे-धीरे व्रत धारण किये, मुनि बन गया, समाधि मरण किया, बोहरा गाँव में आज भी समाधि स्थल है, दर्शनार्थी आज भी दर्शन को जाते हैं।
धर्म