दो कदम पहले सूर्य अस्त– राजा ने एक गरीब को वरदान दिया कि जितनी दूर तुम दौड़ सको उतनी जमीन तुम्हारी होगी, लेकिन जहाँ से दौड़ शुरू करते हो, सूर्य अस्त के पहले लौट कर वहीं आना है, लौट के आया लेकिन दो कदम पहले ही जीवन का सूर्य अस्त हो गया। धन 0 – भेजें
राजा नीड़ासन ने देवी से वरदान माँगा, कि मैं जिसको छू लूँ वह सोने का हो जाय, वह जिसे छूता था वह सोने का हो जाता था, यहाँ तक स्थिति हो गयी कि खाने की सामग्री भी सोने की हो गयी, तब वह घबराया कि क्या खाएँ, अन्त में उसे वरदान वापस देना पड़ा तब शान्ति हुई। धन 0 – भेजें
लोभी भाई ने भाई की आँखें फोड़ी– दो सगे भाई थे, लेकिन गरीब थे, जङ्गल से लकड़ी लाते और बेच कर उदर पूर्ति करते थे, बड़ा भाई ईमानदार था, सरल था उसकी लकड़ी अच्छे दामों में जल्दी बिक जाती थी, लेकिन छोटे भाई को इससे बडा दुःख होता था, एक दिन उसने सोचा कि बड़े भाई को मार डाला जाय, तो फिर मेरी लकड़ी अच्छे दामों में बिकेगी। दूसरे दिन जङ्गल गये, भीषण गर्मी थी छोटे भाई ने कहा भैया पहले आपकी तूमड़ी का पानी खर्च कर लेते हैं, बाद में हम पिलाते रहेंगे। भैया तो भोला था, वह कुछ समझा नहीं और वैसा ही किया लकड़ी इकट्ठी करने के बाद भाई को प्यास लगी, पानी माँगा तो उसने कहा कि हम पहले आपकी एक आँख फोड़ेंगे तब पानी देंगे, बड़े भाई ने तो सोचा भी नहीं था कि ये ऐसा पाप भी कर सकता है, वह आँखें फोड़ कर चला गया, जिससे बड़े भाई को दिखना बन्द हो गया, अन्धा भाई जङ्गल में भटकते–भटकते मर गया। धन 0 – भेजें
विप्र का श्रीफल– एक ब्राह्मण को श्रीफल खरीदना था, दुकानदार ने उसका पाँच रुपया बताया, उसने पूँछा इससे कम में नहीं दोगे? दुकानदार ने आगे की दूकान में भेजा, वहाँ पर भी और कम में माँगने लगा, उसने कहा आप श्रीफल के बगीचे में चले जाये, वहाँ निःशुल्क मिल जायेगा, वह श्रीफल से लटक गया, ऊँट वाले से कहा! भैया हम तुम्हें पचास रूपये देगें हमें उतार लो, ऊँट खड़ा किया, उसको पकड़ा इतने में ऊँट आगे बढ़ गया। इसी तरह घोड़ा वाला आया, तो दोनों ने कहा हम दोनों पचास–पचास रुपये देंगे, हम लोगों को उतार लो, और वह भी लटक गया, अब दोनों ने विप्र से कहा, तुम अच्छे से पकड़े रहना, हम दोनों पाँच–पाँच सौ रूपये देंगे, अब विप्र नोटों की खुशी में भूल गया, और हाथ छूट गये तीनों गिरे और, काल के गाल में समा गये। धन 0 – भेजें