महावीरस्वामी पर उपसर्ग- महावीर भगवान् दीक्षा के बाद विहार करते हुये उज्जयिनी नगरी पँहुचे और वृक्ष के नीचे बैठकर तप करने लगे, वहाँ के लोगों ने समझा कि ये यहाँ की भूमि पर अधिकार करने आयें है, इसलिये लोगों ने उन पर घोर उपसर्ग किया, लेकिन उन्होंने अपने क्षमा भाव को नहीं त्यागा और केवलज्ञान को प्राप्त किया। क्षमा 0 – भेजें
गाँधी जी को गाली-एक अंग्रेज गाँधी जी से बहुत चिढ़ता था, उसने एक कागज में गाँधी जी के लिए गालियाँ लिखीं और गाँधी जी की टेबल पर रखकर चला गया, गाँधी जी ने जब खोला तो गुस्सा न करके, उसका पिन निकाल कर डिब्बे में रख लिया, और कागज को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। क्षमा 0 – भेजें
बनारसीदास जी ने रास्ते में पेशाब करदी चौकीदार ने दो-तीन थप्पड़ मार दिये अगले दिन उन्होंने नौकर की ईमानदारी की प्रशंसा करके उसका वेतन बढ़वा दिया। क्षमा 0 – भेजें
पार्श्वनाथ जी- कमठ का जीव पूर्व अवस्था में पार्श्वनाथ का भाई था, लेकिन क्षमा के अभाव में दस भव तक घोर उपसर्ग करता रहा, किन्तु पार्श्वनाथ जी ने क्षमा को नहीं छोड़ा और केवलज्ञान को प्राप्त किया था। क्षमा 0 – भेजें
बिच्छू का आतङ्क- नदी किनारे पर बैठे हुये एक साधु ने देखा कि नदी के तीव्र प्रवाह में एक बिच्छू बहता जा रहा है, उसे देखते ही हृदय में अनुकम्पा का प्रवाह हुआ तत्काल नदी में उतर गये, बिच्छू को हाथ में उठा लिया, उसने हाथ में डङ्क मार दिया, पीड़ा के कारण बिच्छू हाथ से छूट गया, पुनः उठाया पुनः उसने हाथ में डङ्क मार दिया, लोगों ने कहा जब वह आपको बार-बार डङ्क मार रहा है तो उसको बहने दो, साधक ने इस बात को सुनकर उत्तर दिया, जब वह अपना स्वभाव नहीं छोड़ रहा है तब हम उसे बचाने का स्वभाव कैसे छोड़ें ? अहिंसा 0 – भेजें
ईसामसीह को शूली- जब निरपराध ईसामसीह को लोगों ने शूली पर चढ़ाया तब उन्होंने कहा कि हे भगवन् ! ये अज्ञानि प्राणी नहीं समझते कि हम क्या कर रहे हैं और इसका फल क्या होगा? हे भगवन् ! इनका अपराध क्षमा हो। क्षमा 0 – भेजें
सौ बार गङ्गा स्नान- एक व्यक्ति का प्रतिदिन गङ्गा स्नान करने का नियम था, उसके क्षमा भाव और त्यागादि की बहुत चर्चा थी, उस नगर के पहलवान ने उस व्यक्ति की परीक्षा लेनी चाही, पहलवान का घर गङ्गा के रास्ते में था, व्यक्ति गङ्गा स्नान करके लौट रहा था, तब पहलवान ने उसके ऊपर पान का पीक थूक दिया, व्यक्ति विना कुछ कहे गङ्गा स्नान करने चला गया, पुन स्नान करके लौटा तो फिर थूक दिया, यह क्रम सौ बार चला, एक सौ एक वी बार व्यक्ति स्नान करके लौटा तब पहलवान उसके चरणों में गिरकर रोने लगा, अपनी गलती की क्षमा माँगी, व्यक्ति ने कहा ! भाई मैं तो आपका उपकार मानता हूँ, कि प्रतिदिन एक बार स्नान करता था आज आपकी वजह से एक सौ एक बार स्नान का अवसर मिला, अभी तक तन धोया था अब क्रोध न आने से मन भी धुल गया है। क्षमा 0 – भेजें