खुदा से खुद की पहचान- एक व्यसनी को पत्नि शिक्षा देती है कि तुम व्यसन छोड़ो भगवान् से नाता जोड़ो। एक बार वह बाहर जा रहा था, तब पत्नि ने एक भगवान् की मूर्ति दी और कहा अपने को जानों, वह रोज पूजा करता द्रव्य चढ़ाता था, चूहा द्रव्य को खा जाता था तो वह चूहे की पूजा करने लगा, एक दिन बिल्ली चूहे पर झपटी तो वह बिल्ली की पूजा करने लगा, एक दिन कुत्ता बिल्ली पर झपटा तो वह कुत्ते की पूजा करने लगा, एक दिन पत्नी ने कुत्ते को लाठी मारी तो वह पत्नी की पूजा करने लगा एक दिन उसे गुस्सा आया तो उसने पत्नी को मारा तो उसे लगा कि अरे श्रेष्ठ तो मैं ही हूँ, तब से उसे अपने आत्म तत्व की श्रेष्ठता मालूम हुई। ज्ञान 0 – भेजें
जैसे को तैसा- एक राजा लङ्गड़ा था, और अहङ्कारी भी था, एक बार राज दरबार में सूरदास जी भजन सुनाने आये, राजा ने पूँछा तुम्हारा नाम क्या है? उसने उत्तर दिया- दौलत! राजा ने व्यङ्ग किया- क्या दौलत भी अन्धी होती है? सूरदास जी ने कहा यदि अन्धी नहीं होती तो लङ्गड़े के पास क्यों आती, राजा का अहङ्कार चूर-चूर हो गया, अतः किसी को अपने से छोटा नहीं समझना चाहिए। विनम्रता 0 – भेजें
पिता पुत्र यात्रा पर निकले प्यासे बेटे से एक कदम भी चला नहीं जा रहा था, पिता ने धैर्य बँधाया बेटा सामने हवेली दिख रही है, वहाँ पानी अवश्य मिलेगा, किसी तरह वहाँ पहुँचे, पर प्याऊ पर कोई पानी पिलाने वाला नहीं था, बच्चा पानी-पानी चिल्ला रहा था, सेठ जी मस्ती से गद्दी पर बैठे हुए थे, पिता ने साहस करके सेठ जी से कहा सेठ जी पानी पिला दीजिये, सेठ जी ने कहा थोडा इन्तजार करो, पिता ने दुबारा निवेदन किया तो सेठ जी ने कहा अभी आदमी नहीं है, तब पिता ने कहा थोड़ी देर के लिए आप ही आदमी बन जाइए, संसार में सब कुछ है पर आदमियत (इंसानियत) की कमी है, अतः आदमी को पहले आदमियत प्राप्त करना चाहिए बाद में दूसरी चीजें। दान 0 – भेजें