Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 419

मृत्यु महोत्सव सबसे बड़ा उत्सव।

9 सूत्र

सज्जनों के मन में पहले बुढ़ापा आता है अर्थात् सज्जन बुढ़ापा आने के पहले ही विषयों से विरक्त हो जाते हैं और शरीर में बाद में, परन्तु दुर्जनों के शरीर में बुढ़ापा पहले आता है और मन में कभी नहीं आता है। दुर्जनों के शरीर में वृद्धावस्था आने के पहले ही बुढ़ापा आ जाता है पर वे विषयों से विरक्त होते ही नहीं हैं।
अनासक्ति
जिसका प्रतिकार न किया जा सके ऐसे उपसर्ग के आने पर, दुर्भिक्ष के पड़ने पर, वृद्धावस्था आने पर, धर्म के लिए शरीर का विसर्जन करना सल्लेखना कहलाती है।
समाधि
सफेद बाल रूपी दूत समस्त मनुष्यों के मस्तक पर आरूढ़ हो जोर-जोर से चिल्ला रहा है कि बुढ़ापा और मरण तुम्हारा अनादर कर रहे हैं अतः धर्म करो और पाप से विरक्त हो जाओ।
समाधि
सर्वज्ञ भगवान् समाधि मरण को तप का फल कहते हैं, इसलिए शक्ति के अनुसार समाधिमरण के लिए प्रयास करना चाहिये।
समाधि
मन, विवेक, आचार, कुलीनता, दृष्टि, लज्जा आदि समस्त गुण वृद्धावस्था में नष्ट हो जाते हैं।
समय
हे भगवन्! कल्पवृक्ष के समान फलदायी आपके श्री चरणों की सेवा में आज तक जो मेरा समय व्यतीत हुआ है, उससे जो पुण्य सञ्चित हुआ हो उसके बदले में मैं प्रार्थना करता हूँ कि अन्तिम समय में मेरा कण्ठ अवरुद्ध न हो आपका ही नाम निकले।
समाधि
जिसमें हड्डियों के टुकड़े पड़े हैं ऐसे चाण्डाल के कुंए को छोड़कर स्त्रियाँ जैसे दूर चली जाती हैं वैसे ही अनादर के अत्यधिक स्थानभूत पुरुषों के बालों की सफेदी को देख तरुण स्त्रियाँ शीघ्र ही दूर चली जाती हैं।
समय
शरीर सिकुड़ गया, गति नष्ट हो गई, दाँत गिर गये, दृष्टि चली गई, अन्धेरी बढ़ने लगी, मुख लार से भर गया, बाँधव जन कहा नहीं मानते और स्त्री सेवा नहीं करना चाहती, हाय बड़े कष्ट की बात है कि बुढ़ापे के कारण वृद्ध मनुष्य का पुत्र भी उसके शत्रु के समान हो जाता है।
समय
बुढ़ापा राजा, मन्त्री, वैद्य और तपस्वी साधुओं को अलङ्कृत करता है और वेश्या, पहलवान तथा गायक की प्रभुता को समाप्त कर देता है।
समय