Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 195

जुआरी, पुजारी, कमाऊ, अंधा- चार पूत।

1 सूत्र

जुआँरी, पुजारी, कमाऊ, अंधा चार पूत- एक सेठ के चार लड़के थे, उनमें बड़ा लड़का कमाऊ पूत था, दूसरा ज्वारी, तीसरा पुजारी और चौथा अंधा था, बड़े लड़के की पत्नि ने पति को भड़काया आप कमाते हो सब खाते हैं, हम लोग सभी अलग हो जाते हैं। यह बात पिताजी से कही, पिताजी ने कहा बेटा अलग होने के पहले हम लोग तीर्थ यात्रा कर लेते हैं, सब मिलकर तीर्थ को जाते हैं, पहुँचकर पिताजी ने क्रम-क्रम से बच्चों को दस-दस रुपये देकर रसोई की सामग्री लेने भेजा, बड़ा लड़का व्यापार करके दस के पन्द्रह कर लेता है, और सामग्री ले आता है, जुआरी जुआ खेल कर भाग्य से दस के बीस कर लेता है, और सामग्री ले आता है, तीसरा बेटा दस रूपए का दीपक लेता है और भगवान् की आरती करके कहता है आपको ही हमारी व्यवस्था बनाना है, तो वहाँ का रक्षक देव सोचता है धर्म के प्रति इतनी आस्था है यदि इसकी व्यवस्था नहीं बनायेंगे तो लोगो की धर्म के प्रति आस्था नहीं रहेगी, और वह देव गाड़ी भर सामान भेज देता है, सब बच्चे अपने-अपने पुरूषार्थ से रसोई का सामान लाते हैं, सबके भाग्य की परीक्षा आज होती है, तो बड़े लड़के का अहङ्कार चूर हो जाता है, कि सबसे बड़ा अभागा तो मैं ही हूँ।
विनम्रता