Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 163

गागर में सागर।

29 सूत्र

आप हाइवे पर सही तरफ कार चलाते हैं, कोई उल्टी तरफ से आकर टकरा जाता है तो भी दोनों का नुकसान होता है अतः टकराव को हर हाल में टालिए।
क्षमा
स्फटिक और पानी पर पदार्थ के संयोग से कुछ देर के लिए स्वभाव छोड़ देते है, उसी तरह आत्मा है अशुभ निमित्तों से कुछ देर के लिए अपना स्वभाव छोड़ देती है।
क्षमा
माँ-बाप दौलत दे सकते हैं पर योग्यता स्वयं प्राप्त करना पड़ती है।
पुरुषार्थ
रसोई बनाने वाले को, कवि को, वैद्य को, गायक को, हाथ में शस्त्र लिये हुए को, स्वामी को, धनी को, मूर्ख को और रहस्य के जानने वाले को कुपित नहीं करना चाहिए।
विवेक
महावीरस्वामी ने दुश्मन को नहीं दुश्मनी मिटाने को कहा है।
क्षमा
दुनिया परिवार को नहीं व्यवहार को चाहती है।
चरित्र
शान्ति, समता साधक पुरूषों का स्वभाविक धर्म है।
संयम
प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने विचार और व्यवहार को सम्भालना समर्थ और साधक पुरूष के लिए ही सम्भव है।
संयम
पानी कितना ही गर्म क्यों न हो जाय पर अन्त में ठण्डा होना ही पड़ता है।
क्षमा
तीन तरह के धर्मात्मा- 1. जैसे पत्थर पानी को ग्रहण नहीं करता वैसे ही कुछ लोग धर्म को ग्रहण नहीं करते हैं, 2. जैसे मिट्टीपर जब तक पानी डालो तब तक कोमल रहती है, वैसे ही कुछ लोग जब तक उपदेश सुनते हैं तब तक कोमल रहते हैं, 3.जैसे रुई पानी को समाहित करके रखती है वैसे ही कुछ लोग धर्म को समाहित करके रखते हैं।
धर्म
क्षमा करने के लिए शक्ति चाहिए, क्रोध तो कमजोरी की निशानी है, क्रोधी स्वभाव से यहीं नरक व क्षमा भाव से स्वर्ग बनता है।
क्षमा
मित्रों से नहीं शत्रुओं से माफी माँगना चाहिए।
क्षमा
जैसे चौराहे पर घर है तो धूल व शोर आदि के अनेक उपद्रव होंगे, उसी प्रकार संसार में हैं तो प्रतिकूलताएँ तो होंगी ही, अतः सहन करना चाहिए व क्षमा करना चाहिए।
क्षमा
गाली लेने-देने की वस्तु नहीं है अथवा गाली नहीं लेंगे तो किसके पास रहेगी ?
क्षमा
गाली सुनकर लोगों को गुस्सा आता है, पर अगर कोई पूँछे की आपको गाली कहाँ लगी, तो आप क्या उत्तर देंगे ? तथा सोचना चाहिए की मेरे पाप का उदय है, अन्यथा मुझे ही गाली क्यों दी दूसरो को क्यों नहीं दी ?
क्षमा
अभी तक मैंने जो साधना या अध्ययन किया है, सामने वाला गाली देकर मेरी परीक्षा कर रहा है, परीक्षा सौभाग्य से होती है अतः इस परीक्षा में मुझे उत्तीर्ण होना है।
क्षमा
हानि में लाभ देखें तो क्रोध नहीं होगा।
क्षमा
विजय क्रोध की नहीं क्षमा की होती है।
क्षमा
शीतल जल की स्थिति अधिक और गर्म जल की कम होती है, इसी प्रकार क्षमा देर तक रह सकती है क्रोध ज्यादा देर तक नहीं रह सकता है।
क्षमा
ठण्डा लोहा गरम लोहे को काटता है उसी प्रकार क्षमावान क्रोधी पर विजय प्राप्त करता है।
क्षमा
कोई पदार्थ इष्ट अनिष्ट नहीं तो गाली को अनिष्ट क्यों मानते हो।
क्षमा
असम्भव नाम को अलग कर दो, क्रोध को प्रयत्न पूर्वक जीतो।
क्षमा
पृथ्वी का नाम क्षमा है, वह मनुष्य के सारे अपराध क्षमा करती है, उसी प्रकार आत्मा का स्वभाव क्षमा है, उसे भी सभी के अपराध क्षमा करना चाहिए।
क्षमा
शिष्य और शीशी में डांट जरूरी है, पर बैर जरूरी नहीं है।
क्षमा
जैसे मेहमानों का तिरस्कार करने पर दोबारा नहीं आते हैं उसी प्रकार कषायों का तिरस्कार करने से वापस नहीं आती हैं।
क्षमा
गाँधी जी कहते थे कि जीवन में सफल बनना है, तो एक शत्रु अपने पास रखो, जिससे की आप हमेशा सावधान रहें।
क्षमा
कषायी को स्वयं के और दूसरों के अहित की चिन्ता नहीं होती, अतः कषाय से बचें।
क्षमा
बहुत से लोग ऐसे पाये जाते हैं कि वैसे तो मेरा स्वभाव एक दम शान्त है पर कोई छेड़ दे तो मुझसे शान्त नहीं रहा जाता, पर ऐसी शान्ति किस काम की जो क्रोध के निमित्त मिलने पर काम न आये ?
क्षमा
जिसकी हम प्रशंसा करें और उसे क्रोध आवे ऐसा कैसे हो सकता है ? प्रशंसा सुनकर तो लोगों को मान आता है, क्रोध नहीं। क्षमा का धारी तो वह है जिसे गाली सुनकर भी क्रोध न आये, जो गाली सुनकर चाँटा मारे वह काय की विकृति है। जो गाली सुनकर गाली देवे वह वचन की विकृति है। जो गाली सुनकर मन में खेद लावे वह मन की विकृति है।
क्षमा