Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 9

जामुन खाली है गुठली फेंक दी।

8 सूत्र

मेले में बेटा गुम गया, पुलिस ने मेन गेट पर खड़ा कर दिया, अब जिस प्रकार बेटे को माँ को ढूँढ़ने की ललक है, हमें आत्मा को ढूँढ़ने की ललक होनी चाहिए अन्यथा जीवन की शाम में क्या होगा?
विवेक
मोहल्ले वाले बहकाते हैं पर पुरुषार्थ से लड़की की शादी होकर रहती है, उसी प्रकार आत्महित में विघ्न आते हैं लेकिन पुरुषार्थ से कार्य सिद्धि होकर रहती है, अत: दूसरे से राग-द्वेष नहीं करना चाहिए।
पुरुषार्थ
श्रुतकेवली के बाद जो आचार्य हुये हैं वे अरातीय आचार्य कहलाते हैं।
ज्ञान
गणधरादि हमारे लिये पत्र लिख गये कि स्त्री-पुत्रादि सब पराये हैं, हमने पत्र की पूजा तो की पर खोल कर देखा ही नहीं।
अनासक्ति
पहली मूर्ति एक कान से सुनती और दूसरे कान से निकाल देती थी, दूसरी मूर्ति कान से सुनती और देखकर मौन हो जाती, तीसरी मूर्ति कान से सुनती और मुँह से बता देती, चैथी मूर्ति कान से सुनती और ह्रदय में धारण कर लेती, इसलिए उनकी कीमत क्रमश: एक-दो-तीन-चार हजार थी, हम कौन सी और कितनी कीमत की मूर्ति हैं स्वयं पहचाने।
विवेक
विदेह क्षेत्र में सीमन्धर भगवान का गर्भ व जन्म कल्याणक कुन्थुनाथ भगवान के समय हुआ, केवलज्ञान कल्याणक मुनिसुव्रत भगवान के समय हुआ, और भविष्य के सातवें तीर्थंङ्कर के काल में मोक्ष जायेंगे, उनकी आयु एक कोटीवर्ष पूर्व की है।
विविध
बच्चे को गुलाबजामुन में रखकर दवा खिलाने की कोशिश की, माँ ने कहा बेटागुलाब जामुन खा लेना, मैं आ रही हूँ, और आकर पूछा! बेटा गुलाब जामुन खा ली? बच्चा बोला हाँ माँ गुलाबजामुन खा ली, गुठली बाहर थूक दी, उसी प्रकार लोग ख्याति पूजा लाभ की गुलाबजामुन खा लेते हैं, तत्त्वाभ्यास की गुठली थूक देते हैं।
विवेक
सेठ ने दो विद्वानों को प्रवचनार्थ बुलाया और अलग-अलग एक-दूसरे का परिचय पूछा, एक ने कहा वह पक्का बैल है, दूसरे ने कहा वह पक्का गधा है, सेठजी ने भोजन के समय दोनों को घास-भूसा का भोजन परोस दिया, विद्वानों के पूँछने पर सेठजी ने कहा! आप लोगों ने जैसा परिचय दिया वैसा हमने भोजन परोस दिया, दोनों विद्वान् लज्जा से नतमस्तक हो गए और ईर्ष्या छोड़ दी।
विनम्रता