Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 81

याचना नहीं अर्चना करो

20 सूत्र

बहुत-सा विचार थोड़े शब्दों में व्यक्त करना एक महती कला है।
वाणी
जो वाचाल नहीं है, वह मिथ्या नहीं बोलता है।
सत्य
झूठे आरोपों का सर्वोत्तम उत्तर मौन है।
वाणी
छोटे लोगों के गुण का वर्णन करने वाला अन्य कोई नहीं मिलता है अतएव वह स्वयं ही उसे कहता है अर्थात् स्वगुण वर्णन करने वाला छोटा होता है।
विनम्रता
वार्तालाप से बुद्धि विकसित होती है किन्तु प्रतिभा की पाठशाला तो एकान्त ही है।
ज्ञान
बहुत बोलने वाला कदाचित् ही अपने कहे का पालन करता है।
वाणी
महाकुलों में जन्में जनों का पारस्परिक विरोध धर्मोपदेश के अधिकारी गुरुजनों के वचनों से शान्त हो जाया करता है।
धर्म
आँकड़ों की अपेक्षा तथ्य अधिक जोर से बोलते हैं।
वाणी
कड़ी बात भी हँसकर कही जाये तो मीठी हो जाती है।
वाणी
दूसरों के अप्रिय वचन सुनकर भी उत्तम व्यक्ति सदाप्रिय वाणी ही बोलते हैं।
वाणी
मीठे बोल से ही बदले में मीठा व्यवहार मिलता है।
वाणी
मीठे शब्दों के रहते हुए भी जो मनुष्य कड़वे शब्दों का प्रयोग करता है, वह मानों पके फलों को छोड़कर कच्चे फल खाता है।
वाणी
यदि समस्त प्रजा की पहुँच राजा तक हो और राजा कभी कठोर वचन न बोले, तो उसका राज्य सबसे अपार रहेगा।
वाणी
जो वाक् कला मित्रों को और भी घनिष्ठता के सूत्र में आबद्ध करती है तथा विरोधियों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है, बस वही यथार्थ वक्तृता है।
वाणी
जो आदमी सुवक्ता है और गड़बड़ाना या डरना नहीं जानता है विवाद में उसको हरा देना किसी के लिए संभव नहीं है।
वाणी
जिसकी वक्तृता परिमार्जित और विश्वासोत्पादक भाषा में सुसज्जित होती है, सारी पृथ्वी उसके संकेत पर नाचती है।
वाणी
जो लोग अपने मन की बात थोड़े से चुने हुए शब्दों में कहना जानते है वास्तव में उनको अधिक बोलने की आदत नहीं होती है।
वाणी
वक्ता बुद्धिमान श्रोताओं के समक्ष भाषण देने में किसी प्रकार की चूक नहीं करते हैं।
वाणी
तर्क शास्त्र को तुम भली-भाँति सीख लो, जिससे कि मानव समुदाय के सामने बिना भयातुर हुए बोल सको।
ज्ञान
अगर सेवक सुख चाहें, भिखारी मान चाहें, व्यसनी धन की इच्छा करें, व्यभिचारी शुभ गति चाहें, लोभी यश चाहें तो समझो कि ये लोग आकाश से दूध दुहना चाह रहे हैं।
संतोष