Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 10

अहिंसा

40 सूत्र

सारे पुण्यों और सद्गुणों की जड़ 'सत्य' है।
सत्य
समय मूल्यवान अवश्य है किन्तु सत्य समय से भी अधिक मूल्यवान है।
सत्य
जो युवा पुरुष सब बातों में दूसरों का सहारा चाहते हैं, जो सदा एक न एक नया अगुआ ढूँढ़ा करते हैं और उनके अनुयायी बना करते है, वे आत्म संस्कार के कार्य में उन्नति नहीं कर सकते हैं।
पुरुषार्थ
मन को वश में करने के लिए अध्यात्म विद्या का ज्ञान, सत्संग, वासनाओं का भलीभाँति परित्याग तथा प्राणायाम ये प्रबल उपाय हैं।
मन
वास्तविक सौन्दर्य हृदय की पवित्रता में है।
चरित्र
यह जिन्दगी हँसते-खेलते हुए जीने के लिए है, चिंता, भय, शोक, निराशा, ईर्ष्या, तृष्णा व वासना में बिलखते रहना मूर्खता है।
मन
अपना हृदय पवित्र रखो, धर्म का समस्त सार इसी उपदेश में समाया है शेष कथन सब इसी का विस्तार है।
धर्म
यदि किसी को अपनी आत्मा से प्रेम है, तो उसे पाप की ओर किंचित् भी नहीं झुकना चाहिए
चरित्र
यह बुद्धि ही है जो इन्द्रियों को इधर-उधर भटकने से रोकती है उन्हें बुराई से दूर रखती है और शुभ कर्म की ओर प्रेरित करती है।
विवेक
जब तुम्हारी आत्मा अहंकार और क्रोध से मोहित होने को हो, तब मस्तक में उनका स्मरण रखो, जो लापरवाही और असावधानी से नष्ट हो गये हैं।
क्षमा
गुप्तचरों और दूतों को चाहिए कि वे साधु-सन्तों का वेश धारण करें और खोजकर सच्चा भेद निकाल लें किन्तु चाहे कुछ भी हो जाए, वे अपना भेद न बतावें।
विवेक
अरे! यह खाल क्या ऐसी अमूल्य वस्तु है, जो अपनी प्रतिष्ठा बेचकर भी इसे बचाये रखना चाहते हो?
अनासक्ति
रमणी के सतीत्व की तरह महत्त्व की रक्षा भी केवल अन्तरात्मा की शुद्धि से ही की जा सकती है।
चरित्र
सन्त लोगों का धर्म है–'अहिंसा' परन्तु योग्य पुरुषों का धर्म है 'परनिन्दा' से परहेज करना।
वाणी
करुणा से आर्द्र हृदय वाले व्यक्ति सभी के निःस्वार्थ बंधु होते हैं।
अहिंसा
जो पर की करुणामयी आवाज नहीं सुन सकता, प्रभु भी उसकी भक्ति की आवाज कैसे सुन सकते हैं?
अहिंसा
पाप का फल पेड़ा नहीं पीड़ा है।
कर्म
दुःख भोगने वाला तो आगे सुखी हो सकता है, पर दुःख देने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता है।
अहिंसा
एक आह सारे संसार में खलबली मचा सकती है, अतः किसी के भी दिल को मत दुःखाओ।
अहिंसा
अहिंसा की साधना से बढ़कर श्रेष्ठ दूसरी कोई साधना नहीं है।
अहिंसा
जैन दर्शन के सम्पूर्ण सिद्धान्त अहिंसा की नींव पर खड़े हैं।
अहिंसा
अहिंसा और कायरता पूर्ण रूप से परस्पर विरोधी है।
अहिंसा
अदालत द्रव्य हिंसा पकड़ती है तथा अध्यात्म द्रव्य व भाव दोनों प्रकार की हिंसा को पकड़ता है। हम दूसरों को बचायेंगे तो दूसरा हमें बचायेगा।
अहिंसा
अहिंसा परम धर्म है। अहिंसा परम तप है। अहिंसा परम ज्ञान है। अहिंसा परम पद है।
अहिंसा
अहिंसा सब धर्मों में श्रेष्ठ है, हिंसा के पीछे हर तरह का पाप लगा रहता है।
अहिंसा
सत्य और अहिंसा से तुम संसार को अपने सम्मुख झुका सकते हो।
अहिंसा
किसी को इतना मत सताओ कि वह आँसुओं का बदला खून से ले।
अहिंसा
जिनके करुणा के द्वार बंद हैं उनके लिए परमात्मा का द्वार भी बन्द है।
अहिंसा
भिखारी बनकर जीवन व्यतीत करना श्रेष्ठ है लेकिन शिकारी बनकर जीवन व्यतीत करना निकृष्ट है।
अहिंसा
जिसके जीने से लोग जीवित रहें इस संसार में वास्तव में वही जीता हैं।
अहिंसा
जिसका मन दया से द्रवीभूत रहता है उसी को ज्ञान और मोक्ष प्राप्त होता है।
अहिंसा
दया से लबालब भरा हुआ दिल ही सबसे बड़ी दौलत है क्योंकि दौलत तो हर किसी के पास देखी जाती है।
अहिंसा
दया से हीन धर्म पाखंड है।
अहिंसा
दूसरों को दुःख देकर कोई हमेशा सुख प्राप्त नहीं कर सकता।
अहिंसा
उठते-बैठते, सोते-जागते हर क्षण प्रभु से एक प्रार्थना अवश्य करना कि–हे भगवन्! मुझे हजारों कष्ट भले ही सहन करने पड़ें पर मेरे द्वारा किसी को एक भी कष्ट न मिलें।
अहिंसा
दुष्ट को मारने से दुष्टता नहीं मरती।
अहिंसा
जो धर्म अहिंसा की कसौटी पर खरा उतरे वही सच्चा धर्म है।
अहिंसा
नौकर के साथ घर के सदस्यों जैसा व्यवहार होना चाहिए।
अहिंसा
पानी छानकर पीने वाले दहेज के लिए जीवित बहु-बेटियों का खून पी रहे हैं। धूप जलाने में हिंसा देखने वाले अब दहेज के लिए बहु-बेटियों को जला रहे हैं, प्याज से पेट न भरने वाले गरीबों का पेट काटकर ब्याज से पेटी भर रहे हैं।
अहिंसा
मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है।
अहिंसा