Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 251

श्रावक के सत्रह नियम।

19 सूत्र

नाटक के पहले महीनों अभ्यास करते हैं तब थोड़ी देर के लिए रंगमंच पर सफल होते हैं, उसी प्रकार इन्द्रिय और कषाय को जीतने का अभ्यास कई भवों में करना पड़ता है तब सफलता (मुक्ति) मिलती है।
पुरुषार्थ
प्रतिदिन बोधि दुर्लभ भावना का चिन्तन करना चाहिए, 'दुर्लभ है निगोद से थावर' इत्यादि।
ध्यान
मूर्ति बनाते समय शिल्पी पहले मोटे-मोटे पत्थर को अलग करता है, बाद में छोटी हथौड़ी से छोटे-छोटे पत्थर अलग करता है, उसी प्रकार पहले मोटे-मोटे अशुभराग को त्यागना चाहिए फिर सूक्ष्म अशुभराग का त्याग करना चाहिए।
अनासक्ति
पाँचमार्ग हैं- 1.मोक्ष मार्ग, 2.नरकमार्ग, 3.तिर्यञ्चमार्ग, 4.मनुष्यमार्ग, 5.देवमार्ग मनुष्य पर्याय जंक्शन हैं, यहाँ से चौरासी लाख योनियों के द्वार खुलते हैं।
कर्म
सोना-चाँदी की मिली हुई अवस्था की तरह शरीर और आत्मा की अवस्था है।
ज्ञान
विदेश में गाँधीजी को सूट पहनने को, मांस सेवन को, शराब पीने को लोगों ने बहुत आग्रह किया, लेकिन गाँधीजी ने अपने नियम को नही तोड़ा।
चरित्र
लक्ष्य एक साथ बनाया जाता है प्राप्त क्रम से किया जाता है।
पुरुषार्थ
अष्टमी चतुर्दशी आदि पर्व हरी भक्षण के नहीं हरि भजन के दिन हैं।
आहार
छोटा सा नाला भी जब विना घाट के पार नहीं कर सकते, तब संसार-सागर पार करने के लिए मनुष्य जन्म रूपी घाट व जैन धर्म रूपी नौका आवश्यक है।
धर्म
संयम की वृद्धि स्वाध्याय एवं वैराग्य से होती है।
संयम
सम्यग्दर्शन चारों गतियों में हो सकता है पर मुनि दीक्षा मनुष्य पर्याय में ही होती है।
धर्म
संसार की सभी वस्तुएँ नश्वर हैं।
अनासक्ति
इन्द्रियाँ धोखेबाज हैं साधक को साधना के मार्ग में सदा सावधान रहना चाहिए।
संयम
दूसरों को हमारे माध्यम से व्यवधान न हो यह भावना भी अहिंसा है।
अहिंसा
आज का पुरूषार्थ कल भाग्य बन जाता है।
पुरुषार्थ
जिव्हा किसी को नहीं रखती, सरस को भीतर नीरस को बाहर कर देती है।
आहार
आसक्ति रहित होकर भोजन करना ही गृहस्थ की भोजन शुद्धि है।
आहार
छब्बीस दिन डनलप के गद्दे पर तो चार दिन चटाई पर भी सोने का अभ्यास करो।
संयम
श्रावक के सत्रह नियम-1. कुगुरू, 2. कुदेव, 3. कुधर्म की सेवा, 4. अनर्थदण्ड, 5. पापयुक्त व्यापार, 6. जुआ, 7. मांस, 8. शहद, 9. वेश्या, 10. चोरी, 11. परस्त्री, 12.हिंसा के उपकरणों का दान, 13. शिकार, 14. स्थूल-त्रस की हिंसा, 15. असत्य वचन, 16.विना छना जल, 17. रात्रिभोजन, इन सत्रह चीजों का जीवन पर्यन्त के लिए त्याग करना चाहिए।
धर्म