पञ्चमकाल में उनञ्चास विपरीतताएँ- 1.राजा-लोभी, 2.मित्र-विश्वासघाती, 3.पुत्र-अर्थलोभी, 4.नारी-दुश्चरित्र, 5.भाईबन्धु-विपरीत, 6.मन्त्री-असन्तुष्ट, 7.विद्वान-धनहीन, 8.पापीलोग-सुखी, 9.कुदेवों की पूजा, 10.पति-क्रोधी, 11.नगरी-प्रजाहीन, 12.देह-व्याधि पीड़ित, 13.गँवार-सर्वकलावान, 14.कायर-सुभट, 15.क्षमावान-निर्दयी, 16.शूद्र-बलवान, 17.अकाल मृत्यु, 18.मूर्ख-अहङ्कारी, 19.स्नेही-दुर्जन, 20.वैश्य-कपटी, 21.राजा-नीच, 22.सज्जन-विरोधी, 23.राजा-स्व स्थान हीन, 24.वर्षा-अल्प, 25.मनुष्य-वचनहीन, 26.मन्त्री-बुद्धिहीन, 27.तापसी-दया हीन, 28.भट्टारक-तामसी, 29.वृक्ष-फल रहित, 30.कुंवारी कन्या-चञ्चल, 31.दासी-आज्ञाहीन, 32.राजपुत्र-विवेकहीन, 33.शूद्र-विवेकी, 34.किसान-दुःखी, 35.पुरूषार्थ-हीन-सुखी, 36.अकाल, 37.विपरीत ऋतुयें, 38.स्वप्रशंसा, 39.परनिन्दा, 40.वेश्या-लज्जालु, 41.राजा-गजहीन, 42.अशुद्धपाठ, 43.लोभी-विप्र, 44.माता-कुटिल, 45.कुटिलता पूर्ण दया, 46.अनङ्ग क्रीड़ा, 47.उच्चकुलीन-निर्लज्ज, 48.भीलों के गाँव में व्यापार और 49.नीच जाति के लोग भजन गायेंगे। समय 0 – भेजें
पञ्चम काल में मनुष्य में बीस दोष- 1.कुण्ठित, 2.लोभी, 3.क्रोधी, 4.कृतघ्न, 5.पापिष्ट, 6.दुष्ट, 7.रूखे, 8.क्रूर, 9.जड़, 10.मूर्ख, 11.मर्यादा रहित, 12.अधार्मिक, 13.हिंसा, 14.चोरी, 15.असत्यवादी, 16.कातर, 17.परनिन्दक, 18.चुगलखोर, 19.मानी और 20.धूर्त। समय 0 – भेजें
मनुष्य कृश, रोगाक्रान्त, बाधाओं से युक्त, इस काल में ईति-भीति, चोरों का भय रहेगा, पृथ्वी रूखी रहेगी, व्याधों द्वारा नारी हरण, सर्प, कीड़े, मृगादि का भय होगा। समय 0 – भेजें
विना लक्ष्य के फेंके गये तीर व्यर्थ हो जाते हैं एवं शक्ति और समय का दुरुपयोग होता है। पुरुषार्थ 0 – भेजें