बालक का पवित्र हृदय– कौशाम्बी नगरी के राजा जयपाल के राज्य में समुद्रदत्त सेठ और समुद्रदत्ता सेठानी रहती थी, उनका सागरदत्त नाम का एक सुन्दर बालक था, पास में गोपायन दरिद्री पड़ोसी था, उसका सोमक नाम का एक पुत्र था, जो सागरदत्त के साथ हमेशा खेला करता था, एक दिन स्वर्णाभूषणों से युक्त सागरदत्त को देखकर गोपायन ने सागरदत्त को मारकर घर में गाड़ दिया, सेठ सेठानी पुत्र वियोग से बड़े दुःखी हुए, एक दिन सेठानी ने सोमक से पूँछा! बेटा तुम्हारा मित्र सागरदत्त कहाँ है, उसने कहा! हमारे घर में गड़ा है, सेठानी सुनकर मूर्च्छित हो गयी, जाकर देखा तो सागरदत्त का शव मिला, तब गोपायन को मृत्यु दण्ड मिला। मरकर नरक गया। धन 0 – भेजें
एक लाख का नाम सुनते ही डॉक्टर को अटैक– एक नगर में धनी सेठ को बीमार देखकर डॉक्टर ने सोचा पैसा निकालने का मौका अच्छा है। डॉक्टर ने कहा सेठ जी यहाँ ठीक नहीं हो सकते, लड़के ने पचास हजार रूपये दिए, डॉक्टर ने कहा इतने में काम नहीं होगा तो उसने पचास हजार और दिये, एक लाख आते देख डॉक्टर को अटैक आ गया, डॉक्टर मर गया सेठ ठीक हो गया। धन 0 – भेजें
जवानी का लोभ– लड़का गड्ढे में गिर गया, निकलते नहीं बन रहा था, एक बुड्ढे से कहा कि इस गड्ढे का बड़ा चमत्कार है, जो यहाँ आता है वह जवान हो जाता है, बुड्ढा कूद गया, लड़का उसके कन्धे पर बैठकर बाहर आ गया और बोला आप जवान होते रहिए, इसी तरह ज्ञानी संसार की दशा देखकर निकलता है और अज्ञानी संसार रूपी गड्ढे में पड़ जाता है। अनासक्ति 0 – भेजें
भोपाल के चाचा भतीजे– सुन्दर का भतीजा पवन था, जिसकी दुकान अच्छी चलती थी, जिससे दुःखी होकर उसने किराये के गुण्डों से भतीजे को मरवा डाला, और स्वयं जेल में सड़–सड़ कर मर गया। धन 0 – भेजें
ईमानदारी की मिसाल– एक व्यक्ति घर बेंचकर अन्य स्थान पर रहने के लिए चला गया, जिसने घर खरीदा था उसे उसी घर में धन मिला, लौटाने आया तो उस व्यक्ति ने कहा अब हमने घर बेंच दिया, हमारे भाग्य में होता, तो हम इतने बरस से यहाँ रह रहे थे, पहले क्यों नहीं मिला, राजा के पास न्याय गया, उसी समय सिकन्दर आया था, वह देखकर सोचने लगा अरे भारत में इतने ईमानदार लोग रहते हैं? चरित्र 0 – भेजें