Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 226

असत्य का व्यापार जीवन की हार।

13 सूत्र

पाँच प्रकार की परीक्षा– 1.अग्नि में प्रवेश करना, 2.तराजू पर तुलना, 3.काल कूट जहर खाना, 4.जल में डूबना, 5.गर्म लोहे का गोला हाथ में लेना, ये सत्यता की परीक्षा के लिए होती हैं।
सत्य
सात मील चलने के बराबर एकघण्टे बोलने में शक्ति का व्यय होता है।
वाणी
मौन रहो तो मूरख कहते, बोलो तो वाचाल। नहीं बोलो तो गूँगा कहते, ये दुनिया का हाल।।
वाणी
जन्म के साथ जीभ तो मिल जाती है पर जीवन बीत जाने पर भी उसका सदुपयोग करने की कला नहीं आ पाती है।
वाणी
हम लाख अपने भावों को दबाने का प्रयास करें, पर वे किसी न किसी वातायन से बाहर झांक ही लेते हैं।
मन
हमारी आखों के तेज को हमारे बुरे विचारों की हवा हर लेती हैं।
मन
मर्म घातक एक वाक्य ही सारे उपकार को नष्ट कर देता है।
वाणी
जैसे जल रहित नदी अशोभनीय लगती है, उसी तरह सत्य रहित व्यक्ति भी अशोभनीय लगता है।
सत्य
अन्धों के अन्धे होते हैं, इतना बोलने से महाभारत हो गया, अतः हर शब्द सोच कर बोलना चाहिए।
वाणी
जो छेदन, भेदन, मारण, शोषणयुक्त व्यापार या चोरी आदि के वचन हैं वे सब पाप युक्त वचन हैं।
वाणी
एक बार का असत्य अनेक बार के सत्य को झूठ कर देता है, फिर लोग विश्वास नहीं करते हैं।
सत्य
जो वचन दूसरे जीवों को अप्रीति, भय, खेद, वैर, शोक तथा कलह कारक एवं अन्य भी सन्ताप कारक हों वे सभी अप्रिय वचन जानना चाहिए। ये सभी प्रकार के वचन असत्य के अन्तर्गत आते हैं इन वचनों को नहीं बोलना चाहिए।
वाणी
झूठ का दुराग्रह करने वालों को दीर्घकाल तक अपयश और दुर्गति ये दो चीजें सुलभ हैं।
सत्य