Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 32

सत्संगति की महिमा।

18 सूत्र

समस्त रत्नों का खजाना, कल्याण व सम्पदा का कारण, एवं सबकी उन्नति का मूल गुणवानों की सङ्गति मानी गई है।
संगति
यह हमारा है, यह पराया है ऐसी मान्यता छोटे मन वालों की होती है, किन्तु उदार चरित्र वालों के लिए तो सारी पृथ्वी ही कुटुम्ब होती है।
संगति
साधुओं का दर्शन पुण्य वर्धक है क्योंकि साधु तीर्थ स्वरूप होते हैं, तीर्थ काल पाकर फलदायी होता है किन्तु साधु समागम तत्काल फलदायी होता है।
संगति
दुर्जनों की सङ्गति से साधु जनों में भी दोष आ जाते है जैसे कि रावण के सीता हरण करने पर समुद्र को भी बन्धन प्राप्त हुआ था।
संगति
थोड़ी भी दुर्जनों की सङ्गति महान सद्गुणों का नाश करती है जैसे कि छाछ के संयोग से दूध अपना स्वभाव छोड़ देता है।
संगति
पुष्पों की सङ्गति से कीड़ा भी सज्जनों के सिर पर चढ़ जाता है और महापुरुषों के द्वारा प्रतिष्ठित होकर पत्थर भी देवत्व को प्राप्त हो जाता है।
संगति
गुण गुणवानों को पाकर गुणी हो जाते हैं और गुणहीन को पाकर दोष रूप परिणमन कर जाते हैं जैसे कि मीठे जल वाली नदियाँ समुद्र में मिलकर खारी हो जाती हैं।
संगति
नीच लोगों की सङ्गति करने से मति हीन हो जाती है, बराबरी वालों की सङ्गति से मति बराबर रहती है और विशिष्ट लोगों की सङ्गति करने से मति विशिष्ट हो जाती है।
संगति
दुर्जनों के साथ मित्रता और प्रीति दोनों ही नहीं करनी चाहिये क्योंकि अङ्गार गरम होता है तो जलाता है और ठण्डा होता है तो हाथ काला करता है।
संगति
लोक में चन्दन शीतल है, चन्दन से भी शीतल चन्द्रमा है, चन्दन और चन्द्रमा से भी शीतल साधु सङ्गति है।
संगति
चित्त मिले तो चेला कीजे, मित्र मिले तो मेला। साधु मिले तो सङ्गति कीजे, न तो सबसे भला अकेला।।
संगति
सङ्गत कीजे साधु की, ज्यो गन्धी को वास। जो गन्धी कुछ दे नहीं, तो भी वास सुवास।।
संगति
क्रोधी लोभी कामी मदी, चार सूझते अन्ध। इनकी सङ्गति छोड़िये, नहीं कीजे सम्बन्ध।।
संगति
खोटी सङ्गति कटुवचन, अरु पर तिय सों नेह। कारण बने विनाश के, नशे धरम-धन-देह।।
संगति
ज्ञान बढ़े गुणवान की संगति, ध्यान बढ़े तपसी संग कीने। मोह बढ़े परिवार की संगति, लोभ बढ़े धन में चित दिने। क्रोध बढ़े नर मूढ़ की संगति, काम बढ़े तिय को संग कीने। बुद्धि विवेक विचार बढ़े, कवि दीन सो सज्जन संगति कीजे॥
संगति
सौ भोगी एक बालक के हृदय का परिवर्तन नहीं कर सकते, किन्तु एक योगी हजारों लोगों के हृदय का परिवर्तन कर देता है।
संगति
सत्सङ्ग में और शमशान में शान्ति मिलती है।
संगति
निकट में आये हुए मनोरञ्जक विषयों से भी जिनका धैर्य स्खलित नहीं होता है, वे ही विद्वानों के द्वारा गुणवान माने जाते हैं।
संयम