Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 10

विद्वान और विद्यार्थी का कर्त्तव्य।

5 सूत्र

शिक्षक के योग्य शिक्षा- व्यवस्थित वैज्ञानिक विधि और उस विषय सम्बन्धी कार्य कुशलता शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक को आवश्यक है।
ज्ञान
तत्त्वज्ञान की जिज्ञासा उत्पन्न करना, उसका ज्ञान कराना और सदाचार मय जीवन होना जैसे- पञ्चतन्त्र में एक राजा के पाँच सौ मूर्ख लड़के थे, राजा ने घोषणा करा दी कि जो मेरे बेटों को विद्वान बनायेगा, उसे आधा राज्य और कन्या दी जायेगी 'विष्णुशर्मा' ने बच्चों को 'काव्य शास्त्र विनोदेन' इस कहानी के वाक्य से पढ़ाना शुरू किया, उसी प्रकार शिक्षक कहानी से पढ़ाना शुरू करे।
ज्ञान
शिक्षक जिस विषय को पढ़ाता है, उस पर पूरी मास्टरी होना चाहिये, कुञ्जी में देखकर पढ़ाने से विद्यार्थी गुरू नहीं बन सकते, कुञ्जी देखने की अपेक्षा दो घण्टे पहले अच्छी तैयारी कर लो, वहाँ देखोगे तो आँख छिपाना पड़ेगी चोरी और मायाचारी का दोष लगेगा।
ज्ञान
एक राजा की चोरी हो गयी, मन्त्री को एक सेठ पर द्वेष के कारण शक था, मन्त्री ने कहा इसने चोरी की होगी, निर्णय हुआ कि चोर के हाथ में अग्नि का गोला दिया जाय जो जलेगा वह चोर कहलायेगा, सेठ के सामने बड़ी विपत्ति आ गयी, अग्नि में तो सब जलेंगे चाहे चोर हो या साहूकार, किसी ने सलाह दी तुम हाथ में काठ रखलेना वह कुछ कहे तो कहना तुम हाथ से दो तो मैं हाथ में लूँगा, तुम सण्डासी से दोगे तो मैं काठ पर लूँगा, इसी तरह शिक्षक जैसा पढ़ायेगा विद्यार्थी वैसा ही बनेगा, क्योंकि विद्यार्थी शिक्षक का आचरण सीखता है।
ज्ञान
समझना ज्ञान है समझाना कला है।
ज्ञान