Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 157

क्रोध पर विजय पाने का फार्मूला।

30 सूत्र

क्रोध छोड़ने के लिए सभी लोगों को यह अवधारणा पक्की करनी चाहिए, कि मुझमें यह एक बड़ा दोष है।
क्षमा
इसका कारण या हेतु मैं स्वयं हूँ, अन्य किसी का दोष मुझे विचलित नहीं कर सकता है।
क्षमा
अत: 'हर हाल में छोड़ना है' ऐसा लक्ष्य बनाना चाहिए।
क्षमा
क्रोध को छोड़ना मुश्किल है, क्योंकि लोग लम्बे समय से पाले हुए हैं।
क्षमा
पर क्रोध छोड़ना असम्भव नहीं है, सङ्कल्प एवं अभ्यास से क्रोध पर काबू पाया जा सकता है।
क्षमा
जिस प्रकार परीक्षा पास करने, मकान बनाने, गृहस्थी चलाने, बच्चों को पढ़ाने, शादी करने आदि के लिए प्रयत्न करना पड़ता है, ठीक उसी प्रकार क्रोध छोड़ने के लक्ष्य के प्रति हर पल सावधान रहना चाहिए।
क्षमा
इसके लिए रह-रह कर प्रतिज्ञा करनी होगी, कि 'क्रोध नहीं करूँगा'।
क्षमा
थोड़ा अङ्कुश लगने पर एक घण्टे, दो घण्टे या तीन घण्टे के लिए प्रयत्न करें।
क्षमा
चिलाती मुनि- चिलाती मुनि ने पूर्व अवस्था में एक कन्या को विवाह मण्डप से हरण किया, तो राजा श्रेणिक के सेनिकों ने उसका पीछा किया, अन्त में चिलाती ने उस कन्या की गर्दन काटकर फेंक दी, वह कन्या मरकर व्यन्तरी हुई, चिलाती मुनि बनकर तप करने लगे, तब व्यन्तरी ने चिलाती मुनि की आँखें फोड़ दी, उन्होंने समता पूर्वक इस उपसर्ग को सहन किया व सर्वार्थसिद्धि को प्राप्त हुये।
क्षमा
एक दिन, दो दिनों की अवधि के लिए प्रतिज्ञा कीजिए।
क्षमा
याद दिलाने वाले छोटों को पारितोषिक और बड़ों को धन्यवाद दें एवं सदैव मुस्कराते रहें।
क्षमा
उन्हें कहिए कि वे क्रोध आने पर क्रोध नहीं करने की प्रतिज्ञा को याद दिलायें।
क्षमा
विश्वास रखें क्रोध को छोड़ने के लिए अपने परिजनों, निकट सहयोगियों की मदद लीजिए।
क्षमा
धीरे-धीरे क्रोध पर विजय पाने में आप सफल हो जायेंगे।
क्षमा
प्राणायाम से, स्थान छोड़ देने से, एकान्त में जाकर क्रोध के कारण भूलने से और श्वाँस से, कषाय रूपी धुआँ को निकालने से क्रोध शान्त होता है।
क्षमा
क्रोध में जबाव नहीं देना, क्रोध के समय की फोटो सदा साथ रखना, यदि दर्पण हो तो उसें देखते रहो।
क्षमा
क्रोध के समय मौन रहना, सामने वाले ने अपराध किया है या नहीं ? यदि किया है तो ठीक गाली दे रहा है यदि नहीं किया है तो गाली देकर अपना पुण्य नष्ट कर रहा है।
क्षमा
यदि तुझे गाली देने से शान्ति मिलती है तो दे ले मेरा क्या जाता है।
क्षमा
इस प्रकार का शान्त वातावरण हो कि घर ही मन्दिर बन जाए, अज्ञानियों के समान हम व्यवहार करें तो हम में और अज्ञानियों में क्या अन्तर है?
क्षमा
पृथ्वी अपने हृदय विदीर्ण करने वालों को ठण्डा पानी व हरी-भरी फसल देती है, वृक्ष पत्थर मारने वालों को छाया व फलादि देता है, मनुष्य को भी दुर्व्यवहार करने वालों को क्षमा प्रदान करना चाहिए।
क्षमा
अजनबी व्यक्ति ने आचार्य विद्यासागरजी से अटपटा प्रश्न किया-What is your busines. आचार्य श्री ने शान्ति से उत्तर दिया- Busy nes is my busines. अर्थात् धर्म ध्यान में व्यस्त रहना ही हमारा व्यापार है।
क्षमा
स्वार्थ समस्त दुर्गुणों की जड़ है, पृथ्वी पर जितने बड़े-बड़े युद्ध हुए हैं उनका मूल कारण स्वार्थ था, स्वार्थ व्यक्ति को परमार्थ से विमुख कर देता है।
अनासक्ति
अपना काम स्वयं करने से कषाय कम होती है।
संयम
झगड़े मिटाने के चार उपाय- सहिष्णुता का विकास, समग्रता का चिन्तन, विनोदप्रियता और मौन।
क्षमा
मासोपवास करो, सत्य का विस्तार करो, ध्यान करो, बाहर वन में निवास करो, ब्रह्मचर्य धारण करो और भिक्षावृत्ति से भोजन करो परन्तु यह सब करने वाला यदि क्रोध करता है तो सब निरर्थक है।
क्षमा
क्रोध करने का मतलब दूसरों की गलतियों की सजा खुद को देना है।
क्षमा
पत्नि ने गुस्से में कहा मैं मायके जा रही हूँ, पति ने मुस्करा कर कहा मैं भी ससुराल घूम आऊँगा और पप्पू भी ननिहाल हो आयेगा। इस प्रकार की विनोदप्रियता से गुस्सा शान्त हो जाता है।
क्षमा
गाली बेरंग चिट्ठी है उसे लेंगे नहीं तो देने वाले के पास ही पहुँच जायेगी, अत: गाली नहीं गीत गाओ।
क्षमा
पहले महिलाएँ कपड़े धोती थीं तो कपड़े पीटने में कषाय निकल जाती थी, आज वांशिग मशीन है तो कषाय पति व बच्चों पर निकलती है।
क्षमा
सत्पुरूषों की शत्रुता तभी तक चलती है, जब तक शत्रु नम्र न हो जाए।
क्षमा