Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 47

समय, समझ, शक्ति का होना दुर्लभ है

43 सूत्र

गृहस्थ साधना नहीं कर पाता इसलिए साधकों की उपासना करता हैं।
धर्म
चींटी से मेहनत सीखिये, बगुले से तरकीब और मकड़ी से कारीगरी, अपने विकास के लिए अंतिम समय तक संघर्ष कीजिए।
पुरुषार्थ
यदि असंज्ञी भव का निर्माण हो गया, तब और बात की तो कथा ही क्या, पछताने तक की बुद्धि नहीं रहेगी।
कर्म
सुखी रहने का मूल मंत्र – C.A.R. (1) Change the changable (2) Accept the unchangable (3) Remove yourself from unchangable बदलने लायक है, बदलना आवश्यक है, बदल सकते हो तो बदल दो। जिसे बदल नहीं सकते हो उसे स्वीकार कर लो। जिसे बदल नहीं सकते एवं स्वीकार भी नहीं कर सकते, उससे दूर हो जाओ। उपरोक्त तीनों बिन्दुओं को अगर ठीक से आत्मसात कर लिया जाये तो जीवन में कुछ भी समस्या नहीं बचेगी।
संतोष
भगवती प्रज्ञा के प्रसाद से आत्म विजय प्राप्त करना है।
ज्ञान
गुरु के क्लीनिक में पहुँचने मात्र से नहीं साधना से आत्म स्वस्थता प्राप्त होती है।
पुरुषार्थ
प्राणी को अंगों का महत्त्व ज्ञात है अतः उसे सभी अंग प्रिय हैं और एक भी अंग खराब नहीं चाहता, एक अंग खराब होने पर लाखों करोड़ों रुपये खर्च कर देता है, इसी प्रकार सम्यग्दर्शन के सभी अंगों का पालन करना चाहिए।
धर्म
तुम किसी भी जगह होओ, किसी भी स्थिति में होओ, सदा अपना अकेलापन दृष्टि में रखो, इससे बड़ा बल प्रकट होगा।
अनासक्ति
एक अवगुण छुपाने के लिए अनेक आडम्बर का क्लेश करने की अपेक्षा छोटा परिश्रम तो यह है कि उस एक अवगुण को ही मिटा दिया जाय।
चरित्र
जो पुरुष अपने पद के विरुद्ध कार्य न करेगा, वह निःशल्य और प्रसन्न रहेगा।
चरित्र
अगर आपका कोई उद्देश्य नहीं है तो आप हमेशा दूसरों के उद्देश्य को पूरा करने के लिए कार्य करते रहेंगे।
समृद्धि
सफलता की खुशी मनाना अच्छा है, पर उससे ज्यादा जरूरी है, अपनी असफलता से सीख लेना।
समृद्धि
जब आप किसी काम की शुरूआत करें तो सफलता-असफलता से न डरें और काम को न छोड़ें। जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं, वे सबसे ज्यादा प्रसन्न रहते हैं।
पुरुषार्थ
सुख की खोज में मनुष्य अपना जीवन असंतुलित कर लेता है, जबकि असली सुख तो संतुलित जीवन में छुपा है।
संतोष
'तीव्र इच्छा', 'लक्ष्य निर्धारण', आदर्श सामने हो, उद्देश्य प्राप्ति के लिए प्रतिदिन प्रयत्न करते रहो, उठो जाओ और तब तक न रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।
पुरुषार्थ
अपने कार्य के अभिप्राय को देखो, आप प्रायः उसके लिए प्रयत्न नहीं करते हैं जो सच में आपको चाहिए हैं। सभी लक्ष्य आसानी से प्राप्त नहीं होते हैं
विवेक
सिर्फ एक कार्य पर निर्भर होकर आजीविका चलाना आपकी संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है। बिना सही योजना के सफलता अधूरी है।
समृद्धि
किसी वृक्ष को काटने के लिए आप मुझे छह घंटे दीजिए तो मैं पहले चार घंटे कुल्हाड़ी की धार तेज करने में लगाऊँगा।
पुरुषार्थ
सप्ताह में अवकाश के दिन आने वाले महीने, वर्ष के कार्यों की योजना बना लेना चाहिए। ये राहें ले जायेगी मंजिल तक हौंसला रखो। कभी सुना अँधेरे ने सबेरा नहीं होने दिया।
पुरुषार्थ
कर्त्तव्य करके जीवन चलाना ही कर्म योग है।
धर्म
आपका भाग्य निश्चित नहीं, आप अपने कर्मों से निश्चित करते हैं।
कर्म
सफलता पाने का कोई छोटा रास्ता नहीं है, पूरी मेहनत, निष्ठा, ईमानदारी, लगन, विश्वास के साथ किए गये कार्यों में विफलता की कोई जगह भी नहीं है।
समृद्धि
अतिरिक्त प्रयास करने को अपनी दैनिक आदत का हिस्सा बना लें।
पुरुषार्थ
१६ वर्ष का भूखा बच्चा होटल पर गया, २५% कमीशन पर लगा, एक मिनी बस में गया बोला इमारत पुरानी है लेकिन स्वाद अच्छा है और सेवा भी अच्छी मिलेगी। धीरे-धीरे उस होटल का मैनेजर बना, आगे चाय बगान किराये पर लिए और पूरे देश में अपना चाय का साम्राज्य फैला दिया, उस बालक का नाम था Lipton यह था उसका कर्मयोग।
पुरुषार्थ
अमेरिका में एक युवक का विवाह २२वर्ष में हुआ, २४ वर्ष में तलाक, २७ वर्ष की उम्र में नगर अध्यक्ष का चुनाव हार गया फिर विधानसभा का चुनाव लड़ा, हार गया, कांग्रेस सीनेट का चुनाव लड़ा हार गया, ४६ वर्ष में उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ा हार गया लेकिन उस व्यक्ति ने हार नहीं मानी और ५२ वर्ष की उम्र में राष्ट्रपति का चुनाव जीता वह था अब्राहम लिंकन।
पुरुषार्थ
हम अपने विचारों को किसी दायरे में सीमित कर अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर रहे हैं। ''सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग''
मन
मंजिल उन्हीं को मिली है, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता हौंसलों में उड़ान होती है ॥
पुरुषार्थ
अपनी कमियों को पहचाने और स्वयं सुधारें, आपका सुधार देखकर अन्य खुद को सुधारने की कोशिश करेंगे।
चरित्र
इस बात को स्वीकार करने तैयार रहे कि हम कुछ चीजें नहीं बदल सकते हैं। विपरीत परिस्थितियों में कुछ लोग टूट जाते हैं, कुछ रिकार्ड तोड़ते हैं।
संतोष
लोग क्या सोचेंगे इस बात की चिंता करने के बजाय क्यों न कुछ ऐसा करने में समय लगाये जिसे प्राप्त करने पर लोग आपकी प्रशंसा करें।
पुरुषार्थ
जब भी आप कुछ अच्छा या अलग कार्य करना चाहेंगे, लोग हँसेंगे मजाक उड़ायेंगे, आप अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें, आपकी सफलता ही उन्हें जवाब देगी, जैसे ही आप सफल होंगे वही लोग पलट जायेंगे और कहेंगे कि आप सही थे, वे आपका गुणगान करेंगे।
समृद्धि
हमारा जीवन स्वयं के सिद्धान्तों पर है, लोगों के कहने पर नहीं।
चरित्र
किसी भी कार्य को करने में हमारी प्राथमिकता स्वयं की जागरुकता, उपयोगिता, आवश्यकता होनी चाहिए यह नहीं सोचना चाहिए कि लोग क्या कहेंगे, जैसे ही भय आपके करीब आये उस पर आक्रमण कर नष्ट करें।
विवेक
लोग आपके खिलाफ बात कर रहे हैं, मतलब आप आगे बढ़ रहे हैं।
समृद्धि
काम ऐसा करो कि नाम हो जाये या फिर नाम ऐसा करो कि सुनते ही काम हो जाये।
समृद्धि
जो हो चुका है वह बदला नहीं जा सकता है।
संतोष
हमारी प्रेरणा में बदलाव भय की जगह स्वप्रेरणा ही हमारी जिंदगी की अधिकतर समस्याओं का समाधान है।
मन
निर्णय लेने में विफलता का भय नहीं बल्कि इतिहास बनाने का साहस हो।
पुरुषार्थ
एक दो बार किसी कारणवश नकारात्मक परिणाम आने पर रुकना नहीं है, उसका विवेचन कर उस गलती को सुधारकर आगे बढ़ना होगा।
पुरुषार्थ
किसी कठिन कार्य के प्रति भी अगर शुरू से नजरिया सकारात्मक रहेगा तो आत्म विश्वास भी ऊँचा होगा फल स्वरूप कार्य योजना भी बेहतर होगी और निश्चित ही परिणाम भी सर्वश्रेष्ठ होंगे।
मन
सोचना आस्रव (कर्म बंध का कारण) है, यदि सोचना पड़े तो निज शुद्धात्मा या परमात्मा का चिन्तन करो। इसी प्रकार बोलना पड़े तो ज्ञान-वैराग्य का विकास हो, ऐसा बोलो। तथा करना पड़े तो संयमित चेष्टा करो।
ध्यान
किसी भी विकार का ताँता लगने पर उस उपयोग को बदल देना वीरता है।
संयम
एकान्त निवास के अभिलाषियों को दृढ़ भेदविज्ञानी होना चाहिए अन्यथा एकान्त में पतित भी हो सकते हैं।
ध्यान