बालक वर्धमान ने स्याद्वाद सिद्ध किया- बच्चों ने माँ त्रिशला से पूँछा वर्धमान कहाँ पर हैं? माँ ने कहा ऊपर हैं, बच्चे दौड़कर तीसरी मञ्जिल में गये, वहाँ पिता सिद्धार्थ विराजमान थे, बच्चों ने पिताजी से पूँछा कि वर्धमान कहाँ पर हैं, पिताजी बोले नीचे हैं, बच्चे दूसरी मञ्जिल पर गये, वर्धमान से कहा आपके माता–पिता झूठे हैं, वर्धमान ने कहा नहीं, दोनों सही हैं, माँ की अपेक्षा ऊपर हैं, और पिता की अपेक्षा नीचे हैं, यही स्याद्वाद कहलाता है। विवेक 0 – भेजें
कर्तृत्व बुद्धि- पड़ोसी राजा ने चढ़ाई कर दी, राजा सामना करने में असमर्थ था, अतः रानी को घोड़े पर बैठा कर भाग गया, रानी गर्भवती थी, उसने रास्ते में बच्ची को जन्म दिया, सम्भाल न सकने से बच्ची को झाड़ी में फेक दिया, झाड़ी के ऊपर मधुमक्खी का छत्ता था, जिसका शहद उसके मुँह में गिरता रहा, जिससे वह सात दिन तक जीवित रही, राजा ने लौटते समय उसे बापस उठा लिया, आगे चलकर भारत सम्राट जहाँगीर की पत्नि नूरजहाँ बनी सोचो किसने किया उसका पालन? बालिका के पुण्य ने। कर्म 0 – भेजें
रक्षक कौन- अञ्जना को उसकी सास ने घर से निकाल दिया था, जिससे वह भटकती–भटकती एक गुफा में अपनी दासी के साथ पहुँची, उसी गुफा में हनुमान जी का जन्म हुआ था, वहाँ से आकाश में जाते हुए प्रतिसूर्य विद्याधर ने गुफा में देखा, तो वह नीचे गुफा की ओर आया, और उसे अपनी बहन बनाकर अपने साथ ले जाने लगा, अञ्जना को विमान में बैठाया, हनुमान माँ की गोद में थे, अचानक माँ की गोद से नीचे गिर गये, नीचे घना जङ्गल था, सब लोग घबराए और विमान को जङ्गल में उतारा गया, सब लोग रोते हुए हनुमान की खोज करने लगे, माँ को हनुमान की आवाज आई, सुनकर पास गयी, वहाँ हनुमान एक चट्टान पर पड़े थे, जिस चट्टान पर गिरे थे उस चट्टान के टुकड़े–टुकड़े हो गये थे, और हनुमान हँस–खेल रहे थे, इतनी ऊँचाई से गिरने पर भी उनको चोट तक नहीं लगी, किसने की हनुमान की रक्षा? हनुमान के पुण्य ने। कर्म 0 – भेजें
अभिमानी पिता के अनेक उपाय करने पर भी मैनासुन्दरी का भाग्य, किसने बनाया- एक बार मैनासुन्दरी ने पिता से कह दिया कि मैं अपने भाग्य का खाती हूँ, पिता ने गुस्से में आकर कुष्ट रोगी राजकुमार से मैनासुन्दरी का विवाह कर दिया, उसने सिद्धचक्र महामण्डल विधान में सिद्धों की आराधना करके गन्धोदक अपने पति को लगाया जिससे पति सहित सात सौ लोगों का कुष्टरोग ठीक हो गया था। भक्ति 0 – भेजें