Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 332

सात दिन का जीवन। भीष्म का ब्रह्मचर्य। ज्ञानी हँसता।

14 सूत्र

मैं आपका पुत्र हूँ- पन्ना नरेश राजा छत्रसाल से एकयुवती प्रभावित होकर बोली महाराज आप दुखियों के दुःख दूर करते हैं, मेरे कोई सन्तान नहीं है, आप जैसा पुत्र चाहिए, राजा ने कहा इसके लिए पाप करने की क्या जरूरत है ? मैं ही आपका पुत्र बन जाता हूँ चरणों में बैठ कर कहते हैं माँ आपका पुत्र आपकी जीवन भर सेवा करेगा, बोलिए क्या आज्ञा है ? नारी अवाक् रह गयी।
ब्रह्मचर्य
सात दिन का जीवन- राजा ने साधु से पूँछा कि आप स्त्रियों के बीच में रहते हो, मालपुआ खाते हो, इससे तुम्हारा मन चञ्चल नहीं होता है ? मुनि ने कहा इसका जबाव बाद में देंगे, कुछ समय बाद राजा को बुलाया, कहा आपका जीवन सात दिन का है, इन दिनों में खूब भोग भोग लो अन्यथा भोग कहाँ मिलेंगे, राजा घर गया चिन्ता में भोजन भी भूल गया, सात वे दिन सब लोग रोने लगे, लोगों का तांता लग गया, राजा मरा नहीं, आठवे दिन मुनि के पास गया, साधु ने कहा कि इन दिनों खूब भोग भोगे होंगे ?राजा ने कहा भोग नहीं भोगे रोते रहे, साधू ने कहा इसी प्रकार मृत्यु पर दृष्टि होने पर भोग रुचते नहीं हैं।
समाधि
भीष्म का ब्रह्मचर्य- भीष्म पिता ने पिता की प्रतिज्ञा में हानि न हो इसलिये पिता को धीवर की पुत्री में आसक्त जान आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया था।
ब्रह्मचर्य
आत्मा की बात दुर्लभ- भोगों की बातों को सिखाने वाले जगह-जगह टी.वी., कम्प्यूटर आदि साधन मिल जाते हैं, किन्तु आत्मा की बात सिखाने वाले दुर्लभ हैं, अतः आत्मा की बात सिखाने वालों की सङ्गति करना चाहिए।
संगति
धोबी के यहाँ से वस्त्र बदले हुए जानकर तुरन्त छोड़ देता है, उसी प्रकार ज्ञानी काम क्रोधादि को विभाव जानकार छोड़ देता है।
विवेक
ज्ञानी हँसता है- मिट्टी का खिलौना फूटने पर बच्चा रोता है, माँ-बाप हँसते हैं, उसी प्रकार सांसारिक वस्तु की हानि होने पर अज्ञानी रोता है, और ज्ञानी पाप का उदय समझकर कर्म निर्जरा के लिए हँसता है।
ज्ञान
विवाह बाँध है- बाँध के चारों ओर सुदृढ़ दीवाल बनाई जाती है, और उसमें आपात कालीन गेट होता है उसी प्रकार विवाह भी चारो ओर से वासना रूपी जल को रोकने के लिये बाँध है, उसमें स्वदार सन्तोष रूप एक आपातकालीन गेट है, विवाह वासना का निमन्त्रण नहीं नियन्त्रण है।
ब्रह्मचर्य
आज कल नव दम्पति के विवाह के कुछ समय पश्चात् ही विवाद पैदा होने की नौबत आने लगी है। इस विवाद की परिणति कभी-कभी पति या पत्नि द्वारा आत्महत्या करने में होती है, इसे बचाया जा सकता है यदि लड़के और लड़की शादी के पूर्व जरूरी बातों पर चर्चा कर लें।
परिवार
लड़की की उम्र- लड़की की उम्र प्रायः कम बताई जाती है, उम्र सही बताइये, आपके गुणों को देखते हुए उम्र का थोड़ा बहुत अन्तर लड़का स्वीकार कर लेगा।
परिवार
शैक्षणिक योग्यता- अभिभावक प्रायः कहते हुए पाये जाते हैं साहब हमारा पुत्र या पुत्री ग्रेजुएट है, बी.ए. और बी.ई., दोनों ग्रेजुएट हैं पर दोनों में काफी अन्तर है, अतः शिक्षा की सही-सही जानकारी देना आवश्यक है।
परिवार
रुचियाँ व अन्य योग्यताएँ- सिलाई, कढ़ाई, जैसी रूचियां प्रायः बनावटी या थोपी हुई होती हैं, इस विषय में खुलकर बात करें, किसी विशिष्ट पाठ्य क्रम योग्यता में आपने अच्छा स्थान बनाया हो तो स्पष्ट बता दें कि आप विवाहोपरान्त सम्बन्धित गतिविधियों से जुड़े रहेंगे या नहीं?
परिवार
आय- प्रायः अभिभावक होने वाले दामाद की आय ऐसे बताते हैं, कि साहब बिटिया 'रानी' बनकर रहेगी, मुख्य व्यवसाय के अलावा दूनी ऊपरी कमाई हो जाती है, अतः वास्तविक आय के आधार पर ही विवाह का निर्णय कीजिए।
परिवार
शारीरिक स्वास्थ्य- शारीरिक स्वास्थ्य चश्मादि लगता हो तो छिपायें न। अपने व्यक्तित्व के चुनन्दा सकारात्मक व नकारात्मक पहलुओं से लड़के को अवगत करा दें व उससे भी पूँछ लें।
परिवार
अपने खानपान, मांसाहार-शाकाहार की जानकारी कर लें, विवाहोपरान्त यह भोजन बनाना खाना पसन्द करेंगे या नहीं ? अभिभावक आज कल लड़की के दिमाग में भर देते हैं कि एकाकी परिवार ही सर्वोत्तम है, तुम्हारा सम्बन्ध संयुक्त परिवार में जुड़े तो जाकर तोड़ देना, यही तुम्हारे हित में होगा, इसे भी पूँछ लें।
परिवार