उत्तम पुरुष परोपकारी होता है बदले में कुछ नहीं चाहता है, मध्यम पुरुष अपना उपकार किये जाने पर प्रत्युपकार करता है परन्तु नीच पुरुष प्रत्युपकार नहीं करता है बल्कि उपकार किये जाने पर भी अपकार करता है। चरित्र 0 – भेजें
सर्प ने काटा चूहा दिखा- जिसे सर्प ने काटा था सर्प बिल में अन्दर खिसक गया उसी समय चूहा निकला अतः उसने समझा चूहे ने काटा है तो कुछ नहीं हुआ और जिसे चूहे ने काटा था, चूहा बिल में घुस गया उसी समय सर्प निकला, अतः उसने समझा सर्प ने काटा है तो वह डरकर मर गया, एक मिनट में सारी कोशिकाएँ मर गयीं, सकारात्मक सोच से शक्ति बढ़ती है, परोपकार की भावना से आत्मा को सिंह जैसा बल प्राप्त होता है, नकारात्मक सोच से शक्ति घटती है। मन 0 – भेजें
डबल परीक्षा-पेपर दूँ या जान बचाऊँ- परीक्षा देने जा रहे बच्चे ने रास्ते में पड़ी घायल बुढ़िया का इलाज करवाया, जब चिकित्सक ने कहा अब कोई खतरा नहीं है तब वह विद्यालय गया, तो प्राचार्य ने प्रवेश नहीं दिया, उसने रास्ते का सारा हाल सुनाया, प्राचार्य ने फ़ोन पर चिकित्सक से पूँछा, चिकित्सक ने कहा हाँ मैं आपको धन्यवाद देने ही आ रहा था, क्योंकि आपके विद्यालय में परोपकार की शिक्षा दी जाती है, बाद में बच्चे ने परीक्षा दी, परिणाम में वह प्रथम आया, प्राचार्य ने समस्त विद्यार्थियों के सामने उसका सम्मान किया और कहा ये हमारे विद्यालय की शान है। दान 0 – भेजें
सेठ छिदामीलाल जी से फिरोजाबाद में आयकर अधिकारी ने पूँछा सेठजी इतना पैसा इस मन्दिर में लगाया, इसके बदले में नई फैक्ट्री खुल जाती सेठजी ने उत्तर दिया यदि एक फैक्ट्री और लगाता, तो मुर्दाबाद के नारे लगते, मन्दिर बन गया तो सब धन्यबाद देते हैं, फिर मैं कौन सा मन्दिर बनाने वाला हूँ, मैंने तो इस फैक्ट्री के मजदूरों से प्राप्त पैसे को मन्दिर बनाने वाले शिल्पियों मजदूरों को बाँट दिया, मैं तो इधर का पैसा उधर वितरित करने वाला हूँ, यह निरभिमानता है। विनम्रता 0 – भेजें
दुनिया के सब कार्य अहिंसा के लिये, चौराहे पर लाल बत्ती अहिंसा के लिये, आपस में दो टकरा न जाएँ इसलिए यातायात नियन्त्रक पुलिस अहिंसा के लिये, मजिस्ट्रेट अहिंसा के लिये, पुलिस, चिकित्सक, कानून व्यवस्था, विधानसभा, मन्त्री आदि सभी विभाग अहिंसा के लिये हैं। अहिंसा 0 – भेजें