दाह पड़ना- गर्मी की दाह को छाता रोक देता है, सूर्य चर्म को ही तपाता है, किन्तु काम के प्रबल ताप के प्रतिबन्ध का कोई साधन नहीं है, सूर्य दिन में तपाता है, काम रात-दिन तपाता है। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
जैसे लोभी धन प्राप्ति के लिये प्राणों को त्याग देता है, उसी प्रकार कामी काम वासना के लिये प्राणों को सङ्कट में डाल देता है। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
कामी अपने मनोरथ सफल होते न देख मरण को प्राप्त होता है, वासना के वश सैकडों कन्याएँ व युवक रेल से कटकर, कुंए में गिरकर, सल्फास खाकर, फाँसी लगाकर आत्म हत्यायें कर रहे हैं। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
मैथुन से शरीरिक हानि- शरीर में वीर्य शक्ति ही श्रेष्ठ है, वह शरीर का राजा है, जिस प्रकार राजा के विना राज्य में अन्याय-भ्रष्टाचार होने से राज्य निर्धन हो जाता है, उसी प्रकार वीर्य शक्ति के विना शरीर निस्तेज एवं निस्सार हो जाता है। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
चालीस किलोग्राम भोजन से एक तौला वीर्य बनता है, अधिक काम सेवन से टी.वी., कुष्टरोग व नपुंसकता आदि भयंकर रोग हो जाते हैं। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
अति स्त्री संसर्ग से बचना चाहिए वरना शूल, खाँसी, बुखार, श्वास, रोग, दुबलापन, पाण्डुरोग, क्षय व ऐठन आदि रोग हो जाते हैं। स्वास्थ्य 0 – भेजें
रोगों का राजा एड्स- जो भौतिकवादी, विलासप्रिय अमेरिका आदि देश ब्रह्मचर्य का मखोल उड़ाते थे, वे अब ब्रह्मचर्य को महत्त्व देने लगे हैं, यह रोग वेश्यागमन से होता है, यह अजीब किस्म का वायरस यानि विषाणु है, यह वायरस इतना छोटा है कि इसका व्यास 100 नेनोमीटर या 0.1 माइक्रो मीटर से नापा गया है, ऐसे सूक्ष्माति सूक्ष्म जीव ने आज लगभग एक सौ तेतीस देशों में एड्स का असाध्य रोग फैला दिया है, इसका शोध 1983 में पेरिस के डॉ. तुक मोटारनीन ने और 1984 में अमेरिका के डॉ. रावर्ट गैली ने किया था। स्वास्थ्य 0 – भेजें
एक बार पूरे खून में एड्स परमाणु फैल जायें, तो कुछ महिनों में मौत अपने पञ्जे में दबोच लेती है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
सारी दुनिया में पचास लाख से एक करोड़ लोग इस घातक वायरस के जीते-जागते नमूने हैं, इनमें से पन्द्रह लाख केवल अमेरिका में हैं। स्वास्थ्य 0 – भेजें
वीर्यवास- रज और वीर्य सर्वाङ्ग में रहते हैं, जैसे तिल में तैल, फूल में गन्ध, इसी तरह शरीर के कण-कण में वीर्य व्याप्त है। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
वीर्य की बूँद निकालना याने शरीर को नीबू की भाँति निचोड़ना है, जैसे मथानी से दूध के परमाणु से मक्खन खींचा जाता है, उसी प्रकार हस्तमैथुन आदि से शरीर के सभी परमाणुओं से वीर्य खींचा जाता है नस-नस हिल जाती है जब तक दीपक में तैल ऊपर चढ़ता है तो दीपक प्रकाश करता है, जैसे ही तैल का नाश होता है दीपक मन्द होकर बुझ जाता है, उसी प्रकार जब तक शरीर में वीर्य ऊपर चढ़ता है तो शरीर में चमक, दमक, आनन्द बल दिखाई देता है। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
वीर्य रक्षा के उपाय- पवित्र सङ्कल्प, मातृभाव, दृष्टि को सम्भालना, सादा रहन सहन, सत्सङ्गति, योगासन, जिनेन्द्रभक्ति, सत्साहित्य का पठन-पाठन, व्यसन मुक्ति, उपवास, दृढ़ प्रतिज्ञा, प्राणायाम आदि। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
डॉ. सुरेश जैन ने सूक्ष्म दर्शी यन्त्र से वीर्य में चलते फिरते जीव देखें हैं, जीव का आकार मनुष्य जैसा होता है। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
मैथुन से सामाजिक हानि- स्त्री आसक्त व्यक्ति समाज की दृष्टि में अच्छा नहीं माना जाता है, राजा भी व्यसनी हो तो प्रजा उसे हटा देती है, वेश्या सेवी सातों व्यसन करता है एवं दुराचारी का समाज बहिष्कार करती है। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
आर्थिक हानि- मैथुन से उत्पन्न बीमारी में पैसा बर्बाद होता है, शरीर में दुर्बलता के कारण व्यवसाय नहीं कर पाता, बच्चे भूखे मरते हैं, पैसों के अभाव में अच्छा खान, पान, दान, पहिनना आदि नहीं हो पाता है। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
माँ का कलेजा- वेश्यागामी की परीक्षा लेने के लिए, एक लड़की ने कहा कि आप अपनी माँ का कलेजा ले आओ, तो मैं तुम्हे पति बना लूँगी, कामासक्त रात में माँ को मारकर कलेजा ले आता है और लड़की के पास जाता है, लड़की ने मनाकर दिया, और कहा ! जो अपनी माँ का नहीं हुआ, वह हमारा क्या होगा ? ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
स्त्री के भाव- मनुष्य के शरीर में जितने रोम हैं, स्त्रियों के मन में उतने विकारी भाव होते हैं, जैसे वायु, उल्का, जल के बुलबुले, विद्युत आदि ये पदार्थ एक स्थान में ज्यादा देर तक नहीं ठहरते हैं, वैसे ही स्त्रियाँ एक पुरूष में ज्यादा समय तक प्रीति नहीं करती हैं, परमाणु पकड़ना सम्भव है पर स्त्रियों के भावों को पकड़ना असम्भव होता है। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें
माया का अजायब( चिड़िया ) घर- एक थानेदार एक स्त्री में आसक्त हो गया, अत्यधिक प्रेम करने लगा, उसका ट्रांसफर हो गया, तो उसने स्त्री से कहा ! तू हमारे साथ चल, उसने मना कर दिया, थानेदार को मना करने का बड़ा खेद हुआ, एक महिला ने थानेदार को दुःखी देखकर, कारण पूँछा तो उसने अपनी प्रेमिका का हाल बता दिया, उस महिला ने थानेदार को परदे के भीतर खड़ा करके उस महिला से पूछा तूने अभी तक कितने लोगों से प्रेम किया है ? उसने लिस्ट बताई साठ-पैंसठ लोगों के नाम बताये, थानेदार का नाम नहीं आया, पूँछा तुम भूली तो नहीं हो ? चार-पाँच नाम फिर बताए तब भी नाम नही आया, पुनः पूँछा दो-तीन नाम बताये तब भी थानेदार का नाम नहीं आया, वह सब सुन रहा था, थानेदार को उससे विरक्ति हो गयी। ब्रह्मचर्य 0 – भेजें