Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 155

क्रोधान्ध राजा।

4 सूत्र

कषाय से अनुरञ्जित चित्त में तत्त्व अवगाहित नहीं होता जैसे नीले रङ्ग के वस्त्र में कुमकुम का रङ्ग चढ़ता नहीं है।
क्षमा
उत्तम प्रकृति के पुरुष क्षण भर क्रोध करते हैं, मध्यम प्रकृति के एक मुहूर्त, जघन्य प्रकृति के चौबीस घण्टे और चाण्डाल प्रकृति के मर जाते है पर क्रोध नहीं छोड़ते हैं।
क्षमा
यशोधर का यशवर्धन- श्रेणिक ने अपने शिकार में बिघ्न जान यशोधर मुनिराज के गले में सर्प मारकर डाल दिया, तीन दिन बाद चेलना से कहा तो चेलना श्रेणिक को लेकर मुनिराज के पास पहुँची, मुनिराज के ऊपर सेकड़ों चींटियों का उपसर्ग हो रहा था। चेलना ने उपसर्ग दूर किया। मुनिराज ने ध्यान खोला तो दोनों ने नमोस्तु किया। मुनिराज ने दोनों को धर्म वृद्धि का आशीर्वाद दिया। श्रेणिक को पश्चाताप हुआ, कि मैंने मुनिराज को तीन दिन भूखा रखा, उपसर्ग किया, उसके बाद भी ये हमारा कल्याण चाहते हैं। मेरे स्थान पर यदि कोई दूसरा होता तो मैं उसे मृत्यु दण्ड देता। अब मैं स्वयं राजा हूँ और स्वयं अपराधी हूँ, अतः मुझे स्वयं आत्मघात कर लेना चाहिए। मुनिराज मनःपर्यय ज्ञानी थे अतः वे श्रेणिक के मन की बात जान गये, और बोले राजन्! आत्मघात करना तो पाप है ही आत्मघात की बात सोचना भी पाप है। ऐसा सुनकर श्रेणिक को आश्चर्य हुआ और सोचा ये तो साक्षात् भगवान् हैं, और अत्यधिक पश्चात्ताप करते हुए मुनि से क्षमा माँगकर प्रणाम किया, जिससे सम्यक्त्व को प्राप्त कर, बाद में भगवान महावीर के पादमूल में क्षायिक सम्यक्त्व और तीर्थंकर प्रकृति का बंध किया, जिसके प्रभाव से सप्तम नरक की तेंतीस सागर की आयु घटकर पहले नरक की मात्र चौरासी हजार वर्ष शेष रह गयी, यह था क्षमा का प्रभाव।
क्षमा
क्रोधान्ध राजा- प्यास से पीड़ित राजा जङ्गल में भटक गया था, थककर एक वृक्ष के नीचे लेट गया, थोड़ी देर बाद आँख खुली तो उसने देखा कि वृक्ष की खोह से कुछ-कुछ पानी बह कर आ रहा है, राजा ने पत्तों का दोना बनाया पानी भरने को रख दिया दोना भरा था कि एक तोते ने दोने को नीचे गिरा दिया, बड़ी खिन्नता हुयी, पुनः पानी इकट्ठा किया तोते ने फिर गिरा दिया
क्षमा