युग के आदि में भरत-बाहुबली लड़े थे, इसलिए हमने लड़ना सीखा, बाद मे उन्होंने संयम लिया, पर हमने संयम लेना नहीं सीखा, महाभारत सुनकर आये किसी व्यक्ति से पूँछा कि क्या सीखा? बोला! चाहे लड़ मरो, मगर किसी को पाँच पैसा भी मत दो, अर्थात् व्यक्ति बुराई ग्रहण करता है अच्छाई नहीं यह उसकी कमी है। चरित्र 0 – भेजें
मिट्टी के बर्तन- पत्नी के कहने से बेटे ने माँ-बाप को खेत में रखा, एवं उनको मिट्टी के बर्तनों में भोजन देता था, जब उसके बेटे ने देखा, तो वह भी अपने पापा के लिए एक साथ मिट्टी के वर्तन ले आया, पापा के पूँछने पर उसने कहा! आपके लिए जरुरत पड़ेगी इसलिए ले आया हूँ, सुन कर वह डर गया, एवं अपने माँ-बाप को घर लाकर प्रेम से सेवा करने लगा। परिवार 0 – भेजें
आप कुछ भी पढ़ लो, अपनी भाषा सीखो, माँ की भाषा समझो। लड़का पढ़ लिख कर आया, माँ ने गले लगाया, आँसु बहाये, आशीर्वाद दिया, लड़का ट्राँसलेटर से पूँछता है, ये क्या कह रहीं हैं? उसने समझाया 'my dear son'। इतनी योग्यता तो हो कि अपनी माँ की भाषा को समझ सके। परिवार 0 – भेजें
पुत्र जन्म लेते ही यौवन हरण कर लेता है, बाल्यावस्था में भोजन बटा लेता है, समर्थ होने पर धन हर लेता है, पुत्र के समान बैरी कोई नहीं होता है। परिवार 0 – भेजें
योगत्रय का संस्कार-मन का संस्कार- सीता ने राम से कहा, कि लोगों के कहने से मुझे छोड़ा, पर धर्म नहीं छोड़ना। सीता रावण के यहाँ रही पर रावण का रूप और वैभव देखकर भी अडिग रही यह मन का संस्कार है। वचन का संस्कार जैसे- अंधे व्यक्ति से 'हे सूरदास जी! यहाँ से कोई निकला है'? मन सन्तुष्ट करने वाले वचन बोलना वचन का संस्कार है। काय का संस्कार- लोह मयी आभूषण पहनाने पर भी पाण्डव अडिग रहे, सुकौशल स्वामी को व्याघ्री ने खाया पर वे अडिग रहे। चरित्र 0 – भेजें