Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 156

उपकारी नेवला। चिलाती।

9 सूत्र

भक्ति भाव भादों नदी, सभी चली थर्राय। सरिता वही सराहिये, जेठ मास ठहराये।।
संयम
दण्ड में उल्लास है पर शान्ति नहीं, क्षमा में शान्ति और आनन्द है, एवं यश भी मिलता है।
क्षमा
जो वर्तमान में जीता है वह वर्धमान हो जाता है।
समय
करोड़ो बार आत्मध्यान और एक बार क्रोध के समय क्षमा का बराबर फल है।
क्षमा
जैसे प्रकाश, पवन, पानी, आकाश, सभी के लिए हैं, उसी प्रकार क्षमा धर्म सबको सुखी करता है।
क्षमा
जैसे रोग किसी व्यक्ति विशेष को नहीं होता, दवाई किसी व्यक्ति विशेष के रोग को दूर नहीं करती, उसी प्रकार धर्म सभी के दुखों को दूर करता है।
धर्म
प्रेम की उद्दीप्त भावना शरीर को उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करने का सर्वोत्तम साधन है, प्रेम ही आपको स्वास्थ्य व परमानन्द की अनुभूति करायेगा।
स्वास्थ्य
विद्युच्चर मुनि की क्षमा- उग्र तप के धारी विद्युच्चर नामक मुनिराज को चामुण्डा नामक व्यन्तरी ने घोर उपसर्ग किया, उस उपसर्ग को समता से सहनकर मोक्ष को प्राप्त हुए हैं।
क्षमा
उपकारी नेवला- (क्रोध के समय विवेक खो जाता है) किसान की पत्नी पानी भरने गयी थी, उसका बालक पालने में सो रहा था, इतने में सर्प आया, नेवले ने सर्प को मारकर बच्चे की रक्षा की, नेवले के मुँह पर खून लगा देख कर महिला ने सोचा इसने बच्चे को मार डाला होगा और विना सोचे पानी का घड़ा नेवले के ऊपर पटक दिया, नेवला मर गया, अन्दर आकर देखा तो बालक सो रहा था और नीचे सर्प मरा हुआ पड़ा था, उसने विना सोचे परमोपकारी नेवले को मार डाला था।
विवेक