Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 204

आर्जव धर्म से लाभ- चोर को पोटली उठा दी। डाकू खड़ग सिंह।

9 सूत्र

धम्मो सुद्धस्स चेट्ठई- धर्म शुद्ध हृदय में ठहरता है।
धर्म
आर्जव धर्म पापों का खण्डन कर सुख उत्पन्न करने वाला है, योगों की सरलता से पुण्य बन्ध और पाप की निर्जरा होती है।
चरित्र
आर्जव धर्म संसार सागर से पार होने के लिए जहाज के समान है।
चरित्र
सरल व्यक्ति की बैरी भी प्रशंसा करते हैं, उसको यश, धर्म, प्रीति की प्राप्ति होती है और दोनों लोकों में सफलता मिलती है।
चरित्र
माया से संसार, और सरलता से मोक्ष मिलता है, वृक्ष यदि टेड़ा है तो कोयला बनता है सीधा है तो सिंहासन, जिस पर सन्त बैठते हैं।
चरित्र
गणेशप्रसाद वर्णी जी जब पढ़ते थे, तो एक दिन एक भङ्गेड़ी के चक्कर में पड़ गये, उसने कहा कि भाँग खाने से शिवजी दिखते हैं, वर्णी जी ने सोचा हमें भी अरहन्त भगवान् दिख जायेंगे, तो उन्होंने भाँग खाली, उसका नशा चढ़ गया, और अपने गुरु अम्बादास जी की अविनय कर दी, गुरू ने नशा उतरने पर पूँछा, भाँग खाई थी? तो सही बता दिया, कि अर्हन्त भगवान् के दर्शन के लोभ में खाई थी, अब ऐसी गलती नहीं करेंगे कपट हीन होने पर शिष्य की मूर्खता भी गुरु का हृदय जीत लेती है।
सत्य
विशुद्ध भावना से किया गया कठोर आचरण भी सरलता की श्रेणी में आता है, जैसे माता-पिता या शिक्षक की डाँट।
चरित्र
कार्य की सिद्धि माया से नहीं पूर्व पुण्य से होती है।
कर्म
मयूर और कछुए की मित्रता- एक दिन मयूर को शिकारी ने पकड़ लिया और बोला राजा बदले में हमें रूपये देगा, कछुए ने पानी में से लाकर हीरा दिया, शिकारी बोला एक और लाकर दो तब छोड़ेंगे, कछुए ने कहा मित्र को छोड़ो और हीरा दो इसी नाप का लाकर देते हैं, मित्र को छूटा हुआ देखा तब बोला-तुम जैसे लोभी, धोके बाज को हीरा नहीं दण्ड मिलना चाहिए, ऐसा बोल कर पानी में चला गया।
चरित्र