Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

संयोग आत्महित का नियत साधक नहीं है क्योंकि कर्म के संयोग से संसार के दुःख मिलते हैं, शरीर के संयोग से भूख-प्यास आदि के दुःख मिलते हैं, परिवार के संयोग से चिन्ता परिश्रम के दुःख मिलते हैं। संयोग सुख की चीज नहीं है, बल्कि क्लेशों का पिता है।

Attachment is never a reliable means to the soul's welfare, for the bond of karma brings worldly sorrow, the bond of the body brings hunger and thirst, and the bond of family brings the pains of worry and toil. Attachment is not a thing of happiness but the father of afflictions.

— आराध्य सूत्र · #5046

इसी विषय के और सूत्र

सभी अनासक्ति →
किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति