Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

मनुष्य कितना मूर्ख है। प्रार्थना करते समय समझता है कि भगवान् सब कुछ सुन रहा है, पर निंदा करते समय यह भूल जाता है। पुण्य करते समय यह समझता है कि भगवान् देख रहा है, पर पाप के समय यह भूल जाता है। दान करते समय समझता है कि भगवान् सब में बसता है, पर चोर चोरी करते समय ये भूल जाता है। प्रेम करते समय यह समझता है कि पूरी दुनिया भगवान् ने बनाई है, पर नफरत करते हुए ये भूल जाता है और हम कहते हैं कि मनुष्य सबसे बुद्धिमान प्राणी है।

How foolish is man! While praying he believes God hears everything, but while slandering he forgets it. While doing good he thinks God is watching, but while sinning he forgets. While giving charity he thinks God dwells in all, but while a thief steals he forgets it. While loving he thinks God made the whole world, but while hating he forgets it, and yet we call man the wisest of beings.

— आराध्य सूत्र · #5043

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति