Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Death & Samadhi

समाधि

120 सूत्र · पृष्ठ 1 / 2

बालक जन्मता है तो वह बड़ा होगा कि नहीं, पढ़ेगा कि नहीं, उसका विवाह होगा कि नहीं, उसके बाल-बच्चे होंगे कि नहीं, उसके पास धन होगा कि नहीं आदि सब बातों में सन्देह है, पर वह मरेगा कि नहीं, इसमें कोई संदेह नहीं है।
समाधि
आगमन शब्द में ही गमन छुपा है। अतः जो आयेगा वह जायेगा जरूर लेकिन हाँ, जो जा रहा वह आयेगा इसकी कोई गारंटी नहीं, यही जीवन का सच है।
समाधि
जन्म को नहीं, मरण को सुधारो, अगला जन्म सुधर जायेगा।
समाधि
जब यह शरीर नश्वर है और आत्मा अमर है, तो फिर भय किसका और किसलिए?
समाधि
जो अध्यात्म से रहित होता है वही मौत से डरता है।
समाधि
मृत्यु से वे ही डरते हैं, जिसका जीवन पाप कर्मों में निकला है। मौत बड़ी नींद है, नींद छोटी मौत है।
समाधि
मृत्यु से भयभीत होना कायरों का काम है क्योंकि असली जीवन तो मृत्यु ही है।
समाधि
जब मृत्यु तय है जो उसका उल्लास से वरण करें क्योंकि मृत्यु प्रतिदिन निकट आ रही है।
समाधि
आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं अपितु एक नई समस्या है।
समाधि
जो समाधि में डूबता है वही मुक्ति का वरण करता है।
समाधि
समाधि आत्महत्या नहीं, आत्म जागरण है।
समाधि
डोली से शिखर जी की यात्रा तो आप कर सकते हैं, श्मशान तक कंधे पर चढ़कर पहुँच सकते हैं पर उसके आगे तुम्हें किसी का सहारा नहीं मिलेगा।
समाधि
समता की साधना से मरण की चिन्ता भी नहीं होती है।
समाधि
मूर्छित, सुसुप्त अवस्था में भी आत्मा पर मन्त्रों का प्रभाव होता है संक्लेश खत्म होता है अतः समाधिमरण पाठादि सुनाना चाहिए।
समाधि
जिन माता-पिता ने पाला वे ही छोड़कर चले जाते तब दूसरा कौन साथ देगा, मृत्यु तो ‘रिटर्न’ टिकट है।
समाधि
जितना सौ दीक्षा देने में पुण्य मिलता है उतना एक समाधि कराने में पुण्य मिलता है।
समाधि
जीवन के अंतिम क्षणों में भी जो अपनी शान्ति और स्वतंत्रता को नष्ट नहीं होने देते वो ही मोक्ष के अधिकारी हैं।
समाधि
साम्यभाव और निःशल्य भाव के बिना समाधि संभव नहीं है।
समाधि
गुरु आज्ञा न मानने वाले की कभी समाधि संभव नहीं हैं।
समाधि
मृत्यु के समय उसे ज्यादा कष्ट होता है, जिसने इन्द्रिय और कषायों को नहीं जीता है।
समाधि
यदि मेरे लिए रोये तो मैं मरता नहीं हूँ और शरीर के लिए रोये तो मैं इसे साथ लेकर जाऊँगा नहीं।
समाधि
समाधि की साधना जीवन भर चलती है।
समाधि
समतापूर्वक देह का त्याग करना ही समाधि है। समाधि का सबसे बड़ा शत्रु राग है।
समाधि
शरीर और कषाय को कृश करने का नाम समाधि है, यदि शरीर को सुखा डाला किन्तु कषाय नहीं सूखी तो समाधि नहीं होगी।
समाधि
स्वाध्याय का फल संयम और संयम का फल समाधि है।
समाधि
निन्दा, गर्हा, आलोचना किए बिना, प्रायश्चित्त लिए बिना समाधि मरण नहीं हो सकता क्योंकि अन्दर दोषों की शल्य बैठी है, परिणामों की शुद्धि के अभाव में समाधि होती ही नहीं है।
समाधि
जो साधक रत्नत्रय की निर्मल आराधना करता है उसकी सम्यक् समाधि होती है।
समाधि
सहजता संयम की सीढ़ी है और समाधि संयम का शिखर है।
समाधि
मौत को टाला नहीं जा सकता पर सुधारा अवश्य जा सकता है।
समाधि
हँसते हुए जीना एक कला है, हँसाते हुए जीना और भी बड़ी कला है पर हँसते हुए मरना सबसे बड़ी कला है।
समाधि
वृद्धावस्था से पूर्व मुझे भली प्रकार जीवित रहने की चिन्ता थी, वृद्धावस्था में भली प्रकार मरने की चिंता है।
समाधि
संसार का मूक शिक्षक 'श्मशान' क्या डरने का स्थान है? जीवन की नश्वरता के साथ ही सभी आत्माओं के उत्थान का ऐसा सुन्दर स्थल और कौन है ?
समाधि
मनुष्य 'योग' में स्थित होकर, तत्त्व को जानकर, मृत्यु काल में भी दुःखी नहीं होता है।
समाधि
ऐसे मरो की फिर से गर्भ वास न हो।
समाधि
मैंने मृत्यु का चिंतन तो काफी किया, लेकिन मृत्यु की चिंता मैं नहीं करता हूँ।
समाधि
संसार से प्रतिदिन प्राणी यमलोक में जा रहे हैं किन्तु जो बचे हैं, वे सर्वदा जीते रहने की इच्छा करते हैं, इससे बढ़कर आश्चर्य और क्या होगा ?
समाधि
कमल के पत्ते पर ओस की बूँद के समान मानव जीवन क्षणभंगुर है, हम लोग सिर्फ मुँह से ही यह कहते हैं परन्तु आत्म कल्याण करके नहीं दिखाते हैं।
समाधि
घर में पिच्छी होने पर पिच्छी लेने की याद बनी रहती है एवं अचानक किसी की सल्लेखना हो तो भी काम आ सकती है।
समाधि
मनुष्य जन्म उसका सार्थक है जिसका जीवन संयम मय और मरण समाधिपूर्वक होता है।
समाधि
वृद्धावस्था और मृत्यु के वश में पड़े हुए मनुष्य को औषधि, मंत्र, होम और जप भी नहीं बचा पाते हैं।
समाधि
यदि धीरता और कायरता में भी मृत्यु होती है तो तू कायरता को छोड़कर धीरता से ही मरण कर। जो मनुष्य दो कोस गाँव को जाता है तो नाश्ता ले जाता है वह दुर्बुद्धि परलोक में जाते हुए क्या धर्म रूपी नाश्ता नहीं ले जायेगा ?
समाधि
निश्चित समय पर चलने वाली गाड़ी के लिए भी जब पहले से सावधानी रहती है तो फिर मौतरूपी गाड़ी का कोई समय निश्चित नहीं है, उसके लिए तो हरदम सावधानी रहनी ही चाहिए।
समाधि
मकान यहाँ बना रहे हो, सजावट यहाँ कर रहे हो, संग्रह यहाँ कर रहे हो, पर खुद मौत की तरफ भागे चले जा रहे हो। जहाँ जाना है पहले उस परलोक की तैयारी तो करो।
समाधि
प्रत्येक मनुष्य को सच्चाई, कर्त्तव्य और मौत को हमेशा याद रखना चाहिए।
समाधि
संसारी कीड़े की तरह मरने से कहीं अधिक अच्छा है कि संयम धारणकर कर्त्तव्य का पालन करते हुए समतापूर्वक समाधि से मरो।
समाधि
आपत्ति, दुःख और चिंताएँ इसलिए आती हैं कि परमात्मा को याद करने का समय निकाल सकें, आत्मदर्शन कर सकें तथा दूसरों के दुःखों का अनुभव कर सकें।
समाधि
जैसे समरभूमि में युद्ध हो या न हो परन्तु योद्धा प्रतिक्षण तैयार रहते हैं क्योंकि पता नहीं शत्रु कब आक्रमण कर दे? वैसे ही साधक प्रतिक्षण तैयार रहते हैं क्योंकि पता नहीं मृत्यु कब आक्रमण कर दे?
समाधि
जो दूसरों की समाधि करवाता है उसकी नियम से समाधि होती है।
समाधि
व्याधि और मृत्यु कभी भी आ सकती है अतः शीघ्र ही आत्म शान्ति पाने का उद्यम करो।
समाधि
जीवन का अंत समय सुधारना है तो प्रतिक्षण सुधारो।
समाधि
मौत और भगवान् को न भूलो, हो सकता है जीवन का आखिरी दिन आज ही हो।
समाधि
विभूति चंचल है, यौवन क्षणभंगुर है और जीवन यमराज के दाँतों के बीच विद्यमान है अतः पर लोक की साधना में उपेक्षा करना ठीक नहीं है।
समाधि
इन्द्र, मनुष्य, विद्याधर, चक्रवर्ती और धरणेन्द्रों ने भूत भविष्य और वर्तमान में जो सुख भोगा है उस सबको इकट्ठा किया जाये उस सुख से अनन्त गुणित सुख सिद्ध परमेष्ठी एक समय में भोगते हैं इसलिए हे भाई! यदि तुझे इष्ट हो तो एकाग्रचित्त होकर उस समीचीन सुख का उपाय कर।
समाधि
अंत समय सुधारना हो तो प्रतिक्षण सुधारो।
समाधि
मरणासन्न की जिस स्तुति पाठादि में रुचि है वही सुनाना चाहिए यदि जीवन में धर्म नहीं किया हो तो संसार का स्वरूप समझाते हुए विषय-कषाय का त्याग कराकर दानादि की प्रेरणा करना चाहिए।
समाधि
दिव्य मृत्यु दिव्य जीवन से कहीं उत्तम है।
समाधि
सबसे अंतिम शत्रु जिसका विनाश किया जायेगा, वह है मृत्यु।
समाधि
भगवान् महावीर ने जीने के साथ मरना भी सिखाया है बच्चा जन्म लेता है तो कई बातों में संदेह रहता है पर मृत्यु में कोई संदेह नहीं होता है।
समाधि
जिसकी होनहार बिगड़ चुकी है, मरण नजदीक है उसे वीतराग भगवान् के चरण दिखाई नहीं देते, स्वयं की नासिका भी नहीं दिखती है।
समाधि
मौत को छोड़कर शेष के लिए 'कल' का ख्याल अवश्य आता है कि 'कल' क्या होगा, परीक्षा चार दिन की पर पाठ्यक्रम तो १२ महीने का, जज का फैसला आधा घंटे का पर १२ साल लड़ना पड़ता है, मंजिल छोटी पर रास्ता लम्बा होता है इसी तरह मौत चाहे एक पल की घटना है पर उसे सुधारने के लिए जिन्दगी भर सावधानी रखनी पड़ती है, संभव है, बिना पढ़े सिर्फ नकल करके कोई विद्यार्थी परीक्षा में पास हो जाए, रिश्वत देकर अदालत के चक्कर से बच जाए किन्तु बिना जागे मौत नहीं सुधर सकती, अतः जीवन में याद रखो शुभ कार्य आज अभी इसी समय और अशुभ कार्य फिर कभी किसी समय।
समाधि
मौत से बचने का शानदार तरीका है दूसरों के दिलों में जिन्दा रहना सीख लो वरना मर तो इंसान तभी जाता है जब याद करने वाला कोई न हो।
समाधि
मृत्यु और मोक्ष में अन्तर—सांस खत्म हो जाये और तमन्ना बाकी रह जाये तो 'मृत्यु' और सांस बाकी रहे और तमन्ना समाप्त हो जाये तो 'मोक्ष'।
समाधि
समाधि के समय कोई साधक से पूछता है कि किसी से मिलना है क्या? वह कहता है सबको जाने दो मुझे जिससे मिलना था वो मिल चुका है। ''सम्बन्धों में ही बंध है सम्बन्धों में ही कष्ट है।''
समाधि
अच्छी समाधि होना साधु की सच्ची त्याग तपस्या का फल है।
समाधि
समाधि में सबसे बड़ी बाधा वैर और आशा है।
समाधि
आपने जीवन में क्या-क्या किया, कितने धर्मात्मा थे, इसका निर्णय अंतिम समय में होता है।
समाधि
देह के लिए अनंत भव दे दिये, अब निज आत्मा के लिए एक वर्तमान की देह ही दे दो।
समाधि
अंतिम समय में काम-भोग नहीं सताते हैं, राग और रसना इन्द्रिय सताती है, अतः यदि समाधि करना है तो किसी से राग न करें और रसना पर नियंत्रण रखना चाहिए।
समाधि
मुक्ति स्त्री वरने योग्य है क्योंकि वह मरण को प्राप्त नहीं होती है।
समाधि
वृद्धावस्था में दूसरों के तिरस्कार पूर्ण वचनों को सुनने में समर्थ न होने से ही मानो कान बहरे हो जाते हैं, वृद्धावस्था की दयनीय दशा को देखने में समर्थ न होने से ही मानो नेत्र अन्धे हो जाते हैं, फिर भी खेद है कि जरा से जर्जरित शरीर में यह प्राणी निश्चिन्त बैठा है।
समाधि
सड़क से गुजरती किसी की अर्थी को देखकर यह मत कहना कि बेचारा चल बसा, अपितु उस अर्थी को देखकर सोचना, कि किसी दिन मेरी अर्थी भी इन्हीं रास्तों से यूं ही गुजर जायेगी और लोग सड़कों के दोनों ओर खड़े देखते रह जायेगें, दूसरे की मौत से अपनी मृत्यु का बोध ले लेना चाहिए।
समाधि
हर क्षण हम मृत्यु के समीप पहुँच रहे हैं, न्यूनतम समय में अधिकतम काम करना है, मानसिक वेगों को नियन्त्रित करिए आपको हर जगह इस प्रकार का धीरज अपनाना चाहिए और सांसारिक विषयों और इन्द्रियों के सुखों को पाने के लिए बैचेनी और उत्सुकता से बचना चाहिए, पानी की शक्ति जिस प्रकार बाँध बनाने से बढ़ जाती है ठीक उसी प्रकार मन की शक्ति मन को नियंत्रित करने से बढ़ जाती है।
समाधि
मृत्यु से भय क्यों?- जो जीवन भर मृत्यु की तैयारी करते हैं वे मृत्यु से डरते नहीं हैं, जैसे साल भर पढ़ने वाला विद्यार्थी परीक्षा से घबराता नहीं है।
समाधि
दुनिया में जितने धर्म हैं सभी ने जीना सिखाया, लेकिन जैन धर्म की विशेषता है कि उसने जीने के साथ मरना भी सिखाया है। राम-कृष्ण जीवन सुधारते हैं, तो महावीर मृत्यु भी सुधारते हैं, मृत्यु भी आदमी की परीक्षा है। घर में कैसे जीना राम से सीखिए, कैरियर कैसे बनाना यह कृष्ण से सीखिए और मरण को सुमरण कैसे बनाना है यह महावीर से सीखिए।
समाधि
'राम नाम सत्य है' मुर्दे को नहीं, डोली में बैठने वाले दूल्हे को सुना देना तो उसका जीवन बर्बाद होने से बच सकता है।
समाधि