Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Success & Prosperity

समृद्धि

72 सूत्र

'आत्म विश्वास' सफलता का प्रथम रहस्य है।
समृद्धि
सफल उद्योगपति हमेशा जनता की जरूरत को समझ कर ही उत्पादन करते हैं।
समृद्धि
सफलता के शिखर पर समर्थक कम और विरोधी ज्यादा मिलेंगे उन विरोधियों को सकारात्मक ऊर्जा से शांत करना और संतुलन बनाये रखना आवश्यक है।
समृद्धि
जब भी आप हार जायें उसे सफलता की ओर एक सीढ़ी मानें, जो कि आप तय कर चुके हैं।
समृद्धि
खुश मिजाज और दिल के साफ आदमी का काम नहीं रुकता है।
समृद्धि
सूर्योदय के पहले सभी को सोकर उठ जाना चाहिए यदि पति न भी उठ पाये तो पत्नि को तो उठ ही जाना चाहिए क्योंकि यदि गृहलक्ष्मी सूर्योदय के बाद तक सोती रहती है तो उसके यहाँ की धनलक्ष्मी भाग जाती है।
समृद्धि
जो दुःख से पीड़ित, प्रमादी, नास्तिक, आलसी, अजितेन्द्रिय और उत्साह रहित है, उनके यहाँ लक्ष्मी का वास नहीं होता है।
समृद्धि
जो मैला वस्त्र रखने वाला, दाँतों का मैल साफ न करने वाला, अधिक भोजन करने वाला, कटुवादी, सूर्य उदय तक सोने वाला है उसे लक्ष्मी छोड़ देती है चाहे वह भगवान् ही क्यों न हो?
समृद्धि
कामयाबी के लिए जरूरी है–जो सलाह आप दूसरों को देते हैं, उस पर पहले खुद अमल करें।
समृद्धि
हर सफल व्यक्ति खुश और सुखी हो जरूरी नहीं है।
समृद्धि
अगर कार्यक्षेत्र अपनी पसंद और रुचि का है तो आप जीवन में सफल होंगे।
समृद्धि
जो सफलता बिना धोखे या बेईमानी से प्राप्त होती है, वही सच्ची सफलता है।
समृद्धि
निरोगी रहना, ऋणी न होना, परदेश में न रहना, अच्छे लोगों के साथ मेल होना, अपनी वृत्ति से जीविका चलाना और निर्भय होकर रहना; ये छह मनुष्य लोक के सुख हैं।
समृद्धि
मृदु कामों से भी स्वार्थ सिद्धियाँ की जा सकती हैं।
समृद्धि
जो जीवन लक्ष्य हीन होता है, वह साथ ही सुख हीन भी होता है।
समृद्धि
जिसको रहस्य गोपनीय रखना नहीं आता वह सफलता का मुँह नहीं देख सकता है।
समृद्धि
कामयाबी के दरवाजे उन्हीं के लिए खुलते हैं जो सम्यक् पुरुषार्थ करते हैं।
समृद्धि
असफलताओं के अनुभव के बिना सफलता का लाभ नहीं उठाया जा सकता है।
समृद्धि
आशा को अपनी सहेली और उत्साह को अपना मित्र बनाइये क्योंकि यही सफलता के साथी हैं।
समृद्धि
आप अपनी सफलता का अनुमान इस बात से भी लगा सकते हैं कि अन्य व्यक्ति आपका कितना विश्वास करते हैं और आपको निर्बल अथवा भीरु तो नहीं समझते हैं।
समृद्धि
सफलता साहस से मिलती है, फिर भले ही वह बुद्धिहीन हो या बुद्धिमान धर्मात्मा हो या अधर्मात्मा।
समृद्धि
सफलता के लिए जो त्यागना है उसे त्यागें और जिसे अपनाना है उसे अपनाएँ, तभी आपकी सफलता निश्चित है।
समृद्धि
अगर आपका कोई उद्देश्य नहीं है तो आप हमेशा दूसरों के उद्देश्य को पूरा करने के लिए कार्य करते रहेंगे।
समृद्धि
सफलता की खुशी मनाना अच्छा है, पर उससे ज्यादा जरूरी है, अपनी असफलता से सीख लेना।
समृद्धि
सिर्फ एक कार्य पर निर्भर होकर आजीविका चलाना आपकी संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है। बिना सही योजना के सफलता अधूरी है।
समृद्धि
सफलता पाने का कोई छोटा रास्ता नहीं है, पूरी मेहनत, निष्ठा, ईमानदारी, लगन, विश्वास के साथ किए गये कार्यों में विफलता की कोई जगह भी नहीं है।
समृद्धि
जब भी आप कुछ अच्छा या अलग कार्य करना चाहेंगे, लोग हँसेंगे मजाक उड़ायेंगे, आप अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें, आपकी सफलता ही उन्हें जवाब देगी, जैसे ही आप सफल होंगे वही लोग पलट जायेंगे और कहेंगे कि आप सही थे, वे आपका गुणगान करेंगे।
समृद्धि
लोग आपके खिलाफ बात कर रहे हैं, मतलब आप आगे बढ़ रहे हैं।
समृद्धि
काम ऐसा करो कि नाम हो जाये या फिर नाम ऐसा करो कि सुनते ही काम हो जाये।
समृद्धि
जिसको अपने काम पर भरोसा होता है वो 'नौकरी' करते हैं, जिनको अपने आप पर भरोसा होता है वो 'व्यापार' करते हैं।
समृद्धि
सपने वो नहीं होते जो नींद में आते हैं, सपने वो होते हैं जिनके पूरे होने तक नींद नहीं आती है। सफलता न मिलने के पीछे कोई वजह हो सकती हैं? किन्तु सफलता के पीछे वजह होगी सिर्फ कोशिश और आत्म विश्वास।
समृद्धि
सफलता तुम्हारा परिचय दुनिया से कराती है असफलता तुम्हें दुनिया का परिचय कराती है। कई विफलताएँ इसलिए होती हैं कि लोग सफलता के नजदीक पहुँचते ही प्रयास बंद कर देते हैं और लोगों को ये आभास नहीं होता कि जब उन्होंने प्रयास बंद कर दिये थे उस वक्त वे सफलता के कितने नजदीक थे।
समृद्धि
सफल व्यक्ति और दूसरों के बीच में अन्तर ताकत का नहीं, ज्ञान का नहीं, बल्कि इच्छा शक्ति का होता है।
समृद्धि
मुकाम वो चाहिए कि जिस दिन हार भी जाऊँ तो उस दिन जीतने वाले से ज्यादा मेरे चर्चे हों। हार तो कभी होती नहीं या तो जीत मिलती या सीख मिलती।
समृद्धि
बड़े क्षेत्रों पर आधिपत्य करो, लेकिन छोटे क्षेत्रों को भी विकसित करो।
समृद्धि
उसी का जन्म सफल है जिसके जन्म लेने से वंश की उन्नति होती है, नहीं तो परिवर्तनशील संसार में कौन नहीं मरता है और कौन जन्म नहीं लेता है?
समृद्धि
विनय से पूर्ण, ज्ञान युक्त तर्क ही सफलता की कुंजी है।
समृद्धि
किसी देश की उन्नति छोटे विचार के बड़े आदमियों पर नहीं किन्तु बड़े विचार के छोटे आदमियों पर निर्भर है।
समृद्धि
सफलता और अमीरी का निर्णय अगर अंकों के आधार पर होता तो बिल गेट्स सबसे अमीर और तेंदुलकर सबसे सफल खिलाड़ी न होते।
समृद्धि
डोर लम्बी हो तो मतलब यह नहीं कि पतंग ऊपर तक जायेगी उड़ाने का तरीका आना चाहिए, दौलत ज्यादा होने का मतलब सफल जीवन नहीं, जीने का तरीका आना चाहिए।
समृद्धि
विकास के लिए स्वतंत्रता प्रथम सोपान है।
समृद्धि
कभी भी सफलताओं को दिमाग में और असफलता को दिल में जगह नहीं देना चाहिए, क्योंकि सफलता दिमाग में घमंड और असफलता दिल में हीनता पैदा करती है।
समृद्धि
सफलता के तीन मंत्र—दूसरों से ज्यादा जानकारी प्राप्त करें, दूसरों से ज्यादा मेहनत करें, दूसरों की अपेक्षा कई गुना कम उम्मीद करें।
समृद्धि
दुनिया की हर वस्तु ठोकर लगने से टूट जाती है परन्तु एक 'सफलता' ही है जो ठोकरें खाकर मिलती है।
समृद्धि
असफलता के कारण—योजना का अभाव, अनुभव का अभाव, अनुशासन का अभाव, उत्साह की कमी, आत्म विश्वास की हीनता, नकारात्मक सोच, अनुत्साह प्रवृत्ति, विपरीत संगति, अनेकों से शत्रुता, अपनों के प्रति द्रोह, अवसर पर चूक, ईर्ष्यालु स्वभाव, पुरुषार्थ और भाग्य की हीनता, रीति-नीति की अनभिज्ञता, समय सूचकता का अभाव, दूसरों को दोष देने की आदत इत्यादि।
समृद्धि
सफलता के सूत्र—व्यवहार कुशलता, मिलनसार प्रवृत्ति, मधुरवाणी, विनयशीलता, प्रसन्न मुद्रा, समय की पकड़, क्षमाशीलता, लक्ष्य निर्धारण, आशावादी सोच, स्वयं को प्रोत्साहित करने की प्रवृत्ति, उपकारियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करें, प्रशंसकों को पूँजी की तरह आदर दें, किसी की निंदा न करें, सबका सहयोग लेने की कला, प्रबल पुरुषार्थ करें, सही योजना बनायें, धैर्य रखें, बुद्धि का सही उपयोग करें, रीति-नीति से काम लें, आत्म विश्वास से भर जायें, अशुभ विचारों की उपेक्षा करें इत्यादि।
समृद्धि
सफलता के लिए बड़ों का सम्मान करो, छोटो को स्नेह करो, ईश्वर के प्रति पूर्ण कृतज्ञ रहो और मेहनत व ईमानदारी से काम करो।
समृद्धि
जीवन में असली सफलता हम तभी हासिल कर सकते हैं जब हम दूसरों को सफल होने में मदद करना सीख लेते हैं।
समृद्धि
हमारी ओर से सबको दस उपहार सुख, शान्ति, समृद्धि, संस्कार, स्वास्थ्य, संकल्प, सरलता, सहजता, सफलता और संयम प्राप्त हों।
समृद्धि
जब भाग्य अनुकूल होता है तब जिनके बारे में कुछ सोचा नहीं गया है, ऐसी सब सम्पत्तियाँ अपने आप आ जाती हैं।
समृद्धि
मरने के बाद तुम्हें भुला न दिया जाय इसके लिए दो में से एक काम जरूर करो या तो पढ़ने लायक कुछ लिख जाओ या लिखने लायक कुछ कर डालो।
समृद्धि
प्राप्त करना है तो रागी विरागी दोनों गावे ऐसा यश प्राप्त करो।
समृद्धि
यश:कीर्ति पुण्य प्रकृति है जो पुण्य पुरुषों की स्तुति वंदना के बिना प्राप्त नहीं होती है।
समृद्धि
यश:कीर्ति पुण्य का फल है, गुणों का आंकलन नहीं।
समृद्धि
देह छूटने के बाद राख हो जाने पर प्राणी अपने यश से वैसे ही जाना जाता है, जैसे कपूर अपनी सुगंध से।
समृद्धि
बड़े आदमियों का नाम फैलने से जितने फायदे हैं, उतनी ही मुश्किलें भी हैं।
समृद्धि
संसार में समाज का सम्मान झूठा है क्योंकि समाज की निगाहें बदलते वक्त नहीं लगता है लोग जिस मुख से प्रशंसा करते है उसी मुख से निंदा करने लगते हैं।
समृद्धि
जो देश व समाज के लिए जीते हैं उनका अभिनंदन होना चाहिए, उनका शरीर चले या न चले उनका यश चलता है, वे जिंदा रहे या न रहे उनका यश जिंदा रहता है।
समृद्धि
जो राजा प्रीति के साथ दान देता है और प्रेम के साथ शासन करता है उसका यश सारे जगत् में फैल जाता है।
समृद्धि
जहाँ पर मूर्खों की पूजा नहीं की जाती है, धान्य का संचय किया जाता है, दाम्पत्य जीवन में कलह नहीं है, वहाँ पर लक्ष्मी स्वयं आ जाती है।
समृद्धि
स्वभाव की पवित्रता, मित्रता, त्याग, सत्य, कृतज्ञता, ब्रह्मचर्यता और शूरता ये गुण सम्पत्ति के कारण हैं।
समृद्धि
ईमानदारी रखने से और अच्छी चीज देने से व्यापार में कभी फैल नहीं होते हैं।
समृद्धि
सफलता के लिये लक्ष्य न बदलें, रास्ता बदल दें।
समृद्धि
सफलता यदि सरलता से मिल जायेगी तो उसका आनन्द ही समाप्त हो जायेगा।
समृद्धि
आत्म विश्वास सृजन एवं अन्य लोंगों को अपनी और आकर्षित करने के लिए यह भी आवश्यक है कि आप अपनी औकात के अनुसार समृद्ध दिखने का यत्न करें।
समृद्धि
सफलता इसमें नहीं कि हमसे भूल कभी न हो, बल्कि इसमें है कि एक भूल हमसे दोबारा न हो।
समृद्धि
विलम्ब और विखराव सफलता के दो विघ्न हैं।
समृद्धि
सफल व्यक्ति बड़े कामों से महान् नहीं बनता बल्कि छोटे कामों को अच्छे ढंग से करता है।
समृद्धि
सफलता के दस सूत्र- 1.जीवन भर सीखते रहें, 2.थोड़ा कार्य करें किन्तु श्रेष्ठ करें, 3.स्वयं एवं दूसरों के प्रति ईमानदार रहें, 4.अपने शरीर और स्वास्थ्य का ध्यान रखें, 5.सन्तोषी बने, 6.दूसरों को सम्मान देना सीखें, 7.जितनी बड़ी चादर उतने पैर फैलायें(आय से व्यय कम करें), 8.सुने अधिक बोले कम, 9.वचन को पूरा करें, 10.भविष्य की चिन्ता छोड़ें, भूत को भूल जाएँ, वर्तमान में जीना सीखें।
समृद्धि
जिसकी उच्चकोटि की मानसिकता होती है उसका भाग्य समुन्नत होता है।
समृद्धि
साहस में लक्ष्मी का वास होता है।
समृद्धि
संसार में पुण्यशाली मनुष्य की लक्ष्मी विवेक के साथ, बुद्धि शास्त्र के साथ, शक्ति शान्ति के साथ, प्रभुता न्याय/नीति के साथ और श्रद्धा धर्म के साथ मिलकर सफल होती है।
समृद्धि