Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Anger & Forgiveness

क्षमा

455 सूत्र · पृष्ठ 2 / 7

जब स्वयं के अन्दर गंदगी होती है तब दूसरों की गालियाँ बुरी लगती हैं।
क्षमा
अगर आप छोटी मामूली बातों पर गुस्सा होते हैं, तो इससे आपकी हैसियत का भी पता लगता है।
क्षमा
जब आप सबकी बात नहीं मानते, तो फिर दूसरा कोई आपकी बात न माने तो आपको नाराज नहीं होना चाहिए।
क्षमा
उस समय आप विशेष शांत रहें, जब अपना गुस्सा कोई आप पर उतारे।
क्षमा
पुरुष गुस्से से और महिलाएँ जिद से दुःखी होती हैं।
क्षमा
अति क्रोध, कटु वाणी, दरिद्रता, स्वजनों से वैर, नीचों का संग और अकुलीन की सेवाएँ यह सब नरकवासियों के लक्षण हैं।
क्षमा
क्रोध को जीतने के लिए मौन हो जाना, उस जगह को बदल देना, विषय को बदल लेना, अपने हाथ पैर मुँह को ठंडे पानी से धो लेना, दर्पण में अपना चेहरा देखना, अपने मुँह में पानी भर लेना, कुछ समय के लिए श्वास रोक लेना, परमात्मा की मुद्रा को देखना, आदि सूत्रों के उपयोग से क्रोध पर विजय पाई जा सकती है।
क्षमा
ईश्वर ने सबको अपना-अपना गुण दिया है जिससे सबका सम्मान होता है। कोयल की शोभा मधुर स्वर में है, स्त्री की शोभा उसके पतिव्रत होने में है, कुरूप की शोभा उसके विद्वान् होने से है, तपस्वी त्यागी की शोभा उसके क्षमा, शील, संयम से है। यदि कोई तपस्वी होकर भी अति क्रोधित हो जाये तो समाज में उसका सम्मान नहीं होता क्योंकि विपरीत गुणों में सम्मान नहीं मिलता है।
क्षमा
वैर महादुःख दायी है वैर न वैर मिटाता है, वैर निरन्तर प्राणी को भवसागर में भटकाता है।
क्षमा
जैसे धागे में गाँठ लग जाने पर वह छेद से पार नहीं हो पाता है, वैसे ही मन में वैर की गाँठ लग जाने पर व्यक्ति संसार पार नहीं कर पाता है।
क्षमा
क्रोध से ज्यादा खतरनाक वैर है क्योंकि क्रोध तो अल्प समय के लिए आता है किन्तु वैर की गाँठें वर्षों तक कब्जा जमाए रहती हैं, जिससे आपसी बोल-चाल भी बंद हो जाती है और प्रेम-स्नेह के सम्बन्ध खत्म हो जाते हैं तथा सुलह के सारे रास्ते भी बंद हो जाते हैं और इसी से तनावपूर्ण जीवन हो जाता है सदैव आर्त-रौद्र ध्यान चलता रहता है, जिससे नियम से अधोगति में जाना पड़ता है।
क्षमा
वैर की सड़ांध संड़ास की तरह होती है, जिससे जीवन का एक क्षण भी शान्ति से नहीं कटता है, अतः क्रोध को छोड़िये क्योंकि क्रोध नहीं होगा तो वैर की उत्पत्ति ही नहीं हो सकती है। आग में खेलने वालों का अन्त राख की ढेरी है।
क्षमा
चार बार भोजन करने में जितनी ऊर्जा संग्रह होती है वह एक बार के क्रोध करने से नष्ट हो जाती है।
क्षमा
जिस समय मन क्रोध से उत्तेजित हो उस समय कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए।
क्षमा
ज्यादा क्रोध और चिड़चिड़ापन से लीवर, गालब्लेडर को हानि होती है।
क्षमा
क्रोध और घमंड स्वयमेव विपत्ति उत्पन्न करते हैं।
क्षमा
वैराग्य संसार से पार करा देता है, लेकिन वैर संसार में डुबो देता है।
क्षमा
बदला लेने से इंसान अपने दुश्मन के समान हो जाता है किन्तु न लेने से वह सामने वाले से उत्तम बन जाता है।
क्षमा
कुश्ती में सामने वाले को पछाड़ने वाला बलशाली नहीं है, बल्कि क्रोध को काबू में रखने वाला बलशाली है।
क्षमा
अपने शत्रु के लिए (अपनी भट्टी को) इतना गरम न करें कि वह आपको ही भूनकर रख दे। किसी को अपना शत्रु मत बनाओ, एक शत्रु सौ मित्रों के होते हुए भी आपका बहुत कुछ बिगाड़ सकता है।
क्षमा
शत्रु का प्रसन्न होना व रुष्ट होना बराबर है, वह सब प्रकार से हानि पहुँचाता है, पानी चाहे ठंडा हो या गर्म वह अग्नि को बुझा ही डालता है।
क्षमा
जो स्वयं दोषी होकर भी निर्दोष आत्मीय व्यक्ति को कुपित करता है, वह सर्पयुक्त घर में रहने वाले मनुष्य की भाँति रात में सुख से नहीं सो पाता है।
क्षमा
साधुता वही है कि स्वयं समर्थ होते हुए भी क्षमा भाव रखे।
क्षमा
सच्चा साहस और शराफत सदा साथ रहते हैं, सबसे वीर लोग सबसे अधिक क्षमाशील व झगड़ों से बचने के लिए प्रयासशील होते हैं।
क्षमा
दूसरों के घर में आग लगाने से पहले स्वयं के हाथ में मशाल लेनी पड़ती है।
क्षमा
क्षमाशील होना सौ रोगों की एक दवा है
क्षमा
क्षमा कर देना दुश्मन पर विजय है।
क्षमा
विद्वान् क्षमा से ही शुद्ध होते हैं।
क्षमा
क्षमा दंड से बड़ी है, दंड देता है मानव किन्तु क्षमा प्राप्त होती है देवता से, दंड में उल्लास है पर शान्ति नहीं और क्षमा में शान्ति भी है और आनंद भी।
क्षमा
क्रोध एक गर्म लोहा है जबकि क्षमा ठंडा लोहा है, ठंडा लोहा गर्म लोहे को काट देता है, यही क्षमा की विशेषता है।
क्षमा
मित्र की अपेक्षा शत्रु को क्षमा करना सहज है।
क्षमा
शत्रुओं को क्षमा कर देना बदला लेने का सबसे सुन्दर साधन है।
क्षमा
क्षमा से बढ़कर और किसी बात में पाप को पुण्य बनाने की शक्ति नहीं है।
क्षमा
दुनिया का सारा विज्ञान भी क्षमा के बिना आपका कल्याण नहीं कर सकता है।
क्षमा
शाकाहारी उतनी जल्दी मानसिक संतुलन नहीं खोता, जितना शीघ्र मांसाहारी खो देता है। क्रोध का फल तो कुछ अच्छा होता ही नहीं, चाहे न्याय पर हो या अन्याय पर।
क्षमा
जातीय गुटों के संघर्ष के कारण कर्फ्यू में ड्यूटी दे रहे एस.पी. के मुँह पर एक लड़के ने थूक दिया इंस्पेक्टर ने लड़के के माथे पर रिवाल्वर तान दी, एस.पी. ने रोका रुमाल से पोंछकर कहा जो काम रुमाल से हो जाये उसके लिए रिवाल्वर चलाने की क्या आवश्यकता है।
क्षमा
क्रोध और असहिष्णुता सही समझ के दुश्मन है क्रोध बुद्धि के दीप को बुझा देता है।
क्षमा
क्रोध को काबू में रखने से उसके फायदे अनेक हैं, स्वास्थ्य बहुत अच्छा रहेगा, पारिवारिक रिश्ते बहुत मधुर रहेंगे, मैत्रिक व्यवसायिक सम्बन्ध मधुर रहेंगे, आपकी छवि बहुत ही खास रहेगी, इज्जत मिलेगी, शोहरत मिलेगी, सफलता मिलेगी, हर परिस्थिति में तालमेल बैठा सकेंगे।
क्षमा
हमारे व्यवहार में क्रोध ही हमारे विनाश, पतन, हानि, नुकसान का कारण बनता है।
क्षमा
भगवान् महावीर का मार्ग शत्रु मिटाने का नहीं शत्रुता मिटाने का है।
क्षमा
माफी माँगना आसान है, माफ करना बहुत कठिन है, माफ करने की कोशिश करो, अपनी राहें स्वयं ही आसान हो जायेंगी।
क्षमा
किसी के दिल को चोट पहुँचा कर माफी माँगना बहुत आसान है, लेकिन खुद चोट खाकर किसी को माफ करना बहुत मुश्किल है।
क्षमा
क्षमा करने से पिछला समय तो नहीं बदलता लेकिन भविष्य सुनहरा हो जाता है।
क्षमा
जो पहले क्षमा माँगता है वह सबसे बहादुर है, जो सबसे पहले क्षमा करता है वह सबसे शक्तिशाली है, जो सबसे पहले भूल जाता है वह सबसे सुखी होता है।
क्षमा
क्षमा से टूटे दिल फिर से जुड़ जाते हैं और जीवन की गाड़ी पुनः प्रेम की पटरी पर दौड़ने लगती है।
क्षमा
वात्सल्य के बिना क्षमा नहीं हो सकती है।
क्षमा
तप करते जो भूख सहें वे ऋषि उच्च महान्। क्षमा शील के बाद ही, पर उनका सम्मान। अत्यन्त क्रोधी स्वभाव का नेत्रधारी भी अंधा ही होता है।
क्षमा
कुपित व्यक्ति की पहले विद्या धुँधली हो जाती है और बाद में भृकुटी टेढ़ी हो जाती है। प्रजा का कोप सब कोपों से बड़ा होता है।
क्षमा
अनंत दुष्टों में से मैं कितनों को मार सकूँगा ? किन्तु क्रोध को चित्त में मार देने से मैंने सभी शत्रु मार दिये।
क्षमा
क्रोध के लक्षण शराब और अफीम दोनों से मिलते हैं, शराबी की भाँति क्रोधी मनुष्य भी पहले आवेश वश लाल-पीला होता है, फिर आवेश के मन्द पड़ जाने पर भी यदि क्रोध न घटा तो वह अफीम का काम करता है और मनुष्य की बुद्धि को मन्द कर देता है, अफीम की तरह वह दिमाग को कुतर कर खा जाता है।
क्षमा
क्रोध बैर का अचार या मुरब्बा है।
क्षमा
मौन वह मंत्र है जिसके आगे क्रोध की सारी शक्ति विफल हो जाती है।
क्षमा
पाँच मिनट का क्रोध जन्म भर की मित्रता को नष्ट कर देता है।
क्षमा
क्रोधी मनुष्य उन्हें आघात पहुँचाते हैं जो उनके सर्वोत्तम हितैषी होते हैं।
क्षमा
क्रुद्ध होने का अर्थ है दूसरों की गलतियों का स्वयं को दण्ड देना। क्षमा असमर्थ मनुष्यों का गुण तथा समर्थ मनुष्यों का भूषण है।
क्षमा
क्षमा सर्व तपस्याओं का मूल है, क्षमा करना अच्छा है, भूल जाना सर्वोत्तम है।
क्षमा
क्षमा हीन व्यक्ति जो भी पुण्य करता है वह निरर्थक होता है।
क्षमा
दंड देने की शक्ति होने पर भी दंड न देना सच्ची क्षमा है।
क्षमा
क्षमा और उदारता वही सच्ची है, जहाँ स्वार्थ की भी बलि हो।
क्षमा
दूसरों से गाली सुनकर भी स्वयं उन्हें गाली न दें, गाली सहन करने वाले का रोका हुआ क्रोध ही गाली देने वाले को जला डालता है और उसका पुण्य भी ले लेता है।
क्षमा
बदला लेने का आनन्द तो एक ही दिन का होता है किन्तु क्षमा करने वाले का गौरव सदा स्थिर रहता है।
क्षमा
यदि तुम में प्रहार करने की शक्ति न भी हो तब भी क्रोध से बढ़कर बुरा काम नहीं यदि तुममें शक्ति हो तब भी क्रोध करना बुरा है।
क्षमा
अग्नि उसी को जलाती है जो उसके पास जाता है, परन्तु क्रोधाग्नि सारे कुटुम्ब को जला डालती है।
क्षमा
जो पुरुष नारी को क्षमा नहीं कर सकता, उसे उसके महान् गुणों का उपयोग करने का कभी अवसर प्राप्त नहीं होता है।
क्षमा
ब्राह्मणों के क्रोध को दान से, वैश्यों के क्रोध को मीठे वचनों से, क्षत्रिय के क्रोध को आदर सम्मान से, शूद्र के क्रोध को शक्ति से व गुरुजनों के क्रोध को प्रणाम करके शान्त करना चाहिए।
क्षमा
दुःख देने वाले व्यक्ति को शिक्षा अथवा दण्ड देने का यही एक उत्तम उपाय है कि तुम उसके बदले में भलाई करो जिससे वह मन ही मन लज्जा से भर जावे, यही उसके लिए गहरी मार है।
क्षमा
यदि तुम्हारा पड़ोसी जानबूझ कर झगड़ा करने की भावना से तुम्हें सताता हो तो भी सर्वोत्तम बात यही है कि तुम अपने हृदय में बदले की भावना न रखो और न बदले में चोट पहुँचाओ।
क्षमा
दूसरों की गलती पर स्वयं को सजा देना और स्वयं की गलती पर दूसरों को सजा देना सबसे बड़ा अपराध है।
क्षमा
प्रभु का भूषण क्षमा, स्त्री का आभूषण लज्जा, सैनिक का भूषण शौर्य तथा तपस्वियों का आभूषण वैराग्य है।
क्षमा
घृणा व द्वेष से ग्रसित व्यक्ति दूसरों को सुख नहीं पहुँचा सकता है।
क्षमा
ईर्ष्या अपनी हीनता के बोध से जन्म लेती है और वह उस हीनता को दूर नहीं करती, सिर्फ दबाती है। ईर्ष्या रखने वाले मनुष्य को इतना दुःख अपनी असफलता पर नहीं होता जितना दुःख दूसरे की सफलता देखकर होता है।
क्षमा
स्त्रियाँ सिर्फ ईर्ष्या से दुःखी होती हैं।
क्षमा
टकराव टालिए क्योंकि टकराव ही बिखराव का कारण है।
क्षमा
ईर्ष्या की आग को बुझा दीजिए नहीं तो यह आपको जलाकर राख कर देगी।
क्षमा
अति क्रोध, कटुवाणी, दरिद्रता, बंधु से वैर, नीच की संगत और अकुलीन की सेवा नरक में रहने वाले के चिह्न हैं।
क्षमा