Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

शत्रु का प्रसन्न होना व रुष्ट होना बराबर है, वह सब प्रकार से हानि पहुँचाता है, पानी चाहे ठंडा हो या गर्म वह अग्नि को बुझा ही डालता है।

An enemy's pleasure and displeasure are alike — he harms you in every way; whether water is cold or hot, it puts out fire all the same.

— आराध्य सूत्र · #2341

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा