Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Anger & Forgiveness

क्षमा

455 सूत्र · पृष्ठ 3 / 7

कठोरता एक कमजोर आदमी की झूठी ताकत है।
क्षमा
मानव को क्रोध से नहीं प्रेम से जीतो। क्रोध को क्रोध से नहीं क्षमा से जीतो ॥ आप यदि किसी का दिल जीतना चाहते हो। तो अधिकार से नहीं, समर्पण व प्रेम से जीतो ॥
क्षमा
निरर्थक कलह करना मूर्खों का काम है, बुद्धिमानों को इसका त्याग करना चाहिए, ऐसा करने से लोक में यश मिलता है और अनर्थ का सामना नहीं करना पड़ता।
क्षमा
खून का दाग खून से नहीं धुलता, उत्तेजना-उत्तेजना से शांत नहीं होती, हमें स्वयं शांत होना होगा।
क्षमा
बदला लेना अपनी उन्नति में बाधाएँ खड़ी करना है।
क्षमा
दूसरों पर दोषारोपण नहीं करोगे तो तुम पर भी दोषारोपण नहीं किया जायेगा। दूसरों को दोषी नहीं ठहराओगे तो तुम्हें भी दोषी नहीं ठहराया जायेगा। दूसरों को क्षमा करोगे तो तुम्हें भी क्षमा किया जायेगा।
क्षमा
मूर्ख मनुष्य कुछ भी कह दे, विद्वान् पुरुष को वह सब सह लेना चाहिए।
क्षमा
गरम स्वभाव सब सिद्धियों का प्रथम विघ्न है।
क्षमा
बुद्धिमान झगड़े में न पड़े, व्यर्थ वैर से अलग रहे, थोड़ी हानि सह ले, वैर से धन की प्राप्ति हो, तो भी उसे छोड़े।
क्षमा
घृणा और द्वेष जब बढ़ता है तब वह शीघ्र ही पतन के गड्ढे में गिराता है।
क्षमा
शत्रु में दोष देखकर बुद्धिमान झट वहीं क्रोध को व्यक्त नहीं करते हैं, अपितु समय को देखकर उस ज्वाला को मन में ही समाये रखते हैं।
क्षमा
पुराने आघातों का स्मरण करना मानसिक अन्धकार है और आघात कर्ताओं से बदला लेने का विचार करना मानसिक आत्मघात है।
क्षमा
विद्वान् लोग भी आवेग से अन्धे होने पर कुपथ में पैर धर ही देते हैं।
क्षमा
द्वेष से किसमें दोष नहीं आ जाता? प्रेम से किसकी उन्नति नहीं होती?
क्षमा
अपमान से उत्पन्न लड़ाई को मान से शांत कर दें, अपमान से उद्भूत युद्ध के लिए सामनीति अथवा प्रणाम उपाय है।
क्षमा
जब दो लोग झगड़ते हैं तब दोनों गलती पर होते हैं।
क्षमा
क्रोध से वैसे काम नहीं बनते जैसे शान्ति से बनते हैं।
क्षमा
अपने से अधिक शक्तिशाली के साथ वैर करना परिणाम में दुःखद होता है।
क्षमा
किसी के मुख से कोई बात अपने विरुद्ध सुनकर उसे अपना विरोधी मत मानों बल्कि विरोध का कारण ढूँढ़ों और उसे मिटाने की सच्चे हृदय से चेष्टा करो।
क्षमा
यदि आपकी बुराई की जाये और वह सच हो तो स्वयं को सुधार लो और यदि वह असत्य हो, तो उस पर मुस्करा दो।
क्षमा
कभी किसी का विरोध नहीं करना चाहिए क्योंकि विरोध करने से अपना ही नाश होता है, अन्य का कुछ नहीं बिगड़ता है।
क्षमा
प्रतिकूलता में क्रोध और अनुकूलता में मान उत्पन्न होता है।
क्षमा
आवेश शान्त होने पर जो काम किया जाता है, वही फलदायी होता है।
क्षमा
बदला लेना साहस नहीं, दुर्व्यवहार का सहना साहस है।
क्षमा
अपने साथ उपकार करने वालों के साथ जो साधुता बरतता है उसकी कोई तारीफ नहीं है। महात्मा तो वह है, जो अपने साथ बुराई करने वालों के साथ भी भलाई करे।
क्षमा
अपकार करने वालों को यदि बदला देना चाहते हो तो उपकार दो, इसमें तुम्हारी विलक्षण विजय होगी। वर्तमान परिणमन पर ध्यान दो।
क्षमा
वैर पाँच कारणों से होता है–स्त्री के लिए, घर और जमीन के लिए, कठोर वाणी के कारण जातिगत द्वेष के कारण और किसी समय किए हुए अपराध के कारण।
क्षमा
जो बुरा भला कहे जाने पर भी क्रोधित नहीं होता है, न हि अनुचित बोलता है धैर्य शौर्य आदि धर्मों से युक्त होने पर भी जो घमंड नहीं करता है, निरंतर विपत्तियाँ आने पर भी जो कातर नहीं होता है वह सज्जन कहलाता है।
क्षमा
'उग्रता' के साथ 'निष्ठुरता' या 'निर्दयता' के मेल से 'क्रूरता' का आविर्भाव होता है।
क्षमा
झगड़ा होने पर जो पहले चुप हो जाये, वह उत्तम वंश में जन्मा व्यक्ति है।
क्षमा
दुष्ट लोग भय दिखाकर वश में किए जाते हैं, क्षमा दिखाकर नहीं।
क्षमा
दूसरे की मान कषाय पसंद न होना भी मान कषाय का फल है।
क्षमा
टकराव में बिखराव होगा, खम्भे की तरह सिर बचाकर निकल जाइये।
क्षमा
क्रोध का एक कदम जीवन को बहुत पीछे धकेल देता है।
क्षमा
मनुष्य सुबह से शाम तक काम करके उतना नहीं थकता जितना क्रोध और चिंता से एक क्षण में थक जाता है।
क्षमा
क्रोध और आँधी शांत होने के बाद पता चलता है कि कितना नुकसान हुआ है।
क्षमा
बुरा करने वाले का भी भला करना परमार्थ की वृत्ति है।
क्षमा
ज्ञान का भूषण क्षमा है।
क्षमा
कामी-क्रोधी जल्दी बूढ़े होते हैं।
क्षमा
चाहे कोई बुरा करे या अच्छा पर आप किसी के प्रति बुरे विचार नहीं लाना यही आपकी अच्छाई है।
क्षमा
काँच को आइना बनाने के लिए उसके पीछे 'पारा' चढ़ाया जाता है, तभी तो जिसको आइना दिखाओ उसी का पारा चढ़ जाता है।
क्षमा
संसार में रहना चाहते हो तो माँ बनकर रहना और संसार से दूर होना चाहते हो तो महात्मा बनकर रहना सीख लो, बस क्षमा आपके रोम-रोम में बस जायेगी, जिससे जीवन स्वर्ग बन जायेगा, मन में कुछ भी आये उसे वचन से बोलना मत तो सारी दूरियाँ समाप्त हो जायेगी।
क्षमा
शत्रु कौन होता है? आप जो चाहते है वो मिलता रहे तब तो ठीक, आपने जो चाहा नहीं हुआ, जिससे चाहा नहीं किया, जैसा चाहा नहीं किया, बस वही शत्रु बन गया, शत्रु कोई वस्तु नहीं सिर्फ कल्पना है। 'शरीर की रक्षा करना पर अशरीरी होने के लिए'।
क्षमा
दुश्मनों की मदद दिल से कीजिए क्योंकि कहते हैं बदला लेना बुजदिलों का काम है।
क्षमा
जिनवाणी बदला लेना नहीं बदल जाना सिखाती है।
क्षमा
क्षति चाहे कितनी ही बड़ी क्यों न उठानी पड़ी हो, परन्तु बड़प्पन इसी में है कि मनुष्य उसे मन में न लावें और बदला लेने के विचार से दूर रहें।
क्षमा
संसार त्यागी पुरुषों से भी बढ़कर सन्त वह है, जो अपनी निन्दा करने वालों की कटुवाणी को सहन कर लेता है।
क्षमा
उपवास करके तपश्चर्या करने वाले निंसन्देह महान् हैं, पर उनका स्थान उन लोगों के पश्चात् ही है, जो अपनी निन्दा करने वालों को क्षमा कर देते हैं।
क्षमा
विद्वेष का फल बुरा होता है, जबकि भलाई का परिणाम शान्ति और समन्वयकारी होता है।
क्षमा
दूसरों को अधिकार या क्रोध से नहीं प्रेम से जीता जाता है।
क्षमा
एक कठोर दण्ड बरसों के प्रेम को मिट्टी में मिला देता है।
क्षमा
अपने शत्रु से प्रेम करो, जो तुम्हें सताये उसके लिए प्रार्थना करो।
क्षमा
महान् वह है जिसने अपने दुश्मनों को हरा दिया किन्तु महामना वह है जिसने उन्हें अपना बना लिया है।
क्षमा
किसी की नफरत पाकर विजित होने की अपेक्षा प्यार पाकर हार जाना अच्छा है।
क्षमा
जो अत्यन्त कुपित होने पर भी दुर्वचन नहीं बोलता वह समस्त पृथ्वी पर श्रेष्ठ धर्मात्मा है।
क्षमा
क्रोध की भाषा ही महाभारत की परिभाषा है।
क्षमा
कुलीन व्यक्ति क्रोधित होने पर भी असभ्य नहीं बोलता है, निश्चय ही गन्ना निचोड़े जाने पर भी मीठा ही उगलता है। नीच व्यक्ति सैंकड़ों गुणों से सहित होने पर भी जो हँसी में कहता है, वह झगड़े में भी कथनीय नहीं होता है।
क्षमा
जो अत्यन्त क्रोधी होता है, बैर नहीं छोड़ता है, कुछ भी बकता रहता है, धर्म और दया से रहित होता है, दुष्ट होता है और किसी के वश में नहीं आता है वह कृष्ण लेश्या वाला कहलाता है।
क्षमा
एक बार का गुस्सा दिमाग के दस हजार ज्ञान तन्तुओं को नष्ट कर देता है।
क्षमा
परेशानी में एकदम प्रतिक्रिया न करें- उत्तेजित अवस्था में मन की विवेक शक्ति नष्ट हो जाती है, लोगों के माँगने पर ही अपनी सफाई दीजिए, अपने निर्दोष होने को लोगों पर थोपिये नहीं, सलाह या उत्तर देते समय आपकी आवाज हमेशा नम्र, आदर पूर्ण और नियन्त्रित होनी चाहिए, आपकी चाहे कितनी भी आलोचना की जाए या दोष लगाया जाय, आपको कभी अनियन्त्रित तरीके से व्यवहार नहीं करना चाहिए और जबाव देते समय कभी चीखना या चिल्लाना नहीं चाहिए।
क्षमा
निन्दा और नुकसान होने पर भी चेहरे की सौम्यता बनाये रखने वाला और जीवन की सबसे बड़ी घटित घटनाओं को भूलने वाला सदा सुखी रहता है।
क्षमा
अग्नि वायु से और कषाय असहिष्णुता से भड़कती है।
क्षमा
अति प्रिय मनुष्य भी क्रोध करने से शत्रु बन जाते हैं, अयोग्य कार्य से यश भी अपयश रूप परिणमन कर जाता है।
क्षमा
गुस्सा कमजोरी की निशानी है- आप गुस्से की बजाय अपने व्यक्तित्त्व के बल पर कार्य करवा सकते हैं, किसी व्यक्ति द्वारा कोई कार्य करवाने के लिए आपका गम्भीरता पूर्वक कहना ही पर्याप्त होना चाहिए, आपके शब्दों और भावों में महान शक्ति है।
क्षमा
बुराईयों का बदला न लीजिए- दूसरा क्षमा करने योग्य न हो तो भी आप क्षमा करके हल्के हो जाते हैं, बदला लेने का आनन्द क्षणिक होता है एवं क्षमा करने का आनन्द स्थाई होता है।
क्षमा
छोटी-छोटी बातों पर परेशान मत होइये- उदार मन के बनिये, छोटी-छोटी बातों का बतङ्गड़ न बनाइये, भूलने और क्षमा करने के गुणों का विकास कीजिए, छोटी-छोटी बातों पर बिगड़ने से केवल आपके झूठे अहङ्कार को सन्तोष मिलता है।
क्षमा
बुरा व्यवहार करने वालों से लड़िए मत- अपना स्तर न गिराकर, उच्च मानसिक स्थिति और आदर्श को बनाए रखकर बुरा व्यवहार करने वालों की उपेक्षा कर देनी चाहिए।
क्षमा
सहनशीलता का विकास कीजिये- सहनशीलता सबसे महान गुण है, अपने प्रति कठोर बनें जबकि दूसरों के दोषों तथा कमियों के प्रति उदार, दूसरों के अपराधों को भूलने और क्षमा करने से मन और चेतना शक्तिशाली और शुद्ध बनती है, एक सहनशील व्यक्ति सभी सीमाओं को पार कर किसी भी ऊँचाई पर पहुँच सकता है।
क्षमा
क्रोध एक ऐसी अदृश्य ज्वाला है जिसके अङ्गारों में मनुष्य भीतर ही भीतर सुलगता रहता है, और अपने अद्वितीय व्यक्तित्व को वह अनुपयोगी राख के ढेर में परिवर्तित कर लेता है।
क्षमा
निन्दक जन पर अज्ञ यह, करता है बहु रोष। पर निज पर करता नहीं, रखकर भी बहु दोष।।
क्षमा
छोटी-छोटी बातों पर बिगड़ने से केवल झूठे अहङ्कार को सन्तोष मिलता है और गलत धारणा रिश्तों को समाप्त कर देती है।
क्षमा
दूसरों से गलती होने पर माफ कर देना, अपने से गलती हो तो माफी माँग लेना ऊँचा उठने का सरल मन्त्र है।
क्षमा
जैसे थोड़े से जामन से दूध फट जाता है, वैसे थोड़े से क्रोध से मोक्ष मार्ग बिगड़ जाता है।
क्षमा
जीवन एक युद्ध है, जीवन में लड़ना पड़ता है चिकित्सक बीमारी से लड़ता है, वकील अन्याय से लड़ता है, शिक्षक अज्ञान से लड़ता है और मुनि कर्मों से लड़ते हैं। श्रावक को अपने क्रोध से लड़ना चाहिए, क्योंकि जीवन का असली शत्रु तो क्रोध ही है। लड़ना ही है तो शेर से लड़ो गधे से लड़ने में क्या फायदा, पड़ोसी से लड़ना यानि कि गधे से लड़ना है। जीवन का असली शेर तो क्रोध है इसे जीतना सच्ची विजय है।
क्षमा
शत्रु रूप लोहा भले ही गरम हो जाय पर हथौड़ा ठण्डा रहकर ही काम दे सकता है।
क्षमा