Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

हमारे व्यवहार में क्रोध ही हमारे विनाश, पतन, हानि, नुकसान का कारण बनता है।

In our conduct it is anger alone that becomes the cause of our destruction, downfall, harm and loss.

— आराध्य सूत्र · #2359

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा