Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

कुपित व्यक्ति की पहले विद्या धुँधली हो जाती है और बाद में भृकुटी टेढ़ी हो जाती है। प्रजा का कोप सब कोपों से बड़ा होता है।

An enraged person first has his learning grow dim and then his brow turns crooked; the wrath of the people is the greatest of all wraths.

— आराध्य सूत्र · #2368

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा