Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

क्रोध से ज्यादा खतरनाक वैर है क्योंकि क्रोध तो अल्प समय के लिए आता है किन्तु वैर की गाँठें वर्षों तक कब्जा जमाए रहती हैं, जिससे आपसी बोल-चाल भी बंद हो जाती है और प्रेम-स्नेह के सम्बन्ध खत्म हो जाते हैं तथा सुलह के सारे रास्ते भी बंद हो जाते हैं और इसी से तनावपूर्ण जीवन हो जाता है सदैव आर्त-रौद्र ध्यान चलता रहता है, जिससे नियम से अधोगति में जाना पड़ता है।

Enmity is more dangerous than anger, for anger comes only briefly, but the knots of enmity hold their grip for years, so that mutual conversation ceases, bonds of love and affection end, all roads to reconciliation close, and from this life becomes tense — sorrowful and cruel meditation goes on constantly, by which one is bound to descend to a lower state.

— आराध्य सूत्र · #2331

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा