Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

ईश्वर ने सबको अपना-अपना गुण दिया है जिससे सबका सम्मान होता है। कोयल की शोभा मधुर स्वर में है, स्त्री की शोभा उसके पतिव्रत होने में है, कुरूप की शोभा उसके विद्वान् होने से है, तपस्वी त्यागी की शोभा उसके क्षमा, शील, संयम से है। यदि कोई तपस्वी होकर भी अति क्रोधित हो जाये तो समाज में उसका सम्मान नहीं होता क्योंकि विपरीत गुणों में सम्मान नहीं मिलता है।

God has given everyone their own quality by which each is honoured. The cuckoo's beauty lies in its sweet voice, a woman's in her fidelity, an ugly person's in his learning, and an ascetic renunciant's in his forgiveness, virtue and restraint. If one who is an ascetic still becomes very angry, he is not honoured in society, for one is not honoured for contrary qualities.

— आराध्य सूत्र · #2328

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा