Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

अपने शत्रु के लिए (अपनी भट्टी को) इतना गरम न करें कि वह आपको ही भूनकर रख दे। किसी को अपना शत्रु मत बनाओ, एक शत्रु सौ मित्रों के होते हुए भी आपका बहुत कुछ बिगाड़ सकता है।

Do not heat your furnace so hot for your enemy that it ends up roasting you. Make no one your enemy; even with a hundred friends, a single enemy can ruin much for you.

— आराध्य सूत्र · #2340

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा