Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

जो स्वयं दोषी होकर भी निर्दोष आत्मीय व्यक्ति को कुपित करता है, वह सर्पयुक्त घर में रहने वाले मनुष्य की भाँति रात में सुख से नहीं सो पाता है।

One who, though himself guilty, angers an innocent loved one cannot sleep peacefully at night, like a man living in a house with a snake.

— आराध्य सूत्र · #2342

इसी विषय के और सूत्र

सभी क्षमा →
कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा