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जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Health

स्वास्थ्य

210 सूत्र · पृष्ठ 1 / 3

सेहत सबसे बड़ी सम्पत्ति है।
स्वास्थ्य
आनन्दित रहने वाला हृदय उत्तम दवा है, निराश मन हड्डियों को भी सुखा देता है।
स्वास्थ्य
भोग ही रोग के कारण हैं–अति भोग अर्थात् अति रोग।
स्वास्थ्य
शक्ति क्षीण होने से बुढ़ापा भी शीघ्र आता है।
स्वास्थ्य
कम खाने से शरीर स्वस्थ होता है, गम खाने से आत्मा स्वस्थ होती है और नम जाने से व्यवहार स्वस्थ होता है।
स्वास्थ्य
शराब सम्पत्ति ही नष्ट नहीं करती बल्कि शरीर भी नष्ट करती है।
स्वास्थ्य
चिन्ता से मस्तिष्क की नसें फूल जाती हैं, जिससे व्यक्ति 'पागल' हो जाता है।
स्वास्थ्य
चिन्ता के दुष्परिणाम—१. मन का उदास रहना, २. बुद्धि का भ्रष्ट होना, ३. मस्तिष्क का भारीपन होना, ४. चेहरे का मुरझाना, ५. शरीर की शक्ति का क्षीण होना, ६. क्रोधी स्वभाव का होना, ७. बालों का सफेद होना, ८. समय से पूर्व वृद्धत्व का आगमन होना है।
स्वास्थ्य
रोग पीड़ित व्यक्ति के लिए धैर्य को छोड़कर दूसरी कोई उत्तम औषधि नहीं है।
स्वास्थ्य
सब रोगों की एक दवाई, हँसना सीखो मेरे भाई।
स्वास्थ्य
दूध पीने वाला शिशु जैसी निर्दोष हँसी हँसता है, वैसी हँसी मस्ती बिखेरने वाली हँसी, कष्टों को विदा करने की अचूक दवा है।
स्वास्थ्य
खुशी से बढ़कर पौष्टिक खुराक और कोई नहीं है।
स्वास्थ्य
प्रसन्नता टेंशन मुक्ति की रामबाण औषधि है।
स्वास्थ्य
प्रसन्नता परम स्वास्थ्यवर्धक है, देह और मन दोनों के लिए मित्र-तुल्य है।
स्वास्थ्य
विनोदप्रियता से ज्यादा असरकारक कोई भी स्वास्थ्यवर्धक टॉनिक नहीं होता है।
स्वास्थ्य
प्रसन्नता स्वास्थ्य है, उदासी रोग है।
स्वास्थ्य
सर्व रोगों की रामबाण औषधि हँसी है जो बिना पैसे की मिलती है और इसका कोई (दुष्प्रभाव) साइडइफेक्ट नहीं होता है।
स्वास्थ्य
हँसी आये तो हँस लेना इससे आँतें खुल जाती है और रोना आये तो रो लेना इससे आँखें धुल जाती हैं।
स्वास्थ्य
भय रक्त के प्रवाह को अवरुद्ध कर देता है और रक्त को विषाक्त तक कर देता है, हँसी और प्रफुल्लता रक्त परिसंचरण में वृद्धि करते हैं, वे रक्त के लिए शक्तिवर्धक हैं।
स्वास्थ्य
उन्मुक्त अट्टहास नई प्रेरणा, स्फूर्ति और विचारों का स्रोत है। जिस प्रकार वनस्पतियों के लिए खुली धूप की जरूरत होती है उसी प्रकार मनुष्य के लिए हँसना टॉनिक का काम करता है। मुख मण्डल हृदय का दर्पण है।
स्वास्थ्य
पैसा कमाने के लिए स्वास्थ्य खोता है और पैसा खोकर स्वास्थ्य प्राप्त करना चाहता है पर खोया स्वास्थ्य प्राप्त नहीं होता है।
स्वास्थ्य
रोग उत्पत्ति के चार कारण–अधिक खाना, अधिक सोना, अधिक विषय सेवन, मलमूत्र का निरोध।
स्वास्थ्य
धरम रहे अरु धन बचे, रोग समूल नशाय। ऐसे लाभ उठाइए, देसी औषध खाय ॥
स्वास्थ्य
इंसान चाहे तो जिंदगी के अंतिम पल तक अपने आपको व्यस्त रखकर कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक रोगों से बच सकता है।
स्वास्थ्य
जो जल्दी सोता है और जल्दी उठता है, वह स्वस्थ सम्पन्न और मेधावी होता है।
स्वास्थ्य
देर तक सूर्य को न देखें। सिर से बोझा नहीं उठाना चाहिए। निरन्तर सूक्ष्म, अत्यन्त दीप्त, अपवित्र या अप्रिय वस्तुओं को देर तक नहीं देखना चाहिए।
स्वास्थ्य
गहरी नींद सुखजनक एवं अनिद्रा आलस्य व अशक्ति की सूचक होती है।
स्वास्थ्य
क्षुधा से बढ़कर कोई रोग नहीं है और अन्न से बढ़कर कोई दूसरी औषधि नहीं है।
स्वास्थ्य
सिगरेट मौत के लिए लाभदायक है उसको जितना खींचों जिन्दगी उतनी छोटी होती है।
स्वास्थ्य
यथायोग्य आहार-विहार करने वाले, कर्मों को यथायोग्य करने वाले, यथायोग्य शयन करने वाले तथा जानने वाले का योग दुःख दूर करने वाला होता है।
स्वास्थ्य
अच्छा स्वास्थ्य और अच्छी समझ जीवन में दो सर्वोत्तम वरदान हैं।
स्वास्थ्य
शरीर को रोगी और दुर्बल रखने के समान दूसरा कोई पाप नहीं है।
स्वास्थ्य
आयु कर्म की उदीरणा किसी भी नशे से हो सकती है अतः नशा आत्महत्या के कारण हैं।
स्वास्थ्य
शिक्षा प्रणाली में १. शारीरिक शिक्षा–योगासन प्राणायाम, पौष्टिक आहार–विटामिन मिनरल प्रोटीन की उपलब्धता शरीर की आवश्यकता, सात्विक खाने के फायदे और गुण, फास्ट फूड के अवगुण/नुकसान और खाने का समय बताना चाहिए।
स्वास्थ्य
पूर्व की ओर मुख करके भोजन करें, दक्षिण की ओर मुख करके मल त्याग करें, उत्तर की ओर मुख करके मूत्र विसर्जन करें, पश्चिम की ओर मुख करके पैर धोयें।
स्वास्थ्य
सूर्य की धूप से सन्तप्त व्यक्ति यदि तुरन्त स्नान करता है तो उसकी दृष्टि मन्द पड़ जाती है और सिर में पीड़ा होती है।
स्वास्थ्य
जो काँसे के बर्तन में भोजन करता है उसकी आयु, बुद्धि, यश और बल की वृद्धि होती है।
स्वास्थ्य
जिसका शरीर बलवान और हृष्ट पुष्ट है परन्तु जिसके मन में बुरी वासना, काम, क्रोध, लोभ, घृणा, द्वेष, वैर, हिंसा, अभिमान, कपट, ईर्ष्या, स्वार्थ आदि दुर्गुण और दुष्ट विचार निवास करते हैं, वह कदापि नीरोग नहीं है, उसकी शारीरिक नीरोगता बहुत ही जल्द नष्ट हो जाती है।
स्वास्थ्य
आनंद का पहला स्रोत है स्वास्थ्य।
स्वास्थ्य
आहार सन्तुलित और विवेकपूर्ण हो तो शरीर में कोई रोग नहीं हो सकता है।
स्वास्थ्य
रात्रि में जल्दी सोना, प्रातः जल्दी उठना, मनुष्य को स्वस्थ, धनी और बुद्धिमान बनाता है।
स्वास्थ्य
आनंद का मुख्य सिद्धान्त है तंदुरुस्ती और तंदुरुस्ती का मुख्य सिद्धान्त है कसरत।
स्वास्थ्य
बिना शारीरिक उन्नति के आध्यात्मिक उन्नति असंभव है।
स्वास्थ्य
सुख का पहला चरण स्वास्थ्य है और समृद्धि का पहला चरण शान्ति है।
स्वास्थ्य
सूर्य की गर्मी से संतप्त व्यक्ति यदि बिना विश्राम किए तत्काल स्नान करता है तो उसकी दृष्टि मन्द पड़ जाती है और सिर में पीड़ा होती है।
स्वास्थ्य
स्वस्थ शरीर आत्मा का भवन है और अस्वस्थ शरीर आत्मा का कारागार है।
स्वास्थ्य
ढलती उम्र में वजन बढ़ाना, आत्महत्या है।
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मोटापा और मधुमेह मौत को आमंत्रण है।
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मोटापा ही समस्त मुसीबतों की महामारी है।
स्वास्थ्य
जितनी मोटी कमर, उतनी छोटी उमर।
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खुराक घटाओ, परिश्रम बढ़ाओ, बुढ़ापे को दूर भगाओ।
स्वास्थ्य
हवा, हरियाली, हलचल हमें हिरण सदृश चुस्त बनाती है।
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पुरुषों का ७० किलो, स्त्रियों का ६० किलो वजन स्वस्थ जीवन की लक्ष्मण रेखा है।
स्वास्थ्य
स्वस्थ पुरुष की दो पहचान हैं, भरपेट भूख और भरपूर नींद।
स्वास्थ्य
शरीर की नीरोगता पर उपेक्षा रखना आत्म सिद्धि की अवहेलना है।
स्वास्थ्य
उन्नति के ३ सूत्र–स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन, सम्यक् साधना। सेहत सबसे बड़ी सम्पत्ति है, संतोष सबसे बड़ा धन है, आत्म विश्वास सबसे बड़ा खजाना व दोस्त है, अस्तित्व में न होना सबसे बड़ा आनन्द है।
स्वास्थ्य
व्यायाम से शारीरिक हल्कापन, कर्म सामर्थ्य, दृढ़ता, कष्ट सहिष्णुता, दोषों की क्षीणता तथा जठराग्नि की वृद्धि होती है।
स्वास्थ्य
अति व्यायाम से थकावट, क्लांति, क्षीणता, प्यास, रक्तपित्त, सांस चढ़ना, खाँसी तथा वमन, ये उपद्रव होते हैं।
स्वास्थ्य
यदि अधिक भोजन किया जाए तो वह प्राण वायु और अपान वायु में बाधक होता है, आलस्य और नींद लाता है तथा पराक्रम को नष्ट करता है।
स्वास्थ्य
तनाव व चिन्ता पैन क्रियाज को हानि पहुँचाते हैं।
स्वास्थ्य
शरीर स्वास्थ्य के इच्छुक व्यक्ति को समय पर मलमूत्र का क्षेपण करना चाहिए, मलमूत्रादि का वेग नहीं रोकना चाहिए, व्यायाम, शयन, स्नान, भोजन और ताजी हवा में घूमना आदि की यथासमय प्रवृत्ति नहीं रोकना चाहिए क्योंकि जो व्यक्ति अपने वीर्य, मल, मूत्र और अपान वायु के वेगों को रोकता है उसे पथरी, भगन्दर, गुल्म और बवासीर आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
स्वास्थ्य
निरंतर बैठे रहने से मनुष्य की जठराग्नि मन्द पड़ जाती है और शरीर स्थूल, आवाज मोटी एवं मानसिक विचार शक्ति स्थूल हो जाती है।
स्वास्थ्य
ध्यान समस्त रोगों की रामबाण औषधि है।
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जो मनुष्य शोक से आतुर हो, ईर्ष्या से भरा हुआ हो, नाना प्रकार के कार्यों की चिंता कर रहा हो या किसी कामना में आसक्त हो, उसे नींद कैसे आ सकती है?
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नींद में राजा और रंक, मूर्ख और विद्वान् समान हो जाते हैं।
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जागृत अवस्था की नींद सबसे ज्यादा हानि का कारण है।
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ग्रीष्म ऋतु को छोड़कर अन्य ऋतुओं में दिन में सोना शरीर में छिपे रोगरूपी सर्पों को जगाना है और समस्त कार्य सिद्धि में बाधक है।
स्वास्थ्य
प्रातःकाल उठकर अपना मुख घृत अथवा दर्पण में देखना चाहिए तथा परमात्मा का नाम लेकर पलंग (शय्या) से उठना चाहिए।
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व्यायाम के बिना दिमाग वैसे ही कमजोर पड़ जाता है जैसे शरीर।
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व्यायाम भी शरीर के लिए उतना ही आवश्यक है जितना कि हवा, पानी और भोजन।
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प्रातःकाल स्वच्छ, सुगंधित, स्फूर्तिदायक हवा में टहलना अच्छा व्यायाम कहलाता है।
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निश्चिन्त वनों में स्वेच्छापूर्वक ताजी वायु में विहार करने वाले हाथी आदि व्याधियों से पीड़ित नहीं होते हैं।
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बीमारी की चिकित्सा के बजाय बचाव रखना श्रेष्ठ है।
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जो व्यक्ति अपनी जठराग्नि को वज्राग्नि अर्थात् कठोर से कठोर वस्तु को पचाने वाली करना चाहे उसे सदा भोजन से पूर्व मुद्गर आदि घुमाना चाहिए।
स्वास्थ्य
घृत पान के पश्चात् भोजन करने से मनुष्य की जठराग्नि प्रदीप्त होती है तथा नेत्र की ज्योति बढ़ती है।
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