कम खाने से शरीर स्वस्थ होता है, गम खाने से आत्मा स्वस्थ होती है और नम जाने से व्यवहार स्वस्थ होता है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
चिन्ता के दुष्परिणाम—१. मन का उदास रहना, २. बुद्धि का भ्रष्ट होना, ३. मस्तिष्क का भारीपन होना, ४. चेहरे का मुरझाना, ५. शरीर की शक्ति का क्षीण होना, ६. क्रोधी स्वभाव का होना, ७. बालों का सफेद होना, ८. समय से पूर्व वृद्धत्व का आगमन होना है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
दूध पीने वाला शिशु जैसी निर्दोष हँसी हँसता है, वैसी हँसी मस्ती बिखेरने वाली हँसी, कष्टों को विदा करने की अचूक दवा है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
सर्व रोगों की रामबाण औषधि हँसी है जो बिना पैसे की मिलती है और इसका कोई (दुष्प्रभाव) साइडइफेक्ट नहीं होता है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
हँसी आये तो हँस लेना इससे आँतें खुल जाती है और रोना आये तो रो लेना इससे आँखें धुल जाती हैं। स्वास्थ्य 0 – भेजें
भय रक्त के प्रवाह को अवरुद्ध कर देता है और रक्त को विषाक्त तक कर देता है, हँसी और प्रफुल्लता रक्त परिसंचरण में वृद्धि करते हैं, वे रक्त के लिए शक्तिवर्धक हैं। स्वास्थ्य 0 – भेजें
उन्मुक्त अट्टहास नई प्रेरणा, स्फूर्ति और विचारों का स्रोत है। जिस प्रकार वनस्पतियों के लिए खुली धूप की जरूरत होती है उसी प्रकार मनुष्य के लिए हँसना टॉनिक का काम करता है। मुख मण्डल हृदय का दर्पण है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
पैसा कमाने के लिए स्वास्थ्य खोता है और पैसा खोकर स्वास्थ्य प्राप्त करना चाहता है पर खोया स्वास्थ्य प्राप्त नहीं होता है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
इंसान चाहे तो जिंदगी के अंतिम पल तक अपने आपको व्यस्त रखकर कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक रोगों से बच सकता है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
देर तक सूर्य को न देखें। सिर से बोझा नहीं उठाना चाहिए। निरन्तर सूक्ष्म, अत्यन्त दीप्त, अपवित्र या अप्रिय वस्तुओं को देर तक नहीं देखना चाहिए। स्वास्थ्य 0 – भेजें
यथायोग्य आहार-विहार करने वाले, कर्मों को यथायोग्य करने वाले, यथायोग्य शयन करने वाले तथा जानने वाले का योग दुःख दूर करने वाला होता है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
शिक्षा प्रणाली में १. शारीरिक शिक्षा–योगासन प्राणायाम, पौष्टिक आहार–विटामिन मिनरल प्रोटीन की उपलब्धता शरीर की आवश्यकता, सात्विक खाने के फायदे और गुण, फास्ट फूड के अवगुण/नुकसान और खाने का समय बताना चाहिए। स्वास्थ्य 0 – भेजें
पूर्व की ओर मुख करके भोजन करें, दक्षिण की ओर मुख करके मल त्याग करें, उत्तर की ओर मुख करके मूत्र विसर्जन करें, पश्चिम की ओर मुख करके पैर धोयें। स्वास्थ्य 0 – भेजें
सूर्य की धूप से सन्तप्त व्यक्ति यदि तुरन्त स्नान करता है तो उसकी दृष्टि मन्द पड़ जाती है और सिर में पीड़ा होती है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
जिसका शरीर बलवान और हृष्ट पुष्ट है परन्तु जिसके मन में बुरी वासना, काम, क्रोध, लोभ, घृणा, द्वेष, वैर, हिंसा, अभिमान, कपट, ईर्ष्या, स्वार्थ आदि दुर्गुण और दुष्ट विचार निवास करते हैं, वह कदापि नीरोग नहीं है, उसकी शारीरिक नीरोगता बहुत ही जल्द नष्ट हो जाती है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
रात्रि में जल्दी सोना, प्रातः जल्दी उठना, मनुष्य को स्वस्थ, धनी और बुद्धिमान बनाता है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
सूर्य की गर्मी से संतप्त व्यक्ति यदि बिना विश्राम किए तत्काल स्नान करता है तो उसकी दृष्टि मन्द पड़ जाती है और सिर में पीड़ा होती है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
उन्नति के ३ सूत्र–स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन, सम्यक् साधना। सेहत सबसे बड़ी सम्पत्ति है, संतोष सबसे बड़ा धन है, आत्म विश्वास सबसे बड़ा खजाना व दोस्त है, अस्तित्व में न होना सबसे बड़ा आनन्द है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
व्यायाम से शारीरिक हल्कापन, कर्म सामर्थ्य, दृढ़ता, कष्ट सहिष्णुता, दोषों की क्षीणता तथा जठराग्नि की वृद्धि होती है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
अति व्यायाम से थकावट, क्लांति, क्षीणता, प्यास, रक्तपित्त, सांस चढ़ना, खाँसी तथा वमन, ये उपद्रव होते हैं। स्वास्थ्य 0 – भेजें
यदि अधिक भोजन किया जाए तो वह प्राण वायु और अपान वायु में बाधक होता है, आलस्य और नींद लाता है तथा पराक्रम को नष्ट करता है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
शरीर स्वास्थ्य के इच्छुक व्यक्ति को समय पर मलमूत्र का क्षेपण करना चाहिए, मलमूत्रादि का वेग नहीं रोकना चाहिए, व्यायाम, शयन, स्नान, भोजन और ताजी हवा में घूमना आदि की यथासमय प्रवृत्ति नहीं रोकना चाहिए क्योंकि जो व्यक्ति अपने वीर्य, मल, मूत्र और अपान वायु के वेगों को रोकता है उसे पथरी, भगन्दर, गुल्म और बवासीर आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं। स्वास्थ्य 0 – भेजें
निरंतर बैठे रहने से मनुष्य की जठराग्नि मन्द पड़ जाती है और शरीर स्थूल, आवाज मोटी एवं मानसिक विचार शक्ति स्थूल हो जाती है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
जो मनुष्य शोक से आतुर हो, ईर्ष्या से भरा हुआ हो, नाना प्रकार के कार्यों की चिंता कर रहा हो या किसी कामना में आसक्त हो, उसे नींद कैसे आ सकती है? स्वास्थ्य 0 – भेजें
ग्रीष्म ऋतु को छोड़कर अन्य ऋतुओं में दिन में सोना शरीर में छिपे रोगरूपी सर्पों को जगाना है और समस्त कार्य सिद्धि में बाधक है। स्वास्थ्य 0 – भेजें
प्रातःकाल उठकर अपना मुख घृत अथवा दर्पण में देखना चाहिए तथा परमात्मा का नाम लेकर पलंग (शय्या) से उठना चाहिए। स्वास्थ्य 0 – भेजें
निश्चिन्त वनों में स्वेच्छापूर्वक ताजी वायु में विहार करने वाले हाथी आदि व्याधियों से पीड़ित नहीं होते हैं। स्वास्थ्य 0 – भेजें
जो व्यक्ति अपनी जठराग्नि को वज्राग्नि अर्थात् कठोर से कठोर वस्तु को पचाने वाली करना चाहे उसे सदा भोजन से पूर्व मुद्गर आदि घुमाना चाहिए। स्वास्थ्य 0 – भेजें
घृत पान के पश्चात् भोजन करने से मनुष्य की जठराग्नि प्रदीप्त होती है तथा नेत्र की ज्योति बढ़ती है। स्वास्थ्य 0 – भेजें