Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 78

प्रेम से सब कुछ पाया जा सकता है

112 सूत्र · पृष्ठ 2 / 2

अगर आपको अपने जीवन से सच्चा प्रेम है तो समय के मूल्य को समझो।
समय
पड़ोसी से आत्मीयता जतलाने पर पड़ोसी अपना प्यार पूरे परिवार पर उड़ेल देता है।
संगति
प्रेम का कच्चा धागा जन्म-जन्मान्तरों को बाँध लेता है, जिसे लोहे की जंजीर नहीं बाँध पाती है।
विविध
जो मनुष्य ईश्वर को छोड़कर दूसरे से प्रेम करता है वह क्या कभी सुखी हो सकता है?
भक्ति
प्रेम की शक्ति डण्डे की शक्ति से हजार गुनी प्रभावशाली और स्थायी होती है।
विविध
यदि कोई क्षणभर को भी आपसे मिले तो उससे प्रेमपूर्वक मिलो, उसके हृदय में प्रेम का अमृत भर दो फिर वह आपको कभी भी भूल न पायेगा।
विविध
प्रेम सबसे, विश्वास थोड़ों से तथा नुकसान किसी का भी नहीं करना चाहिए।
विविध
जैसे शरीर को भोजन की जरूरत होती है वैसे ही आत्मा को प्रेम की जरूरत होती है।
विविध
अपने मन को मंदिर बनाओ और उसमें प्रेम-प्रीति की प्रतिमा को बसाओ।
मन
महान् वह है जिसने अपने दुश्मनों को हरा दिया किन्तु महामना वह है जिसने उन्हें अपना बना लिया है।
क्षमा
बात करते समय मन में किंचित् न रहे शल्य, वही है वात्सल्य।
विविध
व्यक्ति को शल्य से नहीं वात्सल्य से जीना चाहिए।
विविध
स्थायी शान्ति संधिपत्रों से नहीं किन्तु प्रेम से हो सकती है।
विविध
शान्ति तलवार से नहीं, प्रेम के जोर से होती है, प्रेम से बढ़कर जोड़ने वाली चीज दुनिया में नहीं है।
विविध
सम्मान लड़ने से नहीं लाड़ करने से मिलता है।
विनम्रता
साम्प्रदायिक आस्था आपसी प्रेम एवं एकता को खंडित करती है।
विविध
साम्प्रदायिकता टकराती है तो विद्वेष और शत्रुता पैदा होती है।
विविध
पृथ्वी पर सब कुछ संभव है लेकिन साम्प्रदायिक मन में प्रेम और एकता संभव नहीं है।
विविध
जो आदमी दूसरों के भावों का आदर करना नहीं जानता उसे दूसरे से भी सद्भावना की आशा नहीं करनी चाहिए।
विविध
आप जो हैं उसका बहुत कम श्रेय आपको जाता है और याद रखें अगर लोग चिड़चिड़े, तार्किक या पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं तो इसमें उनका दोष भी बहुत कम है, अतः उनके साथ सहानुभूति रखिये और स्वयं से कहिए यदि मुझ पर ईश्वर की कृपा न होती तो मैं भी इसकी जगह पर हो सकता था इसलिए सामने वाले व्यक्ति के विचारों और इच्छाओं के प्रति सहानुभूति प्रदर्शित करें क्योंकि पूरी मानव जाति सहानुभूति चाहती है, बच्चा अपनी चोट दिखाता है और यदि उसे चोट न भी लगी हो तो वह जानबूझकर चोट लगा लेता है, जिससे उसे सहानुभूति मिल सके, महिलायें तो अत्यधिक सहानुभूति की भूखी रहती हैं और जब उन्हें सहानुभूति नहीं मिलती तो अक्सर बीमारी का बहाना बनाकर लेट जाती हैं जिससे पति दुकान आदि से आकर सिर के पास बैठकर पूछता है अब आपका स्वास्थ्य कैसा है?
विविध
दुनिया में सबसे कीमती भेंट है सरल हृदय से सहानुभूति देना।
विविध
साधुओं को श्रावक के प्रति वात्सल्य भाव रखना चाहिए क्योंकि श्रावक साधु के पास शान्ति पाने के लिए आता है।
चरित्र
सुख परिग्रह के बाहुल्य में नहीं, हृदय की विशालता से बढ़ता है।
संतोष
सुख और आनंद ऐसे इत्र हैं, जिन्हें जितना अधिक दूसरों पर छिड़केंगे, उतनी ही सुगन्ध आपके भीतर समायेगी।
विविध
यदि लोगों के सम्मान के लिए तेरे हृदय में स्थान है, तब तो तेरे लिए भी लोग सहयोग करने तैयार है, अन्यथा तो कुछ भी चाह करना पागलपन है।
विनम्रता
आकर्षक और प्रभावशाली व्यक्तित्व बनाये रखने के लिए प्रसन्न चित्त दिखना आवश्यक है, स्नेह-प्रेम और सद्भावना से भरे हृदय में मधुरवाणी और व्यवहार में आकर्षण अपने आप दिखाई देता है।
चरित्र
अभिषेक की धारा की तरह सुधार शीर्षस्थ लोगों से शुरू होना चाहिए।
चरित्र
किसी ने परमात्मा से पूछा प्यार का असली मतलब क्या है, उन्होंने हँसकर कहा जो मतलब के लिए किया जाये वो प्यार नहीं कहलाता है।
विविध
आप कितने ही परेशान क्यों न हो, परन्तु परेशान को देखकर ये जरूर कहें कि चिंता की कोई बात नहीं 'मैं हूँ ना' ये तीन शब्द उसके जीवन में ऊर्जा भर देंगे।
विविध
मिले को अपना न समझो मुक्ति स्वतः सिद्ध है।
अनासक्ति
किसी की नफरत पाकर विजित होने की अपेक्षा प्यार पाकर हार जाना अच्छा है।
क्षमा
जिससे काम निकालना है उसे खिलाने के साथ स्नेह वात्सल्य भी दो।
विविध
सुकाल में किया कार्य सुफल देता है अकाल का कार्य कुफल देता है।
समय
घर के बाहर भले ही दिमाग ले जाओ क्योंकि दुनिया एक बाजार है, लेकिन घर में दिल लेकर आना क्योंकि वहाँ एक परिवार है।
परिवार
जिस घर में प्रेम होता है वहाँ सफलता और धन स्वयं चलकर आते हैं।
परिवार
चाहत ऐसी हो कि उसे तुम्हारे सिवा किसी और की चाहत पसंद ना आये। काश कोई ऐसा हो जो गले लगाकर कहे तेरे दर्द से मुझे भी तकलीफ होती है।
विविध
जब दर्द और कड़वी बोली मीठी लगने लगे तब समझना आपको जीना आ गया।
विविध
जिन्दगी में जो चाहे हासिल कर लो, बस ख्याल रखना कि आपकी मंजिल का रास्ता कभी लोगों के दिलों को तोड़ता हुआ न गुजरे।
चरित्र
अच्छा 'दिल' सम्बन्धों को तो जीत सकता है, पर अच्छा स्वभाव जीवन भर निभा सकता है।
चरित्र
प्रेम सभी रोगों की औषधि है। प्रेम शान्ति का महामंत्र है। प्रेम से तनाव नष्ट होता है, प्रेम ही परमात्मा तक पहुँचने की सीढ़ी है।
विविध
इंसान होता है प्यार करने के लिए और पैसा होता है उपयोग करने के लिए, लेकिन दुःख तब होता है जब हम प्यार तो पैसे से करते है और उपयोग इंसान का करते हैं।
विविध
आदर करो उसका जिसने अपनी व्यस्तता में आपके लिए समय निकाला परन्तु प्यार करो उसको जिसने अपनी व्यस्तता को नहीं देखा जब आपको जरूरत थी उसकी।
विविध
कठिन समय में ज्ञानी रास्ता खोजता और अज्ञानी बहाना खोजता है।
विवेक
माँ सबकी जगह ले सकती है लेकिन एक माँ की जगह कोई नहीं ले सकता मुफ्त में सिर्फ माँ बाप का प्यार मिलता है इसके बाद दुनिया में हर रिश्ते के लिए कुछ न कुछ चुकाना पड़ता है।
परिवार
आँसू पौंछकर हँसाया है मुझे, मेरी गलती पर भी सीने से लगाया है मुझे कैसे प्यार न हो ऐसी माँ से, जिसने सच्चा जीना सिखाया है मुझे।
परिवार
जिसके हृदय में वात्सल्य नहीं वह जीव हिंसक है।
विविध
प्रेम बराबर वालों में, स्नेह छोटों से, राग विशेषों से और वात्सल्य धर्म-धर्मात्मा से होता है।
विविध
वात्सल्य की दृष्टि से शत्रु भी मित्र बन जाते हैं।
विविध
यदि किसी को कुछ दे सकते हो तो पहले वात्सल्य देना।
विविध
यदि किसी से उत्कृष्ट प्रीति रखना चाहते हो तो उससे तीन काम मत करो–१. वाचनिक विवाद, २.अर्थ का लेन-देन, ३.परोक्ष में उसकी स्त्री से मेल-जोल।
संगति
देना, लेना, गुप्त बात कहना, गुप्त बात पूछना, भोजन करना और कराना ये ६ प्रीति के लक्षण हैं।
संगति
सिर्फ दिल है जो बिना आराम किए सालों साल काम करता रहता है, अतः इसे हमेशा खुश रखिये चाहे अपना हो या दूसरों का।
स्वास्थ्य