अनासक्ति क्या आप पूजा-प्रतिष्ठा की चाह से मुक्त हैं? Are you free from the craving for worship and prestige? — आराध्य सूत्र · #43 0 – भेजें 🖼️ इमेज सेव करें · Save image card
किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है। अनासक्ति 0 – भेजें
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है। अनासक्ति 0 – भेजें
जैसे अतिथि आपके माल पर मालकियत नहीं जताता है, वैसे ही आप भी पर पदार्थ पर मालकियत मत जताओ क्योंकि आप भी अतिथि हो। अनासक्ति 0 – भेजें
दुनिया में सभी को अकेले ही जीना मरना पड़ता है, भले ही बहुत भीड़ हो किन्तु अपने आँसु स्वयं को ही पोंछने पड़ते हैं। अनासक्ति 0 – भेजें