Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 22

जुबान पर ताला नहीं लगाम चाहिए।

100 सूत्र · पृष्ठ 2 / 2

शरीर कमजोर हो और मन मजबूत हो तो काम चल जायेगा, पर मन कमजोर हो शरीर मजबूत हो तो काम नहीं चलेगा।
मन
धर्म केवल ग्रन्थों, पन्थों और सन्तों के पास नहीं बल्कि हर एक के दिल से होना चाहिए। धर्म का सम्बन्ध दीवारों से नहीं दिल से होना चाहिए। लोगों को प्रभावित नहीं प्रकाशित करें। सूर्य दिन में प्रकाश करता है और चन्द्रमा रात में लेकिन सन्त ऐसे ज्योति पुरुष हैं जो दिन-रात दोंनो को प्रकाशित करते हैं,
धर्म
कुछ लोग व्यवहार की वजह से दिल में उतर जाते हैं और कुछ लोग दिल से उतर जाते हैं।
चरित्र
धर्म बुढ़ापे की औषधि नहीं युवा होने का टॉनिक है, दो दिन ही जियें लेकिन सिर का ताज बनकर जियें या फिर महाराज बनकर जियें।
धर्म
जीवन एक युद्ध है, जीवन में लड़ना पड़ता है चिकित्सक बीमारी से लड़ता है, वकील अन्याय से लड़ता है, शिक्षक अज्ञान से लड़ता है और मुनि कर्मों से लड़ते हैं। श्रावक को अपने क्रोध से लड़ना चाहिए, क्योंकि जीवन का असली शत्रु तो क्रोध ही है। लड़ना ही है तो शेर से लड़ो गधे से लड़ने में क्या फायदा, पड़ोसी से लड़ना यानि कि गधे से लड़ना है। जीवन का असली शेर तो क्रोध है इसे जीतना सच्ची विजय है।
क्षमा
सत्ता और सत्य यूँ ही सीधे-सीधे नहीं मिलते हैं, दोनों के लिए तप जरूरी है। सत्ता दूसरों को सता-सता कर मिलती है और सत्य स्वयं को तपा-तपा कर प्राप्त किया जाता है। सत्ता शाश्वत नहीं है, सत्ता का पत्ता कभी भी कट सकता है, लेकिन सत्य शाश्वत है, सत्ता और सत्य दोनों के बीच युद्ध होता है, लेकिन महाभारत का उदाहरण साक्षी है कि युद्ध के अठारहवें दिन जीत सत्य की ही हुई थी।
सत्य
जिस तरह बाल काले करने के लिए डाई लगाते हैं, उसी तरह काले मन को सफेद करने के लिए सत्सङ्ग की डाई लगाना चाहिए। बाल पुनः सफेद हो जाते हैं पर मन पुनः काला नहीं होता है।
संगति
टी.वी., फ्रिज, कूलर, ए.सी., पङ्खा आदि का रिमोट है तो मन का भी रिमोट होना चाहिए और केवल पुण्य का चैनल लगाकर रखना चाहिए।
मन
ईश्वर पर भरोसा कीजिए पर ईश्वर के भरोसे मत बैठिये, क्योंकि ये विचार अच्छे सेहत मन्द को भी मानसिक तौर पर विकलाङ्ग बना देते हैं।
पुरुषार्थ
मोक्ष गिफ्ट या लिफ्ट में नही खुद में सिफ्ट होने पर मिलता है।
ध्यान
जन्मदिन होटल में दोस्तों को पार्टी देकर या पर्यटन स्थल की सैर करके, मोमबत्ती बुझाकर और केक काटकर नहीं, बल्कि किसी गरीब को पढ़ा लिखाकर योग्य बनाने से मनाना सार्थक होगा।
दान
ईमानदारी रखने से और अच्छी चीज देने से व्यापार में कभी फैल नहीं होते हैं।
समृद्धि
जन्म के समय ढाई किलो वजन होता है, चिता की राख भी ढाई किलो होती है, फिर ढाई दिन की उपलब्धि पर इतना अहङ्कार क्यों? त्याग में अपने से बड़े को देखिए और सजग होइये।
विनम्रता
सज्जन गाय की तरह घास के बदले कई गुना देता है, दुर्जन सर्प की भान्ति दूध पीकर भी जहर उगलता है, फिर भी सज्जन अपना स्वभाव नहीं छोड़ते हैं।
चरित्र
स्थान बदलने से नहीं मनःस्थिति बदलने से परिस्थिति बदल जाती है।
मन
जैसे नेत्रों में जरा सा कण जाने से वस्तु ठीक से नहीं दिखती है, उसी तरह मन में थोड़ी सी भी वासना रहने से आत्म दर्शन नहीं होता है।
ध्यान
दर्पण में चेहरा तभी दिखाई पड़ता है जब वह साफ और स्थिर हो, उसी प्रकार शुद्ध मन से भगवान के दर्शन होतेहैं।
भक्ति
कञ्जूस अन्धा होता है, क्योंकि उसे धन के सिवाय कुछ भी दिखाई नहीं देता हैं। फिजूल खर्ची भी अन्धा होता है, वह आज को देखता है कल की नहीं सोचता। रिझाने वाली नारी अन्धी होती है वह बुढ़ापे की झुरियां नहीं देखती। अज्ञानी भी अन्धा होता है क्योंकि उसे कुछ समझ में नहीं आता है।
विवेक
अन्धा वह नहीं जिसकी आँखे फूटी हैं, अन्धा वह है जो अपने दोष छिपाता है।
चरित्र
अपनी विद्वत्ता पर अभिमान करना सबसे बड़ा अज्ञान है।
विनम्रता
आलसी, बहुभोजी, क्रूर, जो देश-काल का ज्ञाता न हो, निन्दित भेषी हो उसे घर में स्थान नहीं देना चाहिए।
संगति
पहले दिन अतिथि कहलाता है दूसरे दिन बोझ लगता है तीसरे दिन काँटे जैसा चुभता है।
परिवार
अन्याय को मिटाइये पर अपने को मिटाकर नहीं।
सत्य
अविनय से पढ़ी विद्या और बेईमानी से कमाया धन अधिक समय नहीं टिकता है।
ज्ञान
जो बात वाणी प्रकट नहीं कर पाती उस बात को आँखे आसानी से बोल देती हैं।
वाणी
अश्रुपूर्ण प्रेम अत्यन्त लुभावना होता है, आँखो के आंसु अमूल्य वस्तु हैं।
भक्ति
प्रेम के, कृतज्ञता के, आनन्द के, दुःख के और पश्चात्ताप के आँसुओं से जीवन का बाग पनपता है।
चरित्र
सुन्दर आचरण सुन्दर शरीर से अच्छा है, आत्मप्रशंसा, छोटे पन का चिन्ह है।
चरित्र
शिल्पकार की हथौड़ी के प्रहार को सहे विना मूर्ति नहीं बनती, कठोर विपदाओं के विना उन्नति नहीं होती।
पुरुषार्थ
इतिहास पढ़ने से मनुष्य बुद्धिमान बनता है तथा महान व्यक्ति किसी का अपमान नहीं करता है।
ज्ञान
एकता का किला बड़ा मजबूत होता है, इसके भीतर रहने वाला प्राणी दुःख नहीं भोगता है।
संगति
अनेक तिनकों से बनाई गयी रस्सी बड़े-बड़े हाथियों को बाँध लेती है।
संगति
प्रत्येक व्यक्ति को हाथ की पाँच अङ्गुलियों की तरह रहना चाहिए, कोई छोटी, कोई बड़ी होने पर भी कोई चीज सब इकट्ठी होकर उठाती हैं।
संगति
दुनियाँ में दो ही ताकतें हैं, कलम की और तलवार की, अन्त में तलवार कलम से हार जाती है।
ज्ञान
पागल, प्रेमी और कवि इनकी कल्पनाएं एक सी होती है।
Misc.
खूबसूरती मदिरा से भी बुरी है, क्योंकि मदिरा पीने वाले को मदोन्मत्त करती है, खूबसूरती स्वयं को और देखने वालों को मदोन्मत्त करती है।
अनासक्ति
जिस भवन में अतिथि के चरण नहीं पड़ते, वह भवन 'वन' बन जाता है, वहाँ सत्कार का लोप हो जाता है।
परिवार
मस्तिष्क की शक्ति अभ्यास है आराम नहीं। धैर्य सारे आनन्द और शक्तियों का स्रोत है।
पुरुषार्थ
शत्रु रूप लोहा भले ही गरम हो जाय पर हथौड़ा ठण्डा रहकर ही काम दे सकता है।
क्षमा
पहले अपना निर्णय नहीं देना चाहिए, वस्तु निर्णय के तीन तत्त्व हैं अनुभव, ज्ञान और व्यक्त करने की क्षमता।
विवेक